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Maharajganj News: फर्जी दस्तावेज लगाकर बेच दी नौ एकड़ जमीन
Thu, 01 Feb 2024 03:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 01 Feb 2024 03:17 AM IST
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महराजगंज/निचलौल। तहसील में जमीन का फर्जीवाड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। करीब डेढ़ साल पहले फर्जी तरीके से जमीन के बैनामे में उपनिबंधक सहित 11 लोगों के खिलाफ केस भी दर्ज हुआ था। अभी इस मामले की जांच चल रही है। इसी बीच एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लेदी गांव में नौ एकड़ भूमि को कुछ भू-माफियाओं ने विभाग के जिम्मेदारों से मिलीभगत कर बेच दी। जानकारी होने पर पीड़ित ने बुधवार को तहसील पहुंच नायब तहसीलदार कोर्ट में आपत्ति दायर कर कार्रवाई की मांग की।
नायब तहसीलदार कोर्ट में दायर आपत्ति में अनिरुद्ध मिश्र निवासी लेदी ने बताया कि कुछ भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेज लगाकर गांव स्थित नौ एकड़ जमीन प्रसिद्ध नरायन के नाम से बेच दी है। बैनामा के दस्तावेज में लगे आधार कार्ड की जांच कराने पर एक शख्स का नाम आ रहा है। हालांकि जिसके नाम से जमीन है, उस व्यक्ति का आधार नंबर और बैनामा दस्तावेज में लगे दीनदयाल का आधार नंबर एक ही है। जबकि दीनदयाल से मामले की जानकारी लेने पर उन्होंने कहा की वह निचलौल तहसील में कभी गए ही नहीं थे। इतना ही नहीं भू-माफियाओं ने करीब दो करोड़ 62 लाख रुपये की लागत वाली जमीन को महज 22 लाख रुपये में बेच दी।
निचलौल उपनिबंधक संदीप कुमार चौहान ने जानकारी देते हुए कहा कि बैनामा के दौरान आधार कार्ड की जांच करने पर विक्रेता का नाम ही आया था। फिलहाल बैनामा गवाहों के आधार पर किया जाता है।
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बैनामे में यह जानकारी जरूरी
तहसील के वरिष्ठ अधिवक्ता सरजू पांडेय ने कहा कि बैनामा बिक्री की पुष्टि करता है। साथ ही विक्रेता से खरीदार को संपत्ति के मालिकाना हक को ट्रांसफर करता है। बैनामा के रजिस्ट्रेशन के साथ ही प्रॉपर्टी खरीदने का प्रक्रिया खत्म हो जाता है। बैनामे में क्रेता-विक्रेता की पूरी जानकारी, संबंधित जमीन की डिटेल्स, गवाहों की जानकारी, स्टांप, नक्शा जैसी डिटेल्स शामिल होनी चाहिए। अगर यह सब बगैर जानकारी के जिम्मेदारों की ओर से बैनामा की जाती है तो यह बहुत बड़ी लापरवाही मानी जाएगी।
क्रेता और विक्रेता को नहीं पहचानते दस्तावेज लेखक
बैनामा दस्तावेज में दस्तावेज लेखक की ओर से एक जगह दर्शाया गया है कि वह जमीन बेचने और खरीदने वाले व्यक्ति को जानते-पहचानते नहीं हैं। पक्षकारों के कथनानुसार दस्तावेज तैयार किया गया है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी क्रेता और विक्रेता की होगी। हालांकि बैनामे में सभी गवाह बांसगांव के रहने वाले हैं। नियम के मुताबिक एक गवाह स्थानीय होना चाहिए। इसके बाद भी जमीन का बैनामा कर दिया गया है।
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नायब तहसीलदार कोर्ट में दायर आपत्ति में अनिरुद्ध मिश्र निवासी लेदी ने बताया कि कुछ भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेज लगाकर गांव स्थित नौ एकड़ जमीन प्रसिद्ध नरायन के नाम से बेच दी है। बैनामा के दस्तावेज में लगे आधार कार्ड की जांच कराने पर एक शख्स का नाम आ रहा है। हालांकि जिसके नाम से जमीन है, उस व्यक्ति का आधार नंबर और बैनामा दस्तावेज में लगे दीनदयाल का आधार नंबर एक ही है। जबकि दीनदयाल से मामले की जानकारी लेने पर उन्होंने कहा की वह निचलौल तहसील में कभी गए ही नहीं थे। इतना ही नहीं भू-माफियाओं ने करीब दो करोड़ 62 लाख रुपये की लागत वाली जमीन को महज 22 लाख रुपये में बेच दी।
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निचलौल उपनिबंधक संदीप कुमार चौहान ने जानकारी देते हुए कहा कि बैनामा के दौरान आधार कार्ड की जांच करने पर विक्रेता का नाम ही आया था। फिलहाल बैनामा गवाहों के आधार पर किया जाता है।
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बैनामे में यह जानकारी जरूरी
तहसील के वरिष्ठ अधिवक्ता सरजू पांडेय ने कहा कि बैनामा बिक्री की पुष्टि करता है। साथ ही विक्रेता से खरीदार को संपत्ति के मालिकाना हक को ट्रांसफर करता है। बैनामा के रजिस्ट्रेशन के साथ ही प्रॉपर्टी खरीदने का प्रक्रिया खत्म हो जाता है। बैनामे में क्रेता-विक्रेता की पूरी जानकारी, संबंधित जमीन की डिटेल्स, गवाहों की जानकारी, स्टांप, नक्शा जैसी डिटेल्स शामिल होनी चाहिए। अगर यह सब बगैर जानकारी के जिम्मेदारों की ओर से बैनामा की जाती है तो यह बहुत बड़ी लापरवाही मानी जाएगी।
क्रेता और विक्रेता को नहीं पहचानते दस्तावेज लेखक
बैनामा दस्तावेज में दस्तावेज लेखक की ओर से एक जगह दर्शाया गया है कि वह जमीन बेचने और खरीदने वाले व्यक्ति को जानते-पहचानते नहीं हैं। पक्षकारों के कथनानुसार दस्तावेज तैयार किया गया है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी क्रेता और विक्रेता की होगी। हालांकि बैनामे में सभी गवाह बांसगांव के रहने वाले हैं। नियम के मुताबिक एक गवाह स्थानीय होना चाहिए। इसके बाद भी जमीन का बैनामा कर दिया गया है।