{"_id":"655a56f1a42efd492f076bd4","slug":"if-they-caught-sight-of-the-security-personnel-they-were-caught-otherwise-they-would-have-crossed-the-border-with-the-goats-maharajganj-news-c-7-1-jam1015-373801-2023-11-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: सुरक्षा कर्मियों की नजर में चढ़े तो पकड़ गए, वरना बकरों के साथ हो जाते सरहद पार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: सुरक्षा कर्मियों की नजर में चढ़े तो पकड़ गए, वरना बकरों के साथ हो जाते सरहद पार
विज्ञापन
ठूूूूठीबारी एसएसबी के जवानों ने पिकप पर लदे 82 बकरे के साथ दो आरोपियों को किया गिरफ्तार।संवाद
-दूसरे दिन भी पिकअप में लदे 82 बकरों के साथ दो गिरफ्तार
- नेपाल ले जाने की फिराक में थे आरोपी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में पशु तस्करी बढ़ गई है। सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता के कारणा दो दिन में 162 बकरे पकड़े गए। शनिवार को 80 और रविवार को 82 बकरों को लादकर ले जा रहे दो तस्करों को एसएसबी ने पकड़ लिया। अगर एसएसबी के जवानों की नजर नहीं पड़ती तो आसानी से इन बकरों को सरहद के पार पहुंचा दिया जाता। पगडंडियों से होकर तस्कर आसानी से बकरों को सीमा के पार करा रहे हैं। नेपाल में प्रत्येक बकरों पर दो से ढाई हजार का मुनाफा होता है। नेपाल में जितना अंदर तक ले जाएंगे, रेट भी बढ़ता जाएगा।
जानकारी के अनुसार, रविवार को बहराइच से पिकअप में भरकर 82 बकरों को ले जाते समय एसएसबी के जवानों ने दो आरोपियों को पकड़ लिया। उनको कोतवाली पुलिस को सौंपा दिया। ठूठीबारी एसएसबी बीओपी इंचार्ज जयंता घोष ने बताया कि 18 नवंबर की शाम टीम के साथ भारत-नेपाल सीमा पर गश्त कर रहे थे। इस दौरान पता चला कि चटिया गांव के रास्ते लक्ष्मीपुर होते हुए पिकअप से कुछ सामान नेपाल में जाने वाला है। एसएसबी के जवानों को चटियां गांव के पास एक पिकअप आता हुआ दिखाई दिया। पिकअप करीब पहुंची तो एसएसबी के जवानों को देखकर अंदर बैठे तस्कर कूदकर भागने लगे। जवानों ने दौड़ाकर पकड़ लिया। तलाशी ली गई तो देखा गया कि पिकअप में 82 बकरे भरे मिले। पकड़े गये आरोपियों में बहराइच के जिलगोलिया निवासी विशाल और शहाबुद्दीन शामिल हैं। ठूठीबारी कोतवाली प्रभारी कंचन राय ने बताया कि दोनो आरोपियों के खिलाफ पशुक्रूरता अधिनियम के तहत केस दर्ज कर चालान कर दिया गया।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
विज्ञापन
काठमांडू की मंडियों में भेजे जाते बकरे
इंडो-नेपाल की बार्डर पर जानवरों की तस्करी काफी बढ़ गई है। पगडंडियों के रास्ते अवैध रूप से जानवर भारतीय सीमा से नेपाल पहुंचाए जाते हैं। इसके बाद उन्हें नेपालगंज व काठमांडू की मंडियों में भेज इनके मांस पैक कर चीन, कोरिया, हांगकांग सहित अन्य देशों को भेजा जाता है। खास बात यह है कि तस्करों को नेपाल में बकरों की मुंहमांगी कीमत मिल रही है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
तस्कर पगडंडियों के रास्ते नेपाल पहुंचाते हैं बकरे
सीमा पर पकड़े गए तस्करों के मुताबिक सीमा से लगे पगडंडियों के सहारे बकरों को नेपाल तक ले जाते हैं। गिरोह में शामिल नेपाल के सदस्य नेपालगंज व काठमांडो स्थित जानवरों के बाजारों तक पहुंचाते हैं। भारत-नेपाल की सीमा से अवैध जानवरों की तस्करी का खेल खुलेआम चल रहा है। भारत-नेपाल सीमा पर सबसे अधिक भैंसे व बकरे की तस्करी की बात सामने आई है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
दशहरे में दी जाती है बकरों की बलि
25 सिंतबर 2019 से नेपाल सरकार ने स्वास्थ्य परीक्षण का हवाला देकर भारतीय बकरे को नेपाल में बेचने पर रोक लगा दिया है। दशहरे पर्व पर इसकी खपत को लेकर अब भारतीय क्षेत्र के पगडंडी से इसकी तस्करी शुरू हो गई। नेपाल में दशहरे के पर्व पर इसकी बलि दिए जाने की प्रथा है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
