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Maharajganj News: कोल्हुई में आयोजित कवि सम्मेलन में शायरों ने बांधा समा
Tue, 12 Nov 2024 01:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 12 Nov 2024 01:18 AM IST
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फरेंदा। उर्दू डे के मौके पर कोल्हुई में मुशायरा आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कई जनपदों के शायरों ने अपनी रचनाओं से उर्दू-हिंदी भाषा की सुंदरता और इसके साहित्यिक महत्व को बताया।
रियाज कासिद ने न चाहते हुए रिश्ता मैं तोड़ आया हूं, बड़ी हसीन थी बस्ती जो छोड़ आया हूं। मुसीबत के दिनों में रुत गुलाबी भूल जाती है, ये दुनिया ऐश की बातें किताबी भूल जाती है..., यह सुना कर खूब वाह वाही लूटी। पंकज सिद्धार्थ ने मेरी उर्दू जुबां प्यारी-प्यारी जुबां ये है, सारी जुबानों से न्यारी जुबां। जो है इस पर फिदा फूल सा है खिला, शायरों के लिए है दुलारी जुबां..., कविता सुना कर सभी को खूब रिझाया। नूर कासमी ने अंधेरे में जमाना है, उजाले की जरूरत है, बता दो बिजलियों को, राह मेरे आशियाने की..., कविता सुना कर दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया। मोनिस फैजी ने सामाजिक कविता सरेराह हादसे हैं, सरे बज्म है उदासी, सभी कह रहे हैं फिर भी कोई गीत गुनगुनाऊं। अरमान सिद्धार्थनगरी ने तू जो अहदे वफा से मुकर जाएगा, जाने जां तेरा बीमार मर जाएगा। ये जुल्म है, सितम है अदालत की मौत है, पहरे हमारे ख्वाब पे ख्वाइफ गुमां हमारा..., से वाहवाही लूटी। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. नियाज आजमी एवं संचालन नूर कासमी ने किया।
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रियाज कासिद ने न चाहते हुए रिश्ता मैं तोड़ आया हूं, बड़ी हसीन थी बस्ती जो छोड़ आया हूं। मुसीबत के दिनों में रुत गुलाबी भूल जाती है, ये दुनिया ऐश की बातें किताबी भूल जाती है..., यह सुना कर खूब वाह वाही लूटी। पंकज सिद्धार्थ ने मेरी उर्दू जुबां प्यारी-प्यारी जुबां ये है, सारी जुबानों से न्यारी जुबां। जो है इस पर फिदा फूल सा है खिला, शायरों के लिए है दुलारी जुबां..., कविता सुना कर सभी को खूब रिझाया। नूर कासमी ने अंधेरे में जमाना है, उजाले की जरूरत है, बता दो बिजलियों को, राह मेरे आशियाने की..., कविता सुना कर दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया। मोनिस फैजी ने सामाजिक कविता सरेराह हादसे हैं, सरे बज्म है उदासी, सभी कह रहे हैं फिर भी कोई गीत गुनगुनाऊं। अरमान सिद्धार्थनगरी ने तू जो अहदे वफा से मुकर जाएगा, जाने जां तेरा बीमार मर जाएगा। ये जुल्म है, सितम है अदालत की मौत है, पहरे हमारे ख्वाब पे ख्वाइफ गुमां हमारा..., से वाहवाही लूटी। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. नियाज आजमी एवं संचालन नूर कासमी ने किया।
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