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मानव कल्याण के लिए रुद्र महायज्ञ जरूरी : पं. रवींद्र पांडेय
Sun, 03 Mar 2024 08:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 03 Mar 2024 08:36 PM IST
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बागापार। मानव कल्याण के लिए रुद्र महायज्ञ का आयोजन जरूरी है। यज्ञ से मानव जीवन में लाभ मिलता है। यज्ञ हर तबके को आपस में जोड़ने का काम करता है। गांव, समाज, आपसी सद्भाव, आत्मा परमात्मा, दोस्त मित्र, हित कुटुंब सभी को एक सूत्र में पिरोने का कर्म ही यज्ञ होता है।
ये बातें कटहरा स्थित प्राचीन शिव मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीश्री रुद्र महा मृत्युंजय महायज्ञ के दूसरे दिन प्रवचन में पहुंचे श्रद्धालुओं को ज्ञान का रसपान कराते हुए अयोध्या से आए यज्ञाचार्य पं. रवींद्र दास पांडेय ने कही। उन्होंने कहा कि यज्ञ में पड़ने वाले आहूति से वातावरण शुद्ध होता है। यज्ञ से सामाजिक समरसता कायम होती है। द्वापर युग में सामाजिक समरसता बनाने के उद्देश्य से भगवान श्रीराम ने महायज्ञ किया था। उन्होंने कहा कि यज्ञ करने से वायुमंडल एवं पर्यावरण में शुद्धता आती है।
यज्ञ को वेदों में मनुष्य के समस्त अभावों एवं बाधाओं को दूर करने वाला साधन माना गया है। यजुर्वेद में कहा गया है कि जो यज्ञ को त्यागता है, उसे परमात्मा त्याग देते हैं। यज्ञ के द्वारा ही साधारण मनुष्य देव योनि प्राप्त करते हैं और स्वर्ग के अधिकारी बनते हैं। यज्ञ में जलती अग्नि का मुख ईश्वर का मुख होता है। यज्ञ की आहुति भगवान का भोजन होता है, यज्ञ में जो कुछ भी आहुति दिया जाता है वह सीधे भगवान का मुख में चला जाता है इस दौरान संरक्षक मिथिलेश सिंह, अध्यक्ष सोमनाथ सिंह, कमलेश सिंह, जितेंद्र यादव, महेंद्र साहनी, प्रमोद चौहान, ज्ञानप्रकाश, संगम, बृजेश सिंह आदि उपस्थित रहे।
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ये बातें कटहरा स्थित प्राचीन शिव मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीश्री रुद्र महा मृत्युंजय महायज्ञ के दूसरे दिन प्रवचन में पहुंचे श्रद्धालुओं को ज्ञान का रसपान कराते हुए अयोध्या से आए यज्ञाचार्य पं. रवींद्र दास पांडेय ने कही। उन्होंने कहा कि यज्ञ में पड़ने वाले आहूति से वातावरण शुद्ध होता है। यज्ञ से सामाजिक समरसता कायम होती है। द्वापर युग में सामाजिक समरसता बनाने के उद्देश्य से भगवान श्रीराम ने महायज्ञ किया था। उन्होंने कहा कि यज्ञ करने से वायुमंडल एवं पर्यावरण में शुद्धता आती है।
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यज्ञ को वेदों में मनुष्य के समस्त अभावों एवं बाधाओं को दूर करने वाला साधन माना गया है। यजुर्वेद में कहा गया है कि जो यज्ञ को त्यागता है, उसे परमात्मा त्याग देते हैं। यज्ञ के द्वारा ही साधारण मनुष्य देव योनि प्राप्त करते हैं और स्वर्ग के अधिकारी बनते हैं। यज्ञ में जलती अग्नि का मुख ईश्वर का मुख होता है। यज्ञ की आहुति भगवान का भोजन होता है, यज्ञ में जो कुछ भी आहुति दिया जाता है वह सीधे भगवान का मुख में चला जाता है इस दौरान संरक्षक मिथिलेश सिंह, अध्यक्ष सोमनाथ सिंह, कमलेश सिंह, जितेंद्र यादव, महेंद्र साहनी, प्रमोद चौहान, ज्ञानप्रकाश, संगम, बृजेश सिंह आदि उपस्थित रहे।
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