एक हजार नेपाली रुपये किलो बिक रहा बकरे का मांस
नेपाल के काठमांडू और पोखरा में बकरे का मांस प्रति किलो एक हजार नेपाली रुपये में बिक रहा है। उसके बाद भी पर्याप्त मात्रा में यह उपलब्ध नहीं है। भारत से नेपाल बकरों से भरा 20 से 25 ट्रक हर रोज जाता था। प्रतिबंध के बाद कारोबारियों ने बकरों को भेजना बंद कर दिए हैं। ऐसे में तस्कर इसका फायदा उठा रहे हैं।
विज्ञापन
- नेपाल ले जाने की फिराक में थे आरोपी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में पशु तस्करी बढ़ गई है। सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता के कारणा दो दिन में 162 बकरे पकड़े गए। शनिवार को 80 और रविवार को 82 बकरों को लादकर ले जा रहे दो तस्करों को एसएसबी ने पकड़ लिया। अगर एसएसबी के जवानों की नजर नहीं पड़ती तो आसानी से इन बकरों को सरहद के पार पहुंचा दिया जाता। पगडंडियों से होकर तस्कर आसानी से बकरों को सीमा के पार करा रहे हैं। नेपाल में प्रत्येक बकरों पर दो से ढाई हजार का मुनाफा होता है। नेपाल में जितना अंदर तक ले जाएंगे, रेट भी बढ़ता जाएगा।
जानकारी के अनुसार, रविवार को बहराइच से पिकअप में भरकर 82 बकरों को ले जाते समय एसएसबी के जवानों ने दो आरोपियों को पकड़ लिया। उनको कोतवाली पुलिस को सौंपा दिया। ठूठीबारी एसएसबी बीओपी इंचार्ज जयंता घोष ने बताया कि 18 नवंबर की शाम टीम के साथ भारत-नेपाल सीमा पर गश्त कर रहे थे। इस दौरान पता चला कि चटिया गांव के रास्ते लक्ष्मीपुर होते हुए पिकअप से कुछ सामान नेपाल में जाने वाला है। एसएसबी के जवानों को चटियां गांव के पास एक पिकअप आता हुआ दिखाई दिया। पिकअप करीब पहुंची तो एसएसबी के जवानों को देखकर अंदर बैठे तस्कर कूदकर भागने लगे। जवानों ने दौड़ाकर पकड़ लिया। तलाशी ली गई तो देखा गया कि पिकअप में 82 बकरे भरे मिले। पकड़े गये आरोपियों में बहराइच के जिलगोलिया निवासी विशाल और शहाबुद्दीन शामिल हैं। ठूठीबारी कोतवाली प्रभारी कंचन राय ने बताया कि दोनो आरोपियों के खिलाफ पशुक्रूरता अधिनियम के तहत केस दर्ज कर चालान कर दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
काठमांडू की मंडियों में भेजे जाते बकरे
इंडो-नेपाल की बार्डर पर जानवरों की तस्करी काफी बढ़ गई है। पगडंडियों के रास्ते अवैध रूप से जानवर भारतीय सीमा से नेपाल पहुंचाए जाते हैं। इसके बाद उन्हें नेपालगंज व काठमांडू की मंडियों में भेज इनके मांस पैक कर चीन, कोरिया, हांगकांग सहित अन्य देशों को भेजा जाता है। खास बात यह है कि तस्करों को नेपाल में बकरों की मुंहमांगी कीमत मिल रही है।
तस्कर पगडंडियों के रास्ते नेपाल पहुंचाते हैं बकरे
सीमा पर पकड़े गए तस्करों के मुताबिक सीमा से लगे पगडंडियों के सहारे बकरों को नेपाल तक ले जाते हैं। गिरोह में शामिल नेपाल के सदस्य नेपालगंज व काठमांडो स्थित जानवरों के बाजारों तक पहुंचाते हैं। भारत-नेपाल की सीमा से अवैध जानवरों की तस्करी का खेल खुलेआम चल रहा है। भारत-नेपाल सीमा पर सबसे अधिक भैंसे व बकरे की तस्करी की बात सामने आई है।
दशहरे में दी जाती है बकरों की बलि
25 सिंतबर 2019 से नेपाल सरकार ने स्वास्थ्य परीक्षण का हवाला देकर भारतीय बकरे को नेपाल में बेचने पर रोक लगा दिया है। दशहरे पर्व पर इसकी खपत को लेकर अब भारतीय क्षेत्र के पगडंडी से इसकी तस्करी शुरू हो गई। नेपाल में दशहरे के पर्व पर इसकी बलि दिए जाने की प्रथा है।
एक हजार नेपाली रुपये किलो बिक रहा बकरे का मांस
नेपाल के काठमांडू और पोखरा में बकरे का मांस प्रति किलो एक हजार नेपाली रुपये में बिक रहा है। उसके बाद भी पर्याप्त मात्रा में यह उपलब्ध नहीं है। भारत से नेपाल बकरों से भरा 20 से 25 ट्रक हर रोज जाता था। प्रतिबंध के बाद कारोबारियों ने बकरों को भेजना बंद कर दिए हैं। ऐसे में तस्कर इसका फायदा उठा रहे हैं।