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Maharajganj News: उचित मुआवजे की दरकार, विधिक राय लेने हाईकोर्ट पहुंचे पीड़िता
Sun, 05 Jan 2025 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 05 Jan 2025 12:46 AM IST
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महराजगंज। आनंदनगर-महराजगंज-घुघली प्रस्तावित रेल मार्ग बनने की राह में मुश्किल हो सकती है। क्योंकि जिन लोगों की जमीन रेल मार्ग के दायरे में आ रही है, वे हाईकोर्ट प्रयागराज में अधिवक्ताओं से राय ले रहे हैं। विधिक राय मिलने के बाद पीडित आगे की कार्रवाई करेंगे।
महंगे दर पर जमीन खरीदने के बाद अब मुआवजा उसके हिसाब से नहीं मिलने के कारण लोग परेशान हैं। करीब 15 से 20 लोग शनिवार को हाईकोर्ट पहुंचे थे। महुअवा में कैलाश प्रताप अग्निहोत्री अपना घर बनाए हैं। यह अधिवक्ता हैं। इनका कहना है कि हाईकोर्ट आया हूं।
यहां विधिक राय ली जा रही है। 10 डिस्मिल जमीन में घर बन गया है। करीब 40 लाख से अधिक की जमीन है। मुआवजा इससे काफी कम बन रहा है। कृषि के रेट से मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि घर के हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिए। मोटी रकम जमीन से लेकर घर बनाने में खर्च हुई। जमा पूंजी खर्च हो गई। अब मुआवजा भी कम मिलेगा तो कोई कहां रहेगा। पाई-पाई जोड़कर घर बनाया गया है।
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रेल मार्ग में सब बिखरता नजर आ रहा है। विकास होना अच्छी बात है, इसका कोई विरोध नहीं है, लेकिन मुआवजा तो ठीक से मिलना चाहिए। इन्हीं के साथ गए महुअवा के अशोक पटेल ने बताया कि अगर कोई 40 लाख की जमीन खरीदा है तो उसे करीब 14 लाख मिल रहा है। उन्होंने बताया कि 32 डिस्मिल जमीन जा रही है, जिसमें 5 डिस्मिल जमीन में मकान बना है। मकान में लगी पूंजी बर्बाद हो जाएगी।
हमीद नगर के नसीम अहमद ने बताया कि पांच डिस्मिल 35 लाख में खरीदा गया है। इतनी रकम नहीं मिल रही है। पकड़ी के अजय कुमार वर्मा कहने लगे की किसी तरह से पांच डिस्मिल जमीन खरीदा हूं। अब तो पास में रकम भी नहीं है। विधिक राय मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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महंगे दर पर जमीन खरीदने के बाद अब मुआवजा उसके हिसाब से नहीं मिलने के कारण लोग परेशान हैं। करीब 15 से 20 लोग शनिवार को हाईकोर्ट पहुंचे थे। महुअवा में कैलाश प्रताप अग्निहोत्री अपना घर बनाए हैं। यह अधिवक्ता हैं। इनका कहना है कि हाईकोर्ट आया हूं।
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यहां विधिक राय ली जा रही है। 10 डिस्मिल जमीन में घर बन गया है। करीब 40 लाख से अधिक की जमीन है। मुआवजा इससे काफी कम बन रहा है। कृषि के रेट से मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि घर के हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिए। मोटी रकम जमीन से लेकर घर बनाने में खर्च हुई। जमा पूंजी खर्च हो गई। अब मुआवजा भी कम मिलेगा तो कोई कहां रहेगा। पाई-पाई जोड़कर घर बनाया गया है।
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रेल मार्ग में सब बिखरता नजर आ रहा है। विकास होना अच्छी बात है, इसका कोई विरोध नहीं है, लेकिन मुआवजा तो ठीक से मिलना चाहिए। इन्हीं के साथ गए महुअवा के अशोक पटेल ने बताया कि अगर कोई 40 लाख की जमीन खरीदा है तो उसे करीब 14 लाख मिल रहा है। उन्होंने बताया कि 32 डिस्मिल जमीन जा रही है, जिसमें 5 डिस्मिल जमीन में मकान बना है। मकान में लगी पूंजी बर्बाद हो जाएगी।
हमीद नगर के नसीम अहमद ने बताया कि पांच डिस्मिल 35 लाख में खरीदा गया है। इतनी रकम नहीं मिल रही है। पकड़ी के अजय कुमार वर्मा कहने लगे की किसी तरह से पांच डिस्मिल जमीन खरीदा हूं। अब तो पास में रकम भी नहीं है। विधिक राय मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।