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Maharajganj News: औद्यानिक कृषि पर खर्च होंगे नौ करोड़, भेजा प्रस्ताव
Tue, 03 Jun 2025 12:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 03 Jun 2025 12:59 AM IST
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महराजगंज। जनपद एकीकृत राष्ट्रीय बागवानी मिशन के विस्तार का लाभ उठाने की तैयारी पूरी करने में जुटा है। इसके लिए विभाग की तरफ से हार्टिकल्चर खेती के तहत केले का उत्पादन का दायरा बढ़ाएगा, केला रेशे से विभिन्न उत्पाद भी तैयार होंगे।
यह काम आजीविका मिशन को आत्मनिर्भर बनने का एक बड़ा और नवाचार से परिपूर्ण साधन बनेगा। उद्यान विभाग न सिर्फ केला उत्पादन के लिए 90 फीसदी तक अनुदान देगा बल्कि प्रोसेसिंग यूनिट स्थापना पर भी इतना ही अनुदान देगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उद्यान विभाग ने नौ करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है।
शासन ने बागवानी मिशन को 45 जनपदों से बढ़ाकर सभी जनपद में प्रभावी कर दिया है। साथ अनुसूचित जाति के लिए 90 फीसदी अनुदान तो सामान्य को 75 फीसदी किया गया है।
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इसके अलावा प्रत्येक जनपद को एक विशेष फसल को लेकर प्रस्ताव मांगा गया था, जिसका दायरा बढ़ाने के साथ प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित की जा सके। इसके तहत विभाग ने केला उत्पादन का प्रस्ताव, कार्ययोजना, संभावना इत्यादि समाहित करते हुए 9 करोड़ रुपये का प्रस्ताव मई में भेजा है, जिसे अनुमति तय मानी जा रही है और विभाग किसानों को जागरूक करने के प्रयास में जुटा है।
1500 हेक्टेयर अबतक जनपद में केला उत्पादन का रकबा था, जिसे इस बार योजना के तहत 4500 हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। निचलौल, सिसवा, घुघली, फरेंदा, पनियरा में अबतक केले की खेती हो रही थी। इस क्षेत्र के अब अन्य किसानों से भी विभाग संपर्क कर अनुदान की जानकारी देकर किसानों को जोड़ रहा और यूपीहार्टिकल्चर डाट इन पर आवेदन करवाने और जनपदीय उद्यान विभाग में पंजीकृत भी कर रहा है।
इंडो-इस्राइल नर्सरी में तैयार होंगे पौधे
विभाग ने केला उत्पादन बढ़ाने के साथ आजीविका मिशन की उन महिलाओं के कमाई का जरिया भी खोज निकाला है जो विभाग से जुड़कर इंडो-इजराइल नर्सरी में पौधे तैयार करेंगी। इंडो-इजराइल नर्सरी जनपद के विकास खंडों में मनरेगा से लगभग तीन करोड़ की लागत से तैयार हुई हैं। इन दोनों नर्सरी में उन्नतिशील किस्म के फल व सब्जियों की पौध तैयार करने के लिए विभाग ने 200 उद्यान सखी तैयार किए हैं जो ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हैं। इनसे केले की नौ किस्म के पौध तैयार कराया जाएगा जो कम समय में अधिक उत्पादन क्षमता के होंगे। प्रति पौध उद्यान सखियां दो रुपये में उन किसानों को देंगी जो इसके उत्पादन से जुड़ेंगे।
प्रोसेसिंग यूनिटों की होगी स्थापना
एकीकृत राष्ट्रीय बागवानी मिशन की हार्टिकल्चर योजना के तहत एक नहीं बल्कि जरूरत के मुताबिक 10 यूनिटों को मौजूदा वित्तीय सत्र में 90 से 75 फीसदी का अनुदान दिया जाएगा। इन यूनिटों में मिशन की महिलाएं केला रेशे से विशेष तरह के कार्ड जिसमें मांगलिक कार्यक्रमों के कार्ड के साथ बैग, झोला, पर्स व अन्य उत्पाद भी तैयार कराकर कमाई का जरिया दिया जाएगा और विभाग इसका प्रशिक्षण भी देगा।
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यह काम आजीविका मिशन को आत्मनिर्भर बनने का एक बड़ा और नवाचार से परिपूर्ण साधन बनेगा। उद्यान विभाग न सिर्फ केला उत्पादन के लिए 90 फीसदी तक अनुदान देगा बल्कि प्रोसेसिंग यूनिट स्थापना पर भी इतना ही अनुदान देगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उद्यान विभाग ने नौ करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है।
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शासन ने बागवानी मिशन को 45 जनपदों से बढ़ाकर सभी जनपद में प्रभावी कर दिया है। साथ अनुसूचित जाति के लिए 90 फीसदी अनुदान तो सामान्य को 75 फीसदी किया गया है।
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इसके अलावा प्रत्येक जनपद को एक विशेष फसल को लेकर प्रस्ताव मांगा गया था, जिसका दायरा बढ़ाने के साथ प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित की जा सके। इसके तहत विभाग ने केला उत्पादन का प्रस्ताव, कार्ययोजना, संभावना इत्यादि समाहित करते हुए 9 करोड़ रुपये का प्रस्ताव मई में भेजा है, जिसे अनुमति तय मानी जा रही है और विभाग किसानों को जागरूक करने के प्रयास में जुटा है।
1500 हेक्टेयर अबतक जनपद में केला उत्पादन का रकबा था, जिसे इस बार योजना के तहत 4500 हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। निचलौल, सिसवा, घुघली, फरेंदा, पनियरा में अबतक केले की खेती हो रही थी। इस क्षेत्र के अब अन्य किसानों से भी विभाग संपर्क कर अनुदान की जानकारी देकर किसानों को जोड़ रहा और यूपीहार्टिकल्चर डाट इन पर आवेदन करवाने और जनपदीय उद्यान विभाग में पंजीकृत भी कर रहा है।
इंडो-इस्राइल नर्सरी में तैयार होंगे पौधे
विभाग ने केला उत्पादन बढ़ाने के साथ आजीविका मिशन की उन महिलाओं के कमाई का जरिया भी खोज निकाला है जो विभाग से जुड़कर इंडो-इजराइल नर्सरी में पौधे तैयार करेंगी। इंडो-इजराइल नर्सरी जनपद के विकास खंडों में मनरेगा से लगभग तीन करोड़ की लागत से तैयार हुई हैं। इन दोनों नर्सरी में उन्नतिशील किस्म के फल व सब्जियों की पौध तैयार करने के लिए विभाग ने 200 उद्यान सखी तैयार किए हैं जो ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हैं। इनसे केले की नौ किस्म के पौध तैयार कराया जाएगा जो कम समय में अधिक उत्पादन क्षमता के होंगे। प्रति पौध उद्यान सखियां दो रुपये में उन किसानों को देंगी जो इसके उत्पादन से जुड़ेंगे।
प्रोसेसिंग यूनिटों की होगी स्थापना
एकीकृत राष्ट्रीय बागवानी मिशन की हार्टिकल्चर योजना के तहत एक नहीं बल्कि जरूरत के मुताबिक 10 यूनिटों को मौजूदा वित्तीय सत्र में 90 से 75 फीसदी का अनुदान दिया जाएगा। इन यूनिटों में मिशन की महिलाएं केला रेशे से विशेष तरह के कार्ड जिसमें मांगलिक कार्यक्रमों के कार्ड के साथ बैग, झोला, पर्स व अन्य उत्पाद भी तैयार कराकर कमाई का जरिया दिया जाएगा और विभाग इसका प्रशिक्षण भी देगा।