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Maharajganj News: रियल एस्टेट से पैसा कमाने वालों की जेब पर बढ़ेगा कर का बोझ
Fri, 26 Jul 2024 04:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 26 Jul 2024 04:35 AM IST
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महुअवा में की गई प्लाटिंग।
महराजगंज।
रियल एस्टेट कारोबारियों और निजी तौर पर मकान की खरीद-बिक्री करने वालों अब मुनाफे पर ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा, क्योंकि नए बजट में इंडेक्सेशन बेनिफिट को समाप्त कर दिया गया है। इंडेक्सेशन बेनिफिट की मदद से कारोबारी और आम लोग प्राॅपर्टी की खरीद-बिक्री में होने वाले लाभ को कम कर पाते थे, जिससे उन्हें लॉग टर्म कैपिटल गैन टैक्स कम देना होता था। सरकार के इस फैसले से रियल एस्टेट कारोबारी और आम लोग चिंतित हैं।
रियल एस्टेट का कारोबार करने वाले बागेश्वर सिंह कहते हैं कि अब तो कारोबार में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। बजट में मुनाफे पर अब ज्यादा टैक्स देना होगा। इससे मुनाफे पर असर पड़ेगा। पूंजी लगाकर लंबे समय तक इंतजार करने के बाद जमीन का अच्छा भाव मिलता है। जोखिम रकम लगाने वाला उठाएगा लेकिन फायदा सरकार लेगी। यह ठीक नहीं है।
इसी तरह से बड़हरामीर के राजेश पाठक ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यही रहा तो आने वाले दिनों में कारोबार में परेशानी बढ़ जाएगी। मुनाफे कम होगा तो निश्चित ही कारोबार प्रभावित होगा। सरकार का यह फैसला सही नहीं है।
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पहले के मुकाबले ज्यादा लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन टैक्स चुकाना होगा
अर्थशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर आशुतोष उपाध्याय ने बताया कि यूनियन बजट में इंडेक्सेशन बेनिफिट को समाप्त कर दिया गया है, जो पहले संपत्ति मालिकों को मुद्रास्फीति के आधार पर अपने खरीद मूल्य को समायोजित करने में सक्षम बनाता था, जिससे पूंजीगत लाभ कम हो जाता था और कम कर देना पड़ता था। बजट में इंडक्शन बेनिफिट्स खत्म होने से घर या रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रॉपर्टी बेचने पर और पहले के मुकाबले ज्यादा लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन टैक्स चुकाना होगा।
साढ़े तीन लाख से अधिक टैक्स पहले की तुलना में बढ़ गया
इसे कुछ यूं समझिए... मान लीजिए आपने 2005 में कोई प्रॉपर्टी 15 लाख रुपये में खरीदी थी। उसे 2024 में 60 लाख रुपये में बेच दी तो इंडेक्सेशन बेनिफिट होने पर प्रॉपर्टी की खरीद मूल्य को इन्फ्लेशन के साथ एडजस्ट किया जाता था। वर्तमान महंगाई दर पर प्रॉपर्टी की खरीद मूल्य 50 लाख रुपये मानी जाए तो 10 लाख रुपये का कैपिटल गेन होता है। अब इस पर 20 प्रतिशत की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगने पर दो लाख रुपये टैक्स देना होता था। बजट के बाद इसी प्रॉपर्टी पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के बिना लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन वर्तमान कीमत में से पुराने कीमत को घटाकर निकाला जाएगा और उस पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा, यानि 45 लाख रुपये का जो लाभ हो रहा है उस पर 5.50 लाख से अधिक टैक्स देना होगा। इस प्रकार अब उसी संपत्ति पर साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक टैक्स पहले की तुलना में बढ़ गया।
रियल एस्टेट कारोबार पर पड़ेगा प्रभाव
प्रो. आशुतोष के अनुसार, इंडेक्सेशन लाभों को हटाना रियल एस्टेट बाजार में निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय है। खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय तक संपत्ति रखते हैं। इंडेक्सेशन लाभ हटने से रियल एस्टेट की बिक्री पर कर योग्य पूंजीगत लाभ बढ़ जाएगा, जिससे विक्रेताओं पर कर का बोझ बढ़ जाएगा। इससे उनके शुद्ध लाभ पर बड़ा प्रभाव पड़ सकेगा। इससे रियल एस्टेट निवेश हतोत्साहित होगा। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो लंबे समय तक संपत्ति को रखते हैं, जहां मुद्रास्फीति अधिक महत्वपूर्ण है।
