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Maharajganj News: बैनामा के लिए अंगूठा नहीं स्कैन हुआ तो फेस स्कैनर से होगी पहचान
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फिंगर स्कैन नहीं तो फेस स्कैनर का प्रावधान
मुख्यालय सहित तीनों तहसीलों में उपलब्धता
महराजगंज। निबंधन कार्यालयों में रजिस्ट्री व बैनामा की प्रक्रिया पहली अप्रैल 2026 से और आसान कर दी गई है। बैनामा रजिस्ट्री के दौरान अगर अंगूठा नहीं स्कैन होता है तो फेस स्कैनर से पहचान पूरी हो जाएगी। इसके लिए जिला मुख्यालय के अलावा नौतनवां, निचलौल व फरेंदा तहसील में स्कैनर उपलब्ध कराए गए हैं।
एक अप्रैल से लागू नई व्यवस्था के तहत अब अंगूठे की छाप अनिवार्य नहीं रह गई है। इस सहूलियत से खासतौर पर बुजुर्गों व शारीरिक रूप से कमजोर लोगों की राहत मिलेगी। जिला निबंधक कार्यालय में प्रतिदिन औसतन 100 से 150 लोग रजिस्ट्री व बैनामा कराने पहुंचते हैं। इसमें 25 से 30 ऐसे लोग होते हैं, जिनके अंगूठे के निशान स्पष्ट नहीं आते। ऐसे लोगों को कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता था। बार-बार प्रयास करने के बाद भी काम पूरा नहीं हो पाता था। कई मामलों में लोगों को अगले दिन फिर से आना पड़ता था।
निबंधन कार्यालय महराजगंज के अधिवक्ता आलोक कुमार मिश्रा ने बताया कि फेस स्कैनर तकनीक पूरी तरह सुरक्षित और आधुनिक है। इससे किसी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका नहीं रहती। नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री प्रक्रिया में तेजी आई है। पहले एक बैनामा में जहां 30 से 35 मिनट तक लगते थे, अब यह समय घटकर 10 से 15 मिनट रह गया है। इसलिए अब अनावश्यक भीड़ नहीं एकत्र हो रही।
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वर्जन
थंब इंप्रेशन (अंगूठा निशान) न स्कैन होने की दशा में फेस ऑथेंटिकेशन की व्यवस्था पहली अप्रैल से प्रभावी कर दी गई है। जनपद मुख्यालय निबंधन कार्यालय के साथ जनपद के तीनों तहसील निबंधन कार्यालयों में भी फेस स्कैनर मशीन उपलब्ध करा दी गई है। इससे फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा और पूरी प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी।
आलोक शुक्ला, सहायक महानिरीक्षक निबंधन, महराजगंज
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मुख्यालय सहित तीनों तहसीलों में उपलब्धता
महराजगंज। निबंधन कार्यालयों में रजिस्ट्री व बैनामा की प्रक्रिया पहली अप्रैल 2026 से और आसान कर दी गई है। बैनामा रजिस्ट्री के दौरान अगर अंगूठा नहीं स्कैन होता है तो फेस स्कैनर से पहचान पूरी हो जाएगी। इसके लिए जिला मुख्यालय के अलावा नौतनवां, निचलौल व फरेंदा तहसील में स्कैनर उपलब्ध कराए गए हैं।
एक अप्रैल से लागू नई व्यवस्था के तहत अब अंगूठे की छाप अनिवार्य नहीं रह गई है। इस सहूलियत से खासतौर पर बुजुर्गों व शारीरिक रूप से कमजोर लोगों की राहत मिलेगी। जिला निबंधक कार्यालय में प्रतिदिन औसतन 100 से 150 लोग रजिस्ट्री व बैनामा कराने पहुंचते हैं। इसमें 25 से 30 ऐसे लोग होते हैं, जिनके अंगूठे के निशान स्पष्ट नहीं आते। ऐसे लोगों को कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता था। बार-बार प्रयास करने के बाद भी काम पूरा नहीं हो पाता था। कई मामलों में लोगों को अगले दिन फिर से आना पड़ता था।
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निबंधन कार्यालय महराजगंज के अधिवक्ता आलोक कुमार मिश्रा ने बताया कि फेस स्कैनर तकनीक पूरी तरह सुरक्षित और आधुनिक है। इससे किसी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका नहीं रहती। नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री प्रक्रिया में तेजी आई है। पहले एक बैनामा में जहां 30 से 35 मिनट तक लगते थे, अब यह समय घटकर 10 से 15 मिनट रह गया है। इसलिए अब अनावश्यक भीड़ नहीं एकत्र हो रही।
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थंब इंप्रेशन (अंगूठा निशान) न स्कैन होने की दशा में फेस ऑथेंटिकेशन की व्यवस्था पहली अप्रैल से प्रभावी कर दी गई है। जनपद मुख्यालय निबंधन कार्यालय के साथ जनपद के तीनों तहसील निबंधन कार्यालयों में भी फेस स्कैनर मशीन उपलब्ध करा दी गई है। इससे फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा और पूरी प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी।
आलोक शुक्ला, सहायक महानिरीक्षक निबंधन, महराजगंज