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Maharajganj News: खौफ में गुजरी रात... सुबह सुरक्षित ठिकाने की तलाश
Mon, 08 Jul 2024 05:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 08 Jul 2024 05:04 AM IST
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सोहगीबरवा के डियरा रेता में लकड़ी के ढेर पर ग्रामीणों ने रात गुजारी।
महराजगंज। गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से सोहगीबरवा गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया है। शनिवार की रात गांव के लोगों ने ऊंचे स्थान पर किसी तरह से गुजारी। सुबह होते ही सुरक्षित ठिकानों की ओर जाने लगे। कहीं लकड़ी पर लोग बैठे रहे तो कहीं ट्रैक्टर पानी में फंसा हुआ था।
जानकारी के अनुसार, निचलौल ब्लॉक का सोहगीबरवा गांव चारों तरफ से पानी से घिरा है। गांव के राजेश गुप्ता, राकेश गुप्ता, विवेक श्रीवास्तव, वर्मा यादव, विनय सिंह आदि ने बताया की टापू के नाम से जाने वाला निचलौल ब्लॉक का गांव सोहगीबरवां, शिकारपुर व भोथहा में आधी रात को ही गंडक नदी का पानी पहुंच गया।
गांव की ओर बाढ़ का पानी बढ़ते देख लोग इधर-उधर रात काटने के लिए मजबूर नजर आए। रात गुजरने के साथ ही धीरे-धीरे बाजार टोला, मुजा टोला, बाबू टोला, नौका टोला, कठबासी टोला, दौनहां व पिपरासी के लगभग 11 हजार लोग एक-दूसरे टोले व गांवों से कट गए हैं। अधिकांश घरों में राशन के अभाव में समस्या उत्पन्न हो गई है। इन लोगों ने आगे कहा की लगातार बारिश के कारण गंडक नदी के जलस्तर में रविवार को भी वृद्धि देखने को मिली। गांव में बाढ़ का पानी आने के कारण लोग अपने बच्चों व जानवरों को साथ लेकर सुरक्षित जगहों की तलाश में जुटे रहे।
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कई जगह टूटीं सड़कें
गांव के रहने वाले ब्रह्मा यादव, मोहन चौहान, पवन जायसवाल, श्रीकांत, सोनू, गौतम कुशवाहा आदि ने कहा की गांव में चारों तरफ पानी ही पानी दिख रहा है। इससे कई जगहों पर सड़कें टूट चुकी हैं। इसके चलते इन गांवों के लोगों को एक गांव से दूसरे गांव में पहुंचने में काफी परेशानी हो रही है। वहीं बाढ़ के कारण जिन लोगों के घर में राशन थे, वह खराब हो सकते हैं। इससे लोगों को दो जून के भोजन की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो रहा है। इतना ही बाढ़ का पानी आने के कारण ग्रामीणों के सामने पेयजल की भी समस्या उत्पन्न हो गई है। इससे ग्रामीणों में संक्रामक बीमारियों का डर भी बना हुआ है। सोहगीबरवां, शिकारपुर व भोथहा ग्राम पंचायतों सहित इनके सभी टोलों की लगभग 55 फीसदी आबादी मुसहर व अनुसूचित जाति के मजदूर वर्ग की है। बाढ़ के चलते ऐसे लोगों के सामने जहां भोजन की समस्या हो सकती है।
बाढ़ का सताने लगा डर
निचलौल। क्षेत्र के भारत-नेपाल बाॅर्डर से सटे और गंडक नदी के करीब मुसहर बस्ती गेड़हवा के दो टोले बैरा और बलुआ में नदी का पानी घुस गया है। पानी लोगों के घर तक पहुंचने से महज कुछ ही दूरी पर है। ऐसे में लोगों को बाढ़ का डर सताने लगा है। ग्रामीण अमरचंद, दरोगा, रामकेवल, राजेंद्र, छन्नू ने कहा कि लगातार बारिश के चलते आबादी से सटे गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दिनेश शर्मा ने कहा की नदी में आई बाढ़ का पानी ग्रामीणों के घरों से महज कुछ ही दूरी पर बह रही है। लोगों की समस्याओं को देखते हुए नाव सहित अन्य जरूरत की चीजों को व्यवस्थित कर लिया गया है। संवाद
सोहगीबरवा गांव के लोगों का दर्द जानने ट्रैक्टर से पहुंचे डीएम और एसपी
महराजगंज। सोहगीबरवा गांव में जलभराव होने पर वहां के लोगों का दर्द जानने के लिए जिलाधिकारी अनुनय कुमार झा और पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीणा ट्रैक्टर पर सवार होकर पहुंचे। उन्होंने ने यहां के लोगों को जरूरी सुविधा मुहैया कराने के निर्देश दिए। दोनों अधिकारी ट्रैक्टर पर बैठकर सोहगीबरवा पहुंचने के बाद हालात के बारे में जानकारी ली। सोहगीबरवा, बोथहा और शिकारपुर गांव में हालात का जायजा लिया। नारायणी नदी और बिहार क्षेत्र में पड़ने वाले रोहुआ नाला में जलस्तर में वृद्धि के कारण सोहगीबरवा क्षेत्र के गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।