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रियल एस्टेट कारोबारियों और निजी तौर पर मकान की खरीद-बिक्री करने वालों अब मुनाफे पर ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा, क्योंकि नए बजट में इंडेक्सेशन बेनिफिट को समाप्त कर दिया गया है। इंडेक्सेशन बेनिफिट की मदद से कारोबारी और आम लोग प्राॅपर्टी की खरीद-बिक्री में होने वाले लाभ को कम कर पाते थे, जिससे उन्हें लॉग टर्म कैपिटल गैन टैक्स कम देना होता था। सरकार के इस फैसले से रियल एस्टेट कारोबारी और आम लोग चिंतित हैं।
रियल एस्टेट का कारोबार करने वाले बागेश्वर सिंह कहते हैं कि अब तो कारोबार में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। बजट में मुनाफे पर अब ज्यादा टैक्स देना होगा। इससे मुनाफे पर असर पड़ेगा। पूंजी लगाकर लंबे समय तक इंतजार करने के बाद जमीन का अच्छा भाव मिलता है। जोखिम रकम लगाने वाला उठाएगा लेकिन फायदा सरकार लेगी। यह ठीक नहीं है।
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इसी तरह से बड़हरामीर के राजेश पाठक ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यही रहा तो आने वाले दिनों में कारोबार में परेशानी बढ़ जाएगी। मुनाफे कम होगा तो निश्चित ही कारोबार प्रभावित होगा। सरकार का यह फैसला सही नहीं है।
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पहले के मुकाबले ज्यादा लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन टैक्स चुकाना होगा
अर्थशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर आशुतोष उपाध्याय ने बताया कि यूनियन बजट में इंडेक्सेशन बेनिफिट को समाप्त कर दिया गया है, जो पहले संपत्ति मालिकों को मुद्रास्फीति के आधार पर अपने खरीद मूल्य को समायोजित करने में सक्षम बनाता था, जिससे पूंजीगत लाभ कम हो जाता था और कम कर देना पड़ता था। बजट में इंडक्शन बेनिफिट्स खत्म होने से घर या रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रॉपर्टी बेचने पर और पहले के मुकाबले ज्यादा लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन टैक्स चुकाना होगा।
साढ़े तीन लाख से अधिक टैक्स पहले की तुलना में बढ़ गया
इसे कुछ यूं समझिए... मान लीजिए आपने 2005 में कोई प्रॉपर्टी 15 लाख रुपये में खरीदी थी। उसे 2024 में 60 लाख रुपये में बेच दी तो इंडेक्सेशन बेनिफिट होने पर प्रॉपर्टी की खरीद मूल्य को इन्फ्लेशन के साथ एडजस्ट किया जाता था। वर्तमान महंगाई दर पर प्रॉपर्टी की खरीद मूल्य 50 लाख रुपये मानी जाए तो 10 लाख रुपये का कैपिटल गेन होता है। अब इस पर 20 प्रतिशत की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगने पर दो लाख रुपये टैक्स देना होता था। बजट के बाद इसी प्रॉपर्टी पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के बिना लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन वर्तमान कीमत में से पुराने कीमत को घटाकर निकाला जाएगा और उस पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा, यानि 45 लाख रुपये का जो लाभ हो रहा है उस पर 5.50 लाख से अधिक टैक्स देना होगा। इस प्रकार अब उसी संपत्ति पर साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक टैक्स पहले की तुलना में बढ़ गया।
रियल एस्टेट कारोबार पर पड़ेगा प्रभाव
प्रो. आशुतोष के अनुसार, इंडेक्सेशन लाभों को हटाना रियल एस्टेट बाजार में निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय है। खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय तक संपत्ति रखते हैं। इंडेक्सेशन लाभ हटने से रियल एस्टेट की बिक्री पर कर योग्य पूंजीगत लाभ बढ़ जाएगा, जिससे विक्रेताओं पर कर का बोझ बढ़ जाएगा। इससे उनके शुद्ध लाभ पर बड़ा प्रभाव पड़ सकेगा। इससे रियल एस्टेट निवेश हतोत्साहित होगा। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो लंबे समय तक संपत्ति को रखते हैं, जहां मुद्रास्फीति अधिक महत्वपूर्ण है।