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Maharajganj News: बैठने का तरीका बढ़ा रहा कमर दर्द
Fri, 21 Feb 2025 08:03 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 21 Feb 2025 08:03 PM IST
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महराजगंज। बदलता मौसम और बैठने का तरीका कमर का दर्द बढ़ा रहा है। इससे सबसे ज्यादा महिलाएं प्रभावित हो रही हैं। शुक्रवार को जिला अस्पताल में कमर दर्द से पीड़ित 23 मरीज पहुंचे।
जिला अस्पताल की ओपीडी में 768 मरीजों का उपचार किया गया, जिसमें कमर दर्द के मरीजों की अधिकता मिली। डाॅ. विकास ने बताया कि कमर दर्द कि समस्या कम उम्र के लोगों में भी सामने आ रही है। इसमें मुख्य कारण अधिक वजन, गलत तरीके से बैठने, उठने जैसे क्रियाकलाप व खानपान है।
बचाव के लिए जरूरी है कि अपने बैठने के तरीके, रहन सहन के साथ ही खानपान पर विशेष ध्यान दें। महिलाओं को इसे लेकर ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है, क्योंकि वह अधिक प्रभावित हो रही हैं।
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सीएमएस डाॅ. एके द्विवेदी ने बताया कि निचला हिस्सा हमारे शरीर का ज्यादातर वजन उठाता है। जब हम झुकते, मुड़ते या भारी वस्तु उठाते हैं तब भी सारा भार रीढ़ के निचले हिस्से पर पड़ता है। जब हम एक स्थान पर ज्यादा समय बैठते हैं तब भी भार उसी स्थान पर पड़ता है। इन सब कारणों से रीढ़ को सहारा देने वाली मांसपेशियां, टिश्यू तथा लिंगामेंटस पर बार-बार दबाव पड़ता है।
इस तरह की इंजरी को स्ट्रेस इंजरी कहते हैं, जिससे लो बैक पेन या कमर दर्द वाली स्थिति उत्पन्न होती है। ऑफिस में काम करने वालों को भी विशेष सतर्क रहना चाहिए। निदान के लिए बैठने का तरीका बदलने के साथ व्यायाम का सहारा लिया जा सकता है।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में 768 मरीजों का उपचार किया गया, जिसमें कमर दर्द के मरीजों की अधिकता मिली। डाॅ. विकास ने बताया कि कमर दर्द कि समस्या कम उम्र के लोगों में भी सामने आ रही है। इसमें मुख्य कारण अधिक वजन, गलत तरीके से बैठने, उठने जैसे क्रियाकलाप व खानपान है।
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बचाव के लिए जरूरी है कि अपने बैठने के तरीके, रहन सहन के साथ ही खानपान पर विशेष ध्यान दें। महिलाओं को इसे लेकर ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है, क्योंकि वह अधिक प्रभावित हो रही हैं।
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सीएमएस डाॅ. एके द्विवेदी ने बताया कि निचला हिस्सा हमारे शरीर का ज्यादातर वजन उठाता है। जब हम झुकते, मुड़ते या भारी वस्तु उठाते हैं तब भी सारा भार रीढ़ के निचले हिस्से पर पड़ता है। जब हम एक स्थान पर ज्यादा समय बैठते हैं तब भी भार उसी स्थान पर पड़ता है। इन सब कारणों से रीढ़ को सहारा देने वाली मांसपेशियां, टिश्यू तथा लिंगामेंटस पर बार-बार दबाव पड़ता है।
इस तरह की इंजरी को स्ट्रेस इंजरी कहते हैं, जिससे लो बैक पेन या कमर दर्द वाली स्थिति उत्पन्न होती है। ऑफिस में काम करने वालों को भी विशेष सतर्क रहना चाहिए। निदान के लिए बैठने का तरीका बदलने के साथ व्यायाम का सहारा लिया जा सकता है।