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Maharajganj News: पहले से अधिक आक्रामक हुए चूहे, बदल रहा व्यवहार

Mon, 18 Sep 2023 01:41 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 18 Sep 2023 01:41 AM IST
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Rats have become more aggressive than before, their behavior is changing
रैबीज वैक्सीन लगवाने हर दिन दो से तीन केस पहुंच रहे केएमसी डिजिटल अस्पताल
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संवाद न्यूज एजेंसी

महराजगंज। बीते दो तीन वर्षों से चूहों और छछूंदरों का स्वभाव बदला है। कोरोना और मौसम की मार से इनका प्राकृतिक आवास प्रभावित हुआ है। खानपान पर भी असर पड़ा है। भूख और भीषण गर्मी से ये आक्रामक हुए हैं। भूख लगने पर ये इंसानों को काट रहे हैं।

केएमसी डिजिटल अस्पताल के सीईओ डॉ. एसएम रफीक के मुताबिक, तीन साल पहले कोरोना महामारी में लॉकडाउन लगा था। लंबे समय तक मंडियां और बड़े प्रतिष्ठान बंद रहे थे। इस दौरान भोजन की तलाश में चूहे और छछूंदर घरों में घुसने लगे थे। बीते वर्षों में भीषण गर्मी से सूखे का भी प्रकोप हावी रहा। फसलों को बचाने के लिए किसान कीटनाशकों का प्रयोग काफी मात्रा में करने लगे। खुद को बचाने के लिए घरों की ओर भागे इन जीवों के व्यवहार में अब बदलाव दिखने लगा है।
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रात में ज्यादा काटते हैं चूहे, हलचल से भागते

डॉ. विजय शर्मा के मुताबिक, दिन में चहल-पहल के कारण घरों या आसपास कहीं छिपे रहते हैं। रात के सन्नाटे में ही ये सक्रिय होते हैं। व्यक्ति या वस्तु जिससे भी इन्हें खतरा लगता है, उसे काट लेते हैं। हलचल होने पर भाग जाते हैं। अगर हलचल न हो तो नोचते रहने की भी आशंका है। हालांकि, अगर यह काट लें तो एहतियातन रैबीज लगवा लेना उचित है, ताकि संभावित जूनोटिक बीमारियों से बचाव हो सके।
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सुरक्षित रहने के लिए सही समय पर इलाज जरूरी
डॉ. एसएम रफीक का कहना है कि रैबीज के अलावा लैप्टोस्पायरोसिस, स्क्रब टाइफस, मायो-एंडो कार्डिटिस, सिस्टमैटिक वैस्कुलिटिस, पाली ऑर्थराइटिस, नोडोसा, फोकल, एब्सकेसेस, अमिनियोटिस आदि रोग होने की आशंका रहती है। रैबीज और डेंगू की तरह ही घातक होती हैं। सही समय पर इलाज नहीं मिलने से बीमारी के जानलेवा होने की आशंका बढ़ जाती है।


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प्रत्येक दिन आ रहे दो चार मरीज
केएमसी डिजिटल अस्पताल में हर दिन दो से चार केस पहुंच रहे हैं। पहले इक्के दुक्के केस पहुंचते थे। अब इनकी तादाद बढ़ती जा रही है। डॉ. विजय शर्मा के अनुसार, हर दिन 50 लोगों को एआरवी लग रही है। इसमें से औसतन दो से चार केस हर दिन चूहे और छछूंदर काटने के आ रहे हैं। जिन्हें सोते समय, घर में काम करने के दौरान, खेत में या कहीं खुले मैदान में बैठने के दौरान चूहे या छछूंदर ने काटा है। इनके काटने के मामले कहीं अधिक होंगे पर जानकारी के अभाव में रैबीज लगवाने नहीं पहुंचते हैं। कुत्ते, बिल्ली, बंदर, सियार या अन्य किसी जानवर के काटे जाने पर रैबीज होने की जानकारी लगभग सभी को है। चूहे या छछूंदर के काटने से भी रैबीज हो सकता है, यह कम ही लोग जानते हैं। लिहाजा, काटे जाने के बाद लोग अक्सर इसे नजरंदाज कर देते हैं।
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बचाव के उपाय

घर-दुकान में इनका एंट्री पॉइंट बंद कर दें।
मलबे को साफ करें और झाड़ियों को काटें।
कचरे को ढंके हुए डस्टबिन में ही डालें।

पालतू पशु-पक्षी का खाना बाहर ही रखें।

घर के खाद्य पदार्थ खुला न रखें ढंक दें।
चूहेदानी से पकड़कर दूर कहीं बाहर छोड़ें।
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