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Maharajganj News: राष्ट्रीय सर्वेक्षण के लिए जिले के अमृत सरोवरों का चयन
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महराजगंज। जनपद को अमृत सरोवर निर्माण में बेहतर पाया गया है। यह राष्ट्रीय ग्राम्य विकास विभाग मान चुका है। इसी लिए अमृत सरोवरों की उपयोगिता, लाभ इत्यादि की जानकारी के लिए प्रभाव आकलन सर्वे के लिए जिले को चयनित किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर इन सरोवरों का सामाजिक,आर्थिक तथा पर्यावरणीय प्रभाव जानने के लिए आनलाइन इनसाइट डेवलपमेंट सर्वे शुरू किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर इसके लिए आठ जनपदों का चयन हुआ है जिसमें चार राजस्थान व चार अपने प्रदेश के हैं।
यूपी में महराजगंज जिले के अलावा गोरखपुर, मैनपुरी व गौतमबुद्ध नगर को भी चुना गया है। सरोवर के कारण क्या और कितना बदलाव हुआ है यह पता लगाया जाएगा साथ ही यह किस प्रकार गांव के लोगों को लाभ पहुंचा रहे हैं सर्वे में इसे भी देखा जाएगा। पहले चरण में जिले के 114 अमृत सरोवरों का सर्वेक्षण ब्लाॅकों के एपीओ की मदद से प्रारंभ हो गया है। जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा से अमृत सरोवरों का निर्माण कराया जा चुका है। यहां के बने सरोवरों की चहुंओर सराहना हो रही है। पिछले दिनों उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या ने जिले के अहिरौली में बने सरोवर को अपने पोस्ट के साथ टैग करते हुए तारीफ की थी। अब इस जनपद के सरोवरों का लाभ पता लगाया जाएगा और क्या और विशेष किया जा सकता है कि यह सरोवर और लाभकारी बन सके सर्वे के जरिये यह पता लगाया जा रहा है। जिले के सभी 12 ब्लाॅकों के कुल 114 सरोवरों के सर्वे का कार्य पूर्ण करने के बाद सरोवर किस तरह और उपयोगी हो सकते हैं इसकी कार्ययोजना राष्ट्रीय स्तर से प्रारंभ हो सकेगी। अगर ऐसा होता है तो जनपद का नाम राष्ट्रीय फलक पर अंकित हो जाएगा एवं यहां के पर्यटन और विकास को बढ़ावा मिल सकेगा। संवाद
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सर्वे प्रारूप में दर्ज हो रहा यह विवरण
- प्रभाव आकलन सर्वे के जीआईजेड कंसल्टिंग ग्रुप की ओर से आनलाइन सर्वे प्रारूप तय किया गया है। इसी के अनुसार सर्वे कर जानकारी भरी जा रही है। सरोवर नया बना या पुराने सरोवर को आकर दिया गया, निर्माण कब शुरू व समाप्त हुआ। कितना खर्च आया, ल़बाई-चौडाई- गहराई व जल भंडारण क्षमता, कौन से उद्देश्य को सरोवर पूरा कर रहा है जिसमें पेयजल, भूगर्भ, बाढ बचाव, मत्स्य पालन, सिचाई इत्यादि विकल्प सुझाए गये हैं। पर्यावरण व जैव विविधता में कितना योगदान है, उपयोग कर्ता समूह कौन है सभी ग्रामीण या मछली पालक, जलीय वनस्पति उगाने वाले, सरोवर के भीटों पर पौधरोपण कब हुआ, कौन कौन से पौधे लगे, फलदार, छायादार, आकर्षक इत्यादि श्रेणी तय करनी होगी। सरोवर के अक्षांश व देशांतर की स्थिति और सबसे आखिरी में सरोवर को उपयोगिता व सार्थकता के आधार पर अंक भी प्रदान करना है।
