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Maharajganj News: सिंथेटिक रुई से गुलजार हुआ गद्दा-रजाई का बाजार
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सस्ती पड़ रही है सिंथेटिक रूई, सेमर की रूई महंगी
टेंट कारोबारी अधिकतर उपयोग कर रहे यह रूई
महराजगंज। ठंड गहराने के बीच रजाई गद्दे का कारोबार गुलजार हुआ है। पिछले दिनों तक जहां सिर्फ लगन के आर्डर ही रूई धुनाई व गद्दा रजाई सिलने वालों को मिल रहे थे। अब सर्दी बढ़ने के कारण लोग रजाई गद्दा इंतजाम तेजी से कर रहे। बदले माहौल में रूई धुनाई करने वालों की व्यस्तता बढ़ा दी है।
सक्सेना चौक पर रूई धुनाई से लेकर गद्दा रजाई भरने का कार्य करने वाले कारोबारियों की दुकान है। कारोबारी अब्दुल हसन ने बताया कि सफेद सेमर रुई की जगह सिंथेटिक रूई मार्केट में आई है। इससे पहले पांच किलो का नया गद्दा तैयार करने में जहां 1,500 तक खर्च लगता था सिंथेटिक रूई के कारण सात सौ से आठ सौ के बीच ही पड़ रहा है। सस्ता होने के कारण टेंट इत्यादि के व्यापारी इसी रूई का उपयोग गद्दा रजाई तैयार कराने में करा रहे हैं। बताया कि प्रतिदिन तीन से चार गद्दे पहले तैयार होते थे लेकिन अब संख्या बढ़ी है। मुश्ताक ने बताया कि लोग यज्ञ आदि में दान के लिए भी गद्दा रजाई बनवाते हैं जो काफी हल्का होता है। अगर यह सिंथेटिक रूई से बनवाते हैं तो वह काफी सस्ते में पड़ेगा क्योंकि सेमर की रूई 250 से 300 रुपये किलो है। ऐसे में इसके उपयोग से गद्दा रजाई तैयार कराना महंगा पड़ता है। सिलाई व कपड़े का रेट सिंगल के लिए 350 तो डबल के लिए 450 रुपये लिए जाते हैं।
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टेंट कारोबारी अधिकतर उपयोग कर रहे यह रूई
महराजगंज। ठंड गहराने के बीच रजाई गद्दे का कारोबार गुलजार हुआ है। पिछले दिनों तक जहां सिर्फ लगन के आर्डर ही रूई धुनाई व गद्दा रजाई सिलने वालों को मिल रहे थे। अब सर्दी बढ़ने के कारण लोग रजाई गद्दा इंतजाम तेजी से कर रहे। बदले माहौल में रूई धुनाई करने वालों की व्यस्तता बढ़ा दी है।
सक्सेना चौक पर रूई धुनाई से लेकर गद्दा रजाई भरने का कार्य करने वाले कारोबारियों की दुकान है। कारोबारी अब्दुल हसन ने बताया कि सफेद सेमर रुई की जगह सिंथेटिक रूई मार्केट में आई है। इससे पहले पांच किलो का नया गद्दा तैयार करने में जहां 1,500 तक खर्च लगता था सिंथेटिक रूई के कारण सात सौ से आठ सौ के बीच ही पड़ रहा है। सस्ता होने के कारण टेंट इत्यादि के व्यापारी इसी रूई का उपयोग गद्दा रजाई तैयार कराने में करा रहे हैं। बताया कि प्रतिदिन तीन से चार गद्दे पहले तैयार होते थे लेकिन अब संख्या बढ़ी है। मुश्ताक ने बताया कि लोग यज्ञ आदि में दान के लिए भी गद्दा रजाई बनवाते हैं जो काफी हल्का होता है। अगर यह सिंथेटिक रूई से बनवाते हैं तो वह काफी सस्ते में पड़ेगा क्योंकि सेमर की रूई 250 से 300 रुपये किलो है। ऐसे में इसके उपयोग से गद्दा रजाई तैयार कराना महंगा पड़ता है। सिलाई व कपड़े का रेट सिंगल के लिए 350 तो डबल के लिए 450 रुपये लिए जाते हैं।
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