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Maharajganj News: बकरी का दूध खुले बाजार में बेचेगा एनआरएलएम
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प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर बकरी का दूध खुले बाजार में बेचने की योजना
सदर एनआरएलएम के 14 समूह कर रहे बकरी पालन
महराजगंज। ग्रामीण आजीविका समूह की महिलाएं अब बकरी के दूध की बिक्री के जरिए अपनी आय बढ़ाएंगी। सदर एनआरएलएम की तरफ से बकरी दूध प्रिजर्व करने के लिए यूनिट लगाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर बकरी का दूध खुले बाजार में बेचने की योजना है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बकरी पालन सबसे अधिक आय कमाने वाला माध्यम बनकर उभरा है। जनपद में वन क्षेत्र की अधिकता के कारण बकरी पालन करना सुविधाजनक है। कई आजीविका समूह बकरी पालन के जरिए अच्छी आय कमा रही हैं। बकरी के दूध के औषधीय गुणों के कारण इसकी मांग शहरी क्षेत्रों में भी अधिक होती है। ऐसे उपभोक्ताओं की जरूरत को पूरा करने के लिए बकरी के दूध को पैकेट में पैक करके बेचने की योजना पर एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ) काम कर रहा है।
सदर क्षेत्र में ही 25 लीटर दूध का हो रहा उत्पादन
सदर ब्लॉक एनआरएलएम बीएमएम शेषनाथ मौर्य व मनोज मौर्य ने बताया कि सदर ब्लॉक में कुल 14 समूह ऐसे हैं जो बकरी पाल के जरिए आय कमा रहे हैं। बागा पार राधाकृष्ण आजीविका समूह की अध्यक्ष ज्ञांती के समूह में लगभग 160 के करीब बकरियां हैं। इसी गांव के अन्य समूह की अध्यक्ष फूल मती, गुड़िया, सरस्वती के निर्देशन में भी महिला सदस्य बड़ी संख्या में बकरियां पाले हुए हैं। सदर के सभी समूह को मिलाकर 25 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन किया जाता है। इसे देखते हुए सदर एनआरएल एम ने प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर पैकेट बंद बकरी का दूध उतारने की योजना तैयार की है। बकरी का दूध औषधीय गुणों के कारण काफी महंगा बिकता है। ऐसे में बकरी पालन के साथ मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट एक लघु उद्योग की तरह आधी आबादी के लिए आय सृजन में मददगार बनेगा।
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बकरी के दूध में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व
जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. एके द्विवेदी ने बताया कि बकरी का दूध बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए औषधि है। इसमें ऐसे पोषक तत्व इसमें प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जो अन्य दूध में न के बराबर होते हैं। इससे रक्त प्लेटलेट्स बढ़ते हैं। पाचन, खून की कमी, तनाव, गठिया, सूजन आदि में सुधार होता है।कोलेस्ट्रॉल व ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। कैल्शियम, फास्फोरस से हड्डियां मजबूती होती हैं। मस्तिष्क में हैप्पी हार्मोन (डोपामिन) रिलीज होता है, इससे अवसाद, घबराहट में राहत मिलती है।
वर्जन
ग्रामीण समूह की महिलाएं बड़ी संख्या में बकरी पालन कर रहीं हैं। अब तक सिर्फ मांस के लिए ही इनकी बिक्री की जाती थी लेकिन अब बकरी के दूध का 250 एमएल का पैक बाजार में उतारा जाएगा। दूध की कमाई से समूह को अतिरिक्त आमदनी होगी। योजना के बारे में उपायुक्त व उद्योग विभाग से भी मदद ली जाएगी।
-नागेंद्र देव पांडेय, एडीओ आईएसबी सदर।
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बकरी पालन जनपद में ग्रामीण आजीविका का सशक्त माध्यम है। अगर सदर की टीम गोटमिल्क प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करना चाहती है। विभाग के स्तर से सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
-मो. जाकिर, उपायुक्त, एनआरएलएम
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सदर एनआरएलएम के 14 समूह कर रहे बकरी पालन
महराजगंज। ग्रामीण आजीविका समूह की महिलाएं अब बकरी के दूध की बिक्री के जरिए अपनी आय बढ़ाएंगी। सदर एनआरएलएम की तरफ से बकरी दूध प्रिजर्व करने के लिए यूनिट लगाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर बकरी का दूध खुले बाजार में बेचने की योजना है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बकरी पालन सबसे अधिक आय कमाने वाला माध्यम बनकर उभरा है। जनपद में वन क्षेत्र की अधिकता के कारण बकरी पालन करना सुविधाजनक है। कई आजीविका समूह बकरी पालन के जरिए अच्छी आय कमा रही हैं। बकरी के दूध के औषधीय गुणों के कारण इसकी मांग शहरी क्षेत्रों में भी अधिक होती है। ऐसे उपभोक्ताओं की जरूरत को पूरा करने के लिए बकरी के दूध को पैकेट में पैक करके बेचने की योजना पर एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ) काम कर रहा है।
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सदर क्षेत्र में ही 25 लीटर दूध का हो रहा उत्पादन
सदर ब्लॉक एनआरएलएम बीएमएम शेषनाथ मौर्य व मनोज मौर्य ने बताया कि सदर ब्लॉक में कुल 14 समूह ऐसे हैं जो बकरी पाल के जरिए आय कमा रहे हैं। बागा पार राधाकृष्ण आजीविका समूह की अध्यक्ष ज्ञांती के समूह में लगभग 160 के करीब बकरियां हैं। इसी गांव के अन्य समूह की अध्यक्ष फूल मती, गुड़िया, सरस्वती के निर्देशन में भी महिला सदस्य बड़ी संख्या में बकरियां पाले हुए हैं। सदर के सभी समूह को मिलाकर 25 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन किया जाता है। इसे देखते हुए सदर एनआरएल एम ने प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर पैकेट बंद बकरी का दूध उतारने की योजना तैयार की है। बकरी का दूध औषधीय गुणों के कारण काफी महंगा बिकता है। ऐसे में बकरी पालन के साथ मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट एक लघु उद्योग की तरह आधी आबादी के लिए आय सृजन में मददगार बनेगा।
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बकरी के दूध में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व
जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. एके द्विवेदी ने बताया कि बकरी का दूध बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए औषधि है। इसमें ऐसे पोषक तत्व इसमें प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जो अन्य दूध में न के बराबर होते हैं। इससे रक्त प्लेटलेट्स बढ़ते हैं। पाचन, खून की कमी, तनाव, गठिया, सूजन आदि में सुधार होता है।कोलेस्ट्रॉल व ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। कैल्शियम, फास्फोरस से हड्डियां मजबूती होती हैं। मस्तिष्क में हैप्पी हार्मोन (डोपामिन) रिलीज होता है, इससे अवसाद, घबराहट में राहत मिलती है।
वर्जन
ग्रामीण समूह की महिलाएं बड़ी संख्या में बकरी पालन कर रहीं हैं। अब तक सिर्फ मांस के लिए ही इनकी बिक्री की जाती थी लेकिन अब बकरी के दूध का 250 एमएल का पैक बाजार में उतारा जाएगा। दूध की कमाई से समूह को अतिरिक्त आमदनी होगी। योजना के बारे में उपायुक्त व उद्योग विभाग से भी मदद ली जाएगी।
-नागेंद्र देव पांडेय, एडीओ आईएसबी सदर।
बकरी पालन जनपद में ग्रामीण आजीविका का सशक्त माध्यम है। अगर सदर की टीम गोटमिल्क प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करना चाहती है। विभाग के स्तर से सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
-मो. जाकिर, उपायुक्त, एनआरएलएम