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नहीं पहुंची एंबुलेंस, मां को ठेले से पहुंचाया अस्पताल
महराजगंज (ब्यूरो)
Updated Fri, 07 Dec 2018 12:37 AM IST
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नहीं पहुंची एंबुलेंस, मां को ठेले से पहुंचाया अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
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महराजगंज। सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की कोशिश का दावा कर रही है वहीं योजनाओं के क्रियान्वयन में जुटे लोग लापरवाही कर सरकार के दावों की पोल खोल दे रहे हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि फोन किए जाने के बाद भी जब एंबुलेंस गांव नहीं पहुंचा तो दर्द से कराह रही मां को मजदूर बेटा ठेले पर लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निचलौल पहुंचा।
निचलौल थाना क्षेत्र के बरौली गांव निवासी श्रीनिवास मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। करीब दस दिन से उनकी मां फेकना देवी (75) बीमार हैं। कमर में फोड़ा हुआ है। बृहस्पतिवार को मां फेकना देवी दर्द से कराहने लगीं। दर्द ज्यादा बढ़ने पर मजदूर बेटे ने एंबुलेंस सेवा के लिए 108 नंबर पर फोन किया। बेटे ने श्रीनिवास से मां को दर्द की दवा देने के बाद काफी देर तक एंबुलेंस का इंतजार किया। इसी बीच अचानक मां ने बोलना बंद कर दिया। यह देख श्रीनिवास घबरा गए और पड़ोसी का ठेला मांगकर ले आए। उसी ठेले पर मां को लिटाकर अस्पताल के लिए निकल पडे़। ठेले पर श्रीनिवास की बेटी सुमित्रा अपनी दादी के पास बैठी थी। श्रीनिवास मां को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर निचलौल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। मां का इलाज शुरू होने के बाद श्रीनिवास ने राहत की सांस ली। श्रीनिवास ने एंबुलेंस सेवा के प्रति नाराजगी जताई। कहा कि अगर एंबुलेंस का इंतजार करते तो कुछ भी हो सकता था।इसी क्रम में निचलौल कस्बे के जिगनहवां निवासी मुन्ना भारती भी दर्द से कराहती अपनी मां जानकी देवी (60) को ठेले पर लेकर इलाज के लिए सीएचसी निचलौल पहुंचे। मुन्ना ने भी फोन किया लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। लोगों ने बताया कि निचलौल अस्पताल में चार एंबुलेंस में से मात्र दो ठीक हालत में हैं। उस एंबुलेंस में भी कोई जीवनरक्षक उपकरण मौजूद नहीं हैं। अस्पताल में एंबुलेंस की उचित व्यवस्था न होने का खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर क्षमा शंकर पांडेय ने कहा कि यह गंभीर मामला है। इस मामले की जानकारी उन्हें नहीं है। पीड़ित परिवार की तरफ से यदि लिखित शिकायत की जाएगी तो जांच कराकर कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति की जाएगी। एंबुलेंस सेवा मरीजों के लिए है। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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निचलौल थाना क्षेत्र के बरौली गांव निवासी श्रीनिवास मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। करीब दस दिन से उनकी मां फेकना देवी (75) बीमार हैं। कमर में फोड़ा हुआ है। बृहस्पतिवार को मां फेकना देवी दर्द से कराहने लगीं। दर्द ज्यादा बढ़ने पर मजदूर बेटे ने एंबुलेंस सेवा के लिए 108 नंबर पर फोन किया। बेटे ने श्रीनिवास से मां को दर्द की दवा देने के बाद काफी देर तक एंबुलेंस का इंतजार किया। इसी बीच अचानक मां ने बोलना बंद कर दिया। यह देख श्रीनिवास घबरा गए और पड़ोसी का ठेला मांगकर ले आए। उसी ठेले पर मां को लिटाकर अस्पताल के लिए निकल पडे़। ठेले पर श्रीनिवास की बेटी सुमित्रा अपनी दादी के पास बैठी थी। श्रीनिवास मां को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर निचलौल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। मां का इलाज शुरू होने के बाद श्रीनिवास ने राहत की सांस ली। श्रीनिवास ने एंबुलेंस सेवा के प्रति नाराजगी जताई। कहा कि अगर एंबुलेंस का इंतजार करते तो कुछ भी हो सकता था।इसी क्रम में निचलौल कस्बे के जिगनहवां निवासी मुन्ना भारती भी दर्द से कराहती अपनी मां जानकी देवी (60) को ठेले पर लेकर इलाज के लिए सीएचसी निचलौल पहुंचे। मुन्ना ने भी फोन किया लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। लोगों ने बताया कि निचलौल अस्पताल में चार एंबुलेंस में से मात्र दो ठीक हालत में हैं। उस एंबुलेंस में भी कोई जीवनरक्षक उपकरण मौजूद नहीं हैं। अस्पताल में एंबुलेंस की उचित व्यवस्था न होने का खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर क्षमा शंकर पांडेय ने कहा कि यह गंभीर मामला है। इस मामले की जानकारी उन्हें नहीं है। पीड़ित परिवार की तरफ से यदि लिखित शिकायत की जाएगी तो जांच कराकर कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति की जाएगी। एंबुलेंस सेवा मरीजों के लिए है। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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