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Maharajganj News: झोलाछाप के चक्कर में पड़े तो बढ़ जाएगा मर्ज
Tue, 08 Apr 2025 12:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 08 Apr 2025 12:55 AM IST
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महराजगंज। झोलाछाप के शर्तिया इलाज के चक्कर में फंसे तो मर्ज ठीक होने के बजाय और बढ़ जाएगा। बीते दिन के मामले को देखा जाए तो झोलाछाप ने जैसे-तैसे इलाज कर युवक को मौत के मुंह में धकेल दिया।
जिले में इस तरह से इलाज का झांसा देने वालों की भरमार है। कार्रवाई होने के कुछ दिन तक इनका धंधा बंद रहता है। वक्त गुजरने के साथ ही सक्रियता बढ़ा देते हैं। पनियरा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत सोहास निवासी विजय प्रताप रविवार की शाम इलाहाबाद चौराहे पर झोलाछाप के यहां इलाज कराने गए थे।
उनको बुखार था। झोलाछाप के क्लीनिक में इलाज के दौरान खून की उल्टी होने लगी। उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सोमवार को छोलाछाप कहीं भाग गया। परिजनों की ओर से इस प्रकरण में कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई गई। पनियरा थानाध्यक्ष निर्भय सिंह के अनुसार, प्रकरण में कोई तहरीर नहीं मिली है।
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जिले में झोलाछाप के इलाज में मौत होने का मामला कोई नया नहीं है। समय-समय पर ऐसे मामले में सामने आते रहते हैं। इलाहाबाद चौराहे हुई घटना को लेकर चर्चा हो रही है। झोलाछापा का पता नहीं चल रहा है। क्लीनिक में ताला बंद है। मामले में समझौता होने की बात कही जा रही है। सूत्र बताते हैं कि झोलाछाप से इलाज कराने में बीमारी ठीक होने के बजाय बढ़ जाती है।
इससे तमाम लोग पीड़ित हैं। झोलाछाप का जिले में मजबूत जाल है। शहर से लेकर नेपाल बाॅर्डर तक इनका धंधा चलता है। झोलाछाप और मेडिकल स्टोर संचालक आपस में दवाइयों पर मुनाफा बांट रहे हैं। इसी तरह पैथालॉजी संचालक भी इनके माध्यम से लंबा मुनाफा कमा रहे हैं। वहीं झोलाछाप की लूटखसोट का अंदाजा इसी से लगाया जाता है। सामान्य बुखार हो या पेटदर्द यह डॉक्टर्स निजी लैब संचालकों से सांठगांठ कर 200 से 300 रुपये की जांच कराते हैं।
बीते चार अक्तूबर की बात करें तो धनहा नायक निवासी मुनीब निषाद की छह वर्षीय बेटी अंकिता को बुखार हो गया था। उसे घर से थोड़ी ही दूर पर स्थित एक झोलाछाप के पास ले गए थे। डॉक्टर ने अंकिता को इंजेक्शन लगाया और कुछ दवा देकर घर भेज दिया। झोलाछाप डॉक्टर के इंजेक्शन लगाने से उस जगह बच्ची को सूजन हो गया। धीरे-धीरे सूजन के साथ साथ उसका दर्द बढ़ता गया। अंकिता की हालत बिगड़ने लगी।
परिजन उसे लेकर परतावल बाजार में स्थित दो-तीन निजी अस्पताल में ले गए, लेकिन किसी ने उसका इलाज नहीं किया। इसके बाद उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां पहुंचने से पहले ही बच्ची ने दम तोड़ दिया था। मुनीब निषाद चर्चा करते हुए फफक पड़े। उन्होंने बताया कि तुरंत समस्या होने पर झोलाछाप ही करीब मिल जाते हैं, इनकी दुकान जगह-जगह रहती है।
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जिले में इस तरह से इलाज का झांसा देने वालों की भरमार है। कार्रवाई होने के कुछ दिन तक इनका धंधा बंद रहता है। वक्त गुजरने के साथ ही सक्रियता बढ़ा देते हैं। पनियरा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत सोहास निवासी विजय प्रताप रविवार की शाम इलाहाबाद चौराहे पर झोलाछाप के यहां इलाज कराने गए थे।
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उनको बुखार था। झोलाछाप के क्लीनिक में इलाज के दौरान खून की उल्टी होने लगी। उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सोमवार को छोलाछाप कहीं भाग गया। परिजनों की ओर से इस प्रकरण में कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई गई। पनियरा थानाध्यक्ष निर्भय सिंह के अनुसार, प्रकरण में कोई तहरीर नहीं मिली है।
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जिले में झोलाछाप के इलाज में मौत होने का मामला कोई नया नहीं है। समय-समय पर ऐसे मामले में सामने आते रहते हैं। इलाहाबाद चौराहे हुई घटना को लेकर चर्चा हो रही है। झोलाछापा का पता नहीं चल रहा है। क्लीनिक में ताला बंद है। मामले में समझौता होने की बात कही जा रही है। सूत्र बताते हैं कि झोलाछाप से इलाज कराने में बीमारी ठीक होने के बजाय बढ़ जाती है।
इससे तमाम लोग पीड़ित हैं। झोलाछाप का जिले में मजबूत जाल है। शहर से लेकर नेपाल बाॅर्डर तक इनका धंधा चलता है। झोलाछाप और मेडिकल स्टोर संचालक आपस में दवाइयों पर मुनाफा बांट रहे हैं। इसी तरह पैथालॉजी संचालक भी इनके माध्यम से लंबा मुनाफा कमा रहे हैं। वहीं झोलाछाप की लूटखसोट का अंदाजा इसी से लगाया जाता है। सामान्य बुखार हो या पेटदर्द यह डॉक्टर्स निजी लैब संचालकों से सांठगांठ कर 200 से 300 रुपये की जांच कराते हैं।
बीते चार अक्तूबर की बात करें तो धनहा नायक निवासी मुनीब निषाद की छह वर्षीय बेटी अंकिता को बुखार हो गया था। उसे घर से थोड़ी ही दूर पर स्थित एक झोलाछाप के पास ले गए थे। डॉक्टर ने अंकिता को इंजेक्शन लगाया और कुछ दवा देकर घर भेज दिया। झोलाछाप डॉक्टर के इंजेक्शन लगाने से उस जगह बच्ची को सूजन हो गया। धीरे-धीरे सूजन के साथ साथ उसका दर्द बढ़ता गया। अंकिता की हालत बिगड़ने लगी।
परिजन उसे लेकर परतावल बाजार में स्थित दो-तीन निजी अस्पताल में ले गए, लेकिन किसी ने उसका इलाज नहीं किया। इसके बाद उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां पहुंचने से पहले ही बच्ची ने दम तोड़ दिया था। मुनीब निषाद चर्चा करते हुए फफक पड़े। उन्होंने बताया कि तुरंत समस्या होने पर झोलाछाप ही करीब मिल जाते हैं, इनकी दुकान जगह-जगह रहती है।