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राष्ट्रीय स्तर पर जनपद के अमृत सरोवरों को प्रभाव आकलन सर्वे के लिए चयनित किया गया है। इस सर्वेक्षण के लिए चयनित होना अपने आप में गौरव का घोतक है। 114 सरोवरों का सर्वे किया जा रहा है। आगे जैसा भी निर्देश शासन की ओर से मिलेगा उसी के अनुरूप अग्रिम कार्य होंगे।
-अनुराज जैन, मुख्य विकास अधिकारी, महराजगंज
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यूपी में महराजगंज जिले के अलावा गोरखपुर, मैनपुरी व गौतमबुद्ध नगर को भी चुना गया है। सरोवर के कारण क्या और कितना बदलाव हुआ है यह पता लगाया जाएगा साथ ही यह किस प्रकार गांव के लोगों को लाभ पहुंचा रहे हैं सर्वे में इसे भी देखा जाएगा। पहले चरण में जिले के 114 अमृत सरोवरों का सर्वेक्षण ब्लाॅकों के एपीओ की मदद से प्रारंभ हो गया है। जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा से अमृत सरोवरों का निर्माण कराया जा चुका है। यहां के बने सरोवरों की चहुंओर सराहना हो रही है। पिछले दिनों उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या ने जिले के अहिरौली में बने सरोवर को अपने पोस्ट के साथ टैग करते हुए तारीफ की थी। अब इस जनपद के सरोवरों का लाभ पता लगाया जाएगा और क्या और विशेष किया जा सकता है कि यह सरोवर और लाभकारी बन सके सर्वे के जरिये यह पता लगाया जा रहा है। जिले के सभी 12 ब्लाॅकों के कुल 114 सरोवरों के सर्वे का कार्य पूर्ण करने के बाद सरोवर किस तरह और उपयोगी हो सकते हैं इसकी कार्ययोजना राष्ट्रीय स्तर से प्रारंभ हो सकेगी। अगर ऐसा होता है तो जनपद का नाम राष्ट्रीय फलक पर अंकित हो जाएगा एवं यहां के पर्यटन और विकास को बढ़ावा मिल सकेगा। संवाद
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सर्वे प्रारूप में दर्ज हो रहा यह विवरण
- प्रभाव आकलन सर्वे के जीआईजेड कंसल्टिंग ग्रुप की ओर से आनलाइन सर्वे प्रारूप तय किया गया है। इसी के अनुसार सर्वे कर जानकारी भरी जा रही है। सरोवर नया बना या पुराने सरोवर को आकर दिया गया, निर्माण कब शुरू व समाप्त हुआ। कितना खर्च आया, ल़बाई-चौडाई- गहराई व जल भंडारण क्षमता, कौन से उद्देश्य को सरोवर पूरा कर रहा है जिसमें पेयजल, भूगर्भ, बाढ बचाव, मत्स्य पालन, सिचाई इत्यादि विकल्प सुझाए गये हैं। पर्यावरण व जैव विविधता में कितना योगदान है, उपयोग कर्ता समूह कौन है सभी ग्रामीण या मछली पालक, जलीय वनस्पति उगाने वाले, सरोवर के भीटों पर पौधरोपण कब हुआ, कौन कौन से पौधे लगे, फलदार, छायादार, आकर्षक इत्यादि श्रेणी तय करनी होगी। सरोवर के अक्षांश व देशांतर की स्थिति और सबसे आखिरी में सरोवर को उपयोगिता व सार्थकता के आधार पर अंक भी प्रदान करना है।
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राष्ट्रीय स्तर पर जनपद के अमृत सरोवरों को प्रभाव आकलन सर्वे के लिए चयनित किया गया है। इस सर्वेक्षण के लिए चयनित होना अपने आप में गौरव का घोतक है। 114 सरोवरों का सर्वे किया जा रहा है। आगे जैसा भी निर्देश शासन की ओर से मिलेगा उसी के अनुरूप अग्रिम कार्य होंगे।
-अनुराज जैन, मुख्य विकास अधिकारी, महराजगंज