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Maharajganj News: अपराधियों का रिकाॅर्ड देख सकेंगी सुरक्षा एजेंसियां व पुलिस
Sun, 22 Jun 2025 01:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 22 Jun 2025 01:18 AM IST
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महराजगंज। अपराधी प्रवृत्ति के लोगों का विवरण तलाशने में पुलिस या एजेंसियों को अब परेशानी नहीं होगी। पुलिस प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियां या गृह विभाग के अधिकारी सिर्फ एक क्लिक से अपराधियों की कुंडली देख सकेंगे।
इससे उनके अपराध का तरीका ही नहीं यह भी पता चल जाएगा कि वह किन-किन अपराधों के लिए कौन-कौन जेल में कितने दिन निरुद्ध रह चुका है।
यह जानकारी अपराध व अपराधियों पर नियंत्रण स्थापित करने में मददगार साबित होगी। महराजगंज जिला कारागार प्रशासन ने उच्चाधिकारियों के निर्देश के क्रम में 668 बंदियों की ऑनलाइन फीडिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है।
इसके लिए गृह विभाग व कारागार प्रशासन की तरफ से साफ्टवेयर उपलब्ध कराया गया है, जिसके प्रारूप पहले से तय हैं। सिर्फ इस प्रारूप पर फीडिंग कार्य स्थानीय स्तर से हो रहा है। कारागार प्रशासन के मुताबिक वर्ष 1980 में बंदी का नाम, पिता का नाम, निवास, पहचान चिह्न रजिस्टर पर लिखे जाते थे और अपराधियों का केवल अंगूठे का निशान लगता था। वर्ष 1990 में ब्लैक एंड व्हाइट फोटो लगना शुरू हुआ। पिछले कई वर्ष से अपराधियों की रंगीन फोटो रजिस्टर पर चस्पा हो रहा था। अधिक रिकार्ड एकत्र होने की वजह से पिछला रिकार्ड हटाने की जरूरत पड़ती थी।
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पुराने रिकार्ड की आवश्यकता पड़ती तो जेल प्रशासन को खोजबीन में महीनों लगते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि सभी अपराधियों का डाटा ऑनलाइन साफ्टवेयर में अपलोड कराया जा रहा है।
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इससे उनके अपराध का तरीका ही नहीं यह भी पता चल जाएगा कि वह किन-किन अपराधों के लिए कौन-कौन जेल में कितने दिन निरुद्ध रह चुका है।
यह जानकारी अपराध व अपराधियों पर नियंत्रण स्थापित करने में मददगार साबित होगी। महराजगंज जिला कारागार प्रशासन ने उच्चाधिकारियों के निर्देश के क्रम में 668 बंदियों की ऑनलाइन फीडिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है।
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इसके लिए गृह विभाग व कारागार प्रशासन की तरफ से साफ्टवेयर उपलब्ध कराया गया है, जिसके प्रारूप पहले से तय हैं। सिर्फ इस प्रारूप पर फीडिंग कार्य स्थानीय स्तर से हो रहा है। कारागार प्रशासन के मुताबिक वर्ष 1980 में बंदी का नाम, पिता का नाम, निवास, पहचान चिह्न रजिस्टर पर लिखे जाते थे और अपराधियों का केवल अंगूठे का निशान लगता था। वर्ष 1990 में ब्लैक एंड व्हाइट फोटो लगना शुरू हुआ। पिछले कई वर्ष से अपराधियों की रंगीन फोटो रजिस्टर पर चस्पा हो रहा था। अधिक रिकार्ड एकत्र होने की वजह से पिछला रिकार्ड हटाने की जरूरत पड़ती थी।
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पुराने रिकार्ड की आवश्यकता पड़ती तो जेल प्रशासन को खोजबीन में महीनों लगते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि सभी अपराधियों का डाटा ऑनलाइन साफ्टवेयर में अपलोड कराया जा रहा है।