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Maharajganj News: पूर्वांचल के गांधी थे अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष करने वाले प्रोफेसर शिब्बन लाल सक्सेना

Fri, 20 Oct 2023 01:00 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 20 Oct 2023 01:00 AM IST
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Professor Shibban Lal Saxena, who fought against atrocities, was the Gandhi of Purvanchal.
वर्ष 1946 में संविधान निर्मात्री सभा के बने थे सदस्य, प्रोफेसर सक्सेना की पुण्य तिथि आज
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। पूर्वांचल के गांधी के नाम से विख्यात संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य रहे प्रोफेसर शिब्बन लाल सक्सेना वर्ष 1946 में संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य बने थे। बरेली में जन्में प्रो. शिब्बन का कार्यक्षेत्र महराजगंज रहा। उन्होंने जवाहर लाल नेहरू पीजी काॅलेज की स्थापना की। शुक्रवार को उनकी पुण्यतिथि पर जवाहर लाल नेहरू पीजी कालेज सभागार में कार्यक्रम का आयोजन होगा। कालेज प्रशासन की ओर से पूरी तैयारी की गई है।
सीटिजन फोरम के मीडिया प्रभारी डॉ. शांतिशरण मिश्र ने बताया कि प्रोफेसर सक्सेना का जन्म 13 जुलाई 1906 को बरेली में कायस्थ परिवार में हुआ था। मात्र सात वर्ष की आयु में ही उनकी मां का निधन हो गया और कुछ वर्ष बाद इनके पिता का निधन हो गया। अल्प आयु में ही प्रो. सक्सेना पर परिवार की समस्त जिम्मेदारी आ गईं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 1924 में स्नातक की परीक्षा प्रथम श्रेणी से (स्वर्ण पदक) प्राप्त कर पूरी की। दर्शन शास्त्र में इन्होंने प्रथम श्रेणी में परास्नातक किया।
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आगरा विश्वविद्यालय से इन्होंने गणित विषय में दोबारा परास्नातक किया। दो विषयों से एमए करने के बाद 1928 में गोरखपुर के प्रतिष्ठित सेंट एंड्रयूज कॉलेज में गणित और दर्शनशास्त्र के व्याख्याता पद पर नियुक्त हुए। 1931 में काॅलेज से त्यागपत्र देने के बाद महराजगंज आ गए। 27 अगस्त 1942 को विशुनपुर गबडुआ से प्रो. सक्सेना का गिरफ्तार कर जेल भेज गया था। स्वाधीनता आंदोलन में प्रोफेसर सक्सेना का अहम योगदान था। उन्हीं की वजह से महराजगंज की पहचान बनी।
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प्रोफेसर सक्सेना ने जलाई थी शिक्षा की ज्योति
--प्रो. सक्सेना ने 18 फरवरी 1940 को पं. जवाहर लाल नेहरू द्वारा गणेश शंकर विद्यार्थी स्मारक इंटर कॉलेज का शिलान्यास कराया। उच्च शिक्षा की दृष्टि से 13 मार्च 1965 को तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज का शिलान्यास कराया था। जुलाई 1966 में कॉलेज में शिक्षण कार्य प्रारंभ हो गया। फरेंदा में लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज का शिलान्यास 24 मार्च 1972 को स्वयं सक्सेना ने किया।

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पीजी कॉलेज खेल मैदान में बनी है समाधि
जवाहर लाल नेहरू पीजी के प्रबंधक डॉ. बलराम भट्ट ने बताया कि प्रोफेसर शिब्बन लाल सक्सेना अप्रैल 1985 में अंतिम बार काफी बीमार हो गए और मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में भर्ती कराए गए 16 अप्रैल 1985 को स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्होंने कहा था, मैं अपने कर्मस्थली महराजगंज में मरना चाहता हूं। 20 अक्तूबर 1985 को उनका दुखद निधन हो गया, उनका अंतिम संस्कार जवाहरलाल नेहरू पीजी कॉलेज खेल मैदान में हुआ था। यहीं उनकी समाधि बनी हुई है।
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