फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Mess: Name of a big doctor on the board...Munna Bhai treats

गड़बड़झाला : बोर्ड पर नाम बड़े डॉक्टर का...इलाज करते हैं मुन्ना भाई

Mon, 21 Apr 2025 01:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Mon, 21 Apr 2025 01:08 AM IST
विज्ञापन
Mess: Name of a big doctor on the board...Munna Bhai treats
महराजगंज। निजी अस्पतालों में बोर्ड पर बड़े-बड़े डॉक्टरों के नाम लिखे रहते हैं, लेकिन असल में ज्यादातर अस्पतालों में इलाज कोई और करता है। इनमें कुछ जगहों पर बगैर डिग्री वाले ‘मुन्ना भाई’ अनुभव के आधार पर इलाज करते हैं।
विज्ञापन

इससे मरीज की बीमारी ठीक होने के बजाय बढ़ जाती है। बीते दिनों अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। गुजरे वक्त में निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौतें हुईं थीं। मामला सामने आने पर जिम्मेदार कार्रवाई कर दायित्व की इतिश्री कर खामोश हो जाते हैं।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार, जिले में वर्तमान में 106 निजी नर्सिंग होम, 89 पैथोलॉजी लैब, 12 जनरल क्लीनिक, 23 डेंटल क्लीनिक, 22 एक्स-रे सेंटर और 54 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत हैं, लेकिन छोटे-बड़े चौराहों, गलियों और मोहल्लों में बिना किसी मानक के अस्पताल खुल गए हैं। रजौड़ा खुर्द गांव की आयशा गुजरे वक्त को यादकर फफक पड़ीं। उन्होंने बताया कि नगर पंचायत पनियरा के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान हुई लापरवाही के चलते पति नसरुद्दीन अंसारी (55) की मौत हो गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

यह घटना 25 अक्तूबर 2023 की है। आयशा खातून ने बताया कि पति को 25 अक्तूबर को सर्दी, जुकाम और बुखार हुआ था। उनको पनियरा के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। जहां पर सही तरीके से जांच और इलाज नहीं किया गया, जिसके कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई। इस दौरान पति की मौत हो गई थी। निजी अस्पताल के खिलाफ शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
उन्होंने बताया कि अस्पताल के बोर्ड पर काफी सुविधा और अच्छे डॉक्टर का नाम डिग्री के साथ लिखा गया था। इसे देखकर लगा की अस्पताल अच्छा है। इससे वहां भर्ती करा दी। बीमारी ठीक होने के बजाय और बढ़ गई। वहीं इलाज में भी लापरवाही की गई। सूत्र बताते हैं कि निजी अस्पताल में जिस डॉक्टर के नाम पर अस्पताल पंजीकृत है उनमें से अधिकतर अस्पताल में नहीं रहते हैं।
कुछ अस्पताल में मुन्ना भाई इलाज कर मरीजों की जान जोखिम में डाल देते हैं। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। किसी की बीमारी बढ़ गई तो किसी की इलाज के दौरान मौत हो गई। इन मामलों के सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करता है। इसके बाद भी अंधेरगर्दी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। निचलौल कस्बे के निजी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत में भी खामियों की पोल खुल गई। असल में जिस निजी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत हुई थी, उसका नवीनीकरण नहीं हुआ था। इसके बाद भी वहां मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा था।

प्रसव कराने के लिए ऑपरेशन कर दिया गया, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव से जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। शहर के अलावा कई जगहों पर ऐसे क्लीनिक हैं, जहां मरीजों को भर्ती भी किया जाता है। नियमानुसार क्लीनिक में मरीजों का इलाज किया जाता है। भर्ती नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed