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Maharajganj News: भाजपा के मजबूत किले को नहीं भेद पाया गठबंधन

Wed, 05 Jun 2024 02:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Wed, 05 Jun 2024 02:37 AM IST
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The alliance could not penetrate the strong fort of BJP
महराजगंज। आजादी के बाद से महराजगंज लोकसभा सीट के इतिहास पर नजर डाले तो यहां वोट प्रतिशत घटने बढ़ने से कुछ खास असर नहीं हाेता है। यहां के वोटरों का भरोसा एक बार जिस पर हो गया, उसके साथ लंबा वक्त गुजारते हैं। आंकड़े बया कर रहे हैं कि गुजरे वक्त में यह क्षेत्र कांग्रेस का अभेद किला हुआ करता था। उस वक्त में भी वोट प्रतिशत में उतार चढ़ाव से पार्टी को कुछ खास असर नहीं होता था। अब यही भाजपा के साथ हो रहा है। यहां की जनता से वर्ष 1991 से अब तक सिर्फ दो बार वर्ष 1999 व 2009 में साथ छोड़ा था, इसके बाद से हमेशा साथ रही। इस बार भी जनता भाजपा के साथ रही।
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जानकारी के अनुसार, महराजगंज जिले में एक लोकसभा सीट है। सदर विधानसभा, फरेंदा विधानसभा, पनियरा विधानसभा, नौतनवा विधानसभा व सिसवा विधानसभा है। इस जिले में लगभग 342 वर्ग किमी क्षेत्र वन से घिरा हुआ है जो पूरे जिले के लगभग 11.59 प्रतिशत क्षेत्र के बराबर है। वर्ष 1952 से 1989 तक जनता ने कांग्रेस का साथ दिया। इस बीच निर्दल के साथ भी जनता रही है।
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बीते चुनावों का आंकड़ा बता रहा है कि यह क्षेत्र भाजपा के लिए काफी मुफीद है। महराजगंज से पंकज चौधरी भाजपा के टिकट से सातवीं बार एमपी चुने गए। इस बार भी भाजपा के मजबूत किले को गठबंधन भेद नहीं पाया। वर्ष 1991 से अब तक सिर्फ दो बार भाजपा को हार मिली है। वरिष्ठ भाजपा नेता ब्रजेंद्र नाथ त्रिपाठी कहते हैं कि यह क्षेत्र में भाजपा का गढ़ है। यहां की जनता मुश्किल समय में भी भाजपा के साथ रही है। यहां चुनाव में हर बार भाजपा के परंपरागत वोटर साथ रहते हैं। भाजपा के कोर वोटर बोलते नहीं है। राजनीतिक जानकार यह ठीक से समझते हैं।
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कब कौन हुआ महराजगंज का सांसद एक नजर में
वर्ष 1952 में 32.60 प्रतिशत--निर्दल-प्रोफेसर शिब्बन लाल सक्सेना
वर्ष 1962 में 47 प्रतिशत--कांग्रेस-महादेव प्रसाद
वर्ष 1967 में 54 प्रतिशत--कांग्रेस-एम प्रसाद
वर्ष 1971 में 40 प्रतिशत --निर्दल--प्रोफेसर शिब्बन लाल सक्सेना
वर्ष 1977 में 54 प्रतिशत--भारतीय लोकदल--प्रोफेसर शिब्बन लाल सक्सेना
वर्ष 1980 में 55 प्रतिशत-कांग्रेस--अशफाक हुसैन
वर्ष 1984 में 64 प्रतिशत--कांग्रेस-जितेंद्र सिंह
वर्ष 1989 में 58 प्रतिशत--कांग्रेस--हर्षवर्धन
वर्ष 1991 में 57 प्रतिशत--भाजपा-पंकज चौधरी
वर्ष 1996 में 57 प्रतिशत --भाजपा-पकज चौधरी
वर्ष 1998 में 60 प्रतिशत--भाजपा--पंकज चौधरी
वर्ष 1999 में 61 प्रतिशत ---समाजवादी पार्टी--अखिलेश सिंह
वर्ष 2004 में 57 प्रतिशत--भाजपा--पंकज चाैधरी
वर्ष 2009 में 56 प्रतिशत --कांग्रेस-हर्षवर्धन
वर्ष 2014 में 61 प्रतिशत--भाजपा--पंकज चौधरी
वर्ष 2019 में 64 प्रतिशत --भाजपा-पंकज चौधरी
वर्ष 2024 में 48 प्रतिशत-भाजपा पंकज चौधरी
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