जिलाधिकारी ने लेखपाल और सचिव सहित चिकित्सा टीम को 24 घंटे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में तैनात करने का निर्देश दिया। उन्होंने एसडीएम को बाढ़ प्रभावित गांवों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और उनके लिए खाने-पीने, चिकित्सा सहित आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया। एसडीआरएफ टीम को भी अलर्ट रहने के लिए कहा। सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय रहने का भी निर्देश दिया। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सभी आवश्यक सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए राहत पैकेट, चिकित्सा सेवा सहित आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए। उन्होंने उपजिलाधिकारी निचलौल को पर्याप्त संख्या में नावों, नाविकों और गोताखोरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बाढ़ से जुड़े सभी लोगों को सक्रिय व सतर्क रखने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि तटबंधों की सुरक्षा और बाढ़ की स्थिति में प्रभावित गांवों में सहायता उपलब्ध कराने के लिए सभी तैयारियों को पुनः जांच लें। किसी भी स्तर पर शिथिलता क्षम्य नहीं होगी।
नारायणी तटबंध के किनारे 80 गांव पूरी तरह सुरक्षित
जिलाधिकारी अनुनय झा, पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीणा ने निचलौल क्षेत्र में झुलनीपुर बैराज और सोहगीबरवा क्षेत्र का निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया। सबसे पहले झुलनीपुर रेगुलेटर का निरीक्षण किया और जलस्तर और नेपाल से आ रहे पानी की मात्रा और वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। अधिशासी अभियंता सिंचाई द्वितीय राजीव कपिल ने बताया कि नेपाल की ओर से चार लाख 41 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। निरीक्षण के दौरान नदी में 3.88 लाख क्यूसेक रिकार्ड किया गया था। उन्होंने बताया कि नारायणी में जलस्तर बढ़ने पर अतिरिक्त जल सोहगीबरवा क्षेत्र में आने लगता है, जिससे क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। पानी का स्तर नदी में फिलहाल कम हो रहा है और स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने बताया की नारायणी/गंडक तटबंध के किनारे 80 गांव भी पूरी तरह सुरक्षित हैं।
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जानकारी के अनुसार, निचलौल ब्लॉक का सोहगीबरवा गांव चारों तरफ से पानी से घिरा है। गांव के राजेश गुप्ता, राकेश गुप्ता, विवेक श्रीवास्तव, वर्मा यादव, विनय सिंह आदि ने बताया की टापू के नाम से जाने वाला निचलौल ब्लॉक का गांव सोहगीबरवां, शिकारपुर व भोथहा में आधी रात को ही गंडक नदी का पानी पहुंच गया।
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गांव की ओर बाढ़ का पानी बढ़ते देख लोग इधर-उधर रात काटने के लिए मजबूर नजर आए। रात गुजरने के साथ ही धीरे-धीरे बाजार टोला, मुजा टोला, बाबू टोला, नौका टोला, कठबासी टोला, दौनहां व पिपरासी के लगभग 11 हजार लोग एक-दूसरे टोले व गांवों से कट गए हैं। अधिकांश घरों में राशन के अभाव में समस्या उत्पन्न हो गई है। इन लोगों ने आगे कहा की लगातार बारिश के कारण गंडक नदी के जलस्तर में रविवार को भी वृद्धि देखने को मिली। गांव में बाढ़ का पानी आने के कारण लोग अपने बच्चों व जानवरों को साथ लेकर सुरक्षित जगहों की तलाश में जुटे रहे।
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कई जगह टूटीं सड़कें
गांव के रहने वाले ब्रह्मा यादव, मोहन चौहान, पवन जायसवाल, श्रीकांत, सोनू, गौतम कुशवाहा आदि ने कहा की गांव में चारों तरफ पानी ही पानी दिख रहा है। इससे कई जगहों पर सड़कें टूट चुकी हैं। इसके चलते इन गांवों के लोगों को एक गांव से दूसरे गांव में पहुंचने में काफी परेशानी हो रही है। वहीं बाढ़ के कारण जिन लोगों के घर में राशन थे, वह खराब हो सकते हैं। इससे लोगों को दो जून के भोजन की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो रहा है। इतना ही बाढ़ का पानी आने के कारण ग्रामीणों के सामने पेयजल की भी समस्या उत्पन्न हो गई है। इससे ग्रामीणों में संक्रामक बीमारियों का डर भी बना हुआ है। सोहगीबरवां, शिकारपुर व भोथहा ग्राम पंचायतों सहित इनके सभी टोलों की लगभग 55 फीसदी आबादी मुसहर व अनुसूचित जाति के मजदूर वर्ग की है। बाढ़ के चलते ऐसे लोगों के सामने जहां भोजन की समस्या हो सकती है।
बाढ़ का सताने लगा डर
निचलौल। क्षेत्र के भारत-नेपाल बाॅर्डर से सटे और गंडक नदी के करीब मुसहर बस्ती गेड़हवा के दो टोले बैरा और बलुआ में नदी का पानी घुस गया है। पानी लोगों के घर तक पहुंचने से महज कुछ ही दूरी पर है। ऐसे में लोगों को बाढ़ का डर सताने लगा है। ग्रामीण अमरचंद, दरोगा, रामकेवल, राजेंद्र, छन्नू ने कहा कि लगातार बारिश के चलते आबादी से सटे गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दिनेश शर्मा ने कहा की नदी में आई बाढ़ का पानी ग्रामीणों के घरों से महज कुछ ही दूरी पर बह रही है। लोगों की समस्याओं को देखते हुए नाव सहित अन्य जरूरत की चीजों को व्यवस्थित कर लिया गया है। संवाद
सोहगीबरवा गांव के लोगों का दर्द जानने ट्रैक्टर से पहुंचे डीएम और एसपी
महराजगंज। सोहगीबरवा गांव में जलभराव होने पर वहां के लोगों का दर्द जानने के लिए जिलाधिकारी अनुनय कुमार झा और पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीणा ट्रैक्टर पर सवार होकर पहुंचे। उन्होंने ने यहां के लोगों को जरूरी सुविधा मुहैया कराने के निर्देश दिए। दोनों अधिकारी ट्रैक्टर पर बैठकर सोहगीबरवा पहुंचने के बाद हालात के बारे में जानकारी ली। सोहगीबरवा, बोथहा और शिकारपुर गांव में हालात का जायजा लिया। नारायणी नदी और बिहार क्षेत्र में पड़ने वाले रोहुआ नाला में जलस्तर में वृद्धि के कारण सोहगीबरवा क्षेत्र के गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।
जिलाधिकारी ने लेखपाल और सचिव सहित चिकित्सा टीम को 24 घंटे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में तैनात करने का निर्देश दिया। उन्होंने एसडीएम को बाढ़ प्रभावित गांवों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और उनके लिए खाने-पीने, चिकित्सा सहित आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया। एसडीआरएफ टीम को भी अलर्ट रहने के लिए कहा। सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय रहने का भी निर्देश दिया। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सभी आवश्यक सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए राहत पैकेट, चिकित्सा सेवा सहित आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए। उन्होंने उपजिलाधिकारी निचलौल को पर्याप्त संख्या में नावों, नाविकों और गोताखोरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बाढ़ से जुड़े सभी लोगों को सक्रिय व सतर्क रखने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि तटबंधों की सुरक्षा और बाढ़ की स्थिति में प्रभावित गांवों में सहायता उपलब्ध कराने के लिए सभी तैयारियों को पुनः जांच लें। किसी भी स्तर पर शिथिलता क्षम्य नहीं होगी।
नारायणी तटबंध के किनारे 80 गांव पूरी तरह सुरक्षित
जिलाधिकारी अनुनय झा, पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीणा ने निचलौल क्षेत्र में झुलनीपुर बैराज और सोहगीबरवा क्षेत्र का निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया। सबसे पहले झुलनीपुर रेगुलेटर का निरीक्षण किया और जलस्तर और नेपाल से आ रहे पानी की मात्रा और वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। अधिशासी अभियंता सिंचाई द्वितीय राजीव कपिल ने बताया कि नेपाल की ओर से चार लाख 41 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। निरीक्षण के दौरान नदी में 3.88 लाख क्यूसेक रिकार्ड किया गया था। उन्होंने बताया कि नारायणी में जलस्तर बढ़ने पर अतिरिक्त जल सोहगीबरवा क्षेत्र में आने लगता है, जिससे क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। पानी का स्तर नदी में फिलहाल कम हो रहा है और स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने बताया की नारायणी/गंडक तटबंध के किनारे 80 गांव भी पूरी तरह सुरक्षित हैं।