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Maharajganj News: जोत, रकबा, मानक का खेल, निजी दुकानों की चांदी, समितियों पर आफत

Sat, 23 Aug 2025 02:49 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 23 Aug 2025 02:49 AM IST
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Holding, area, game of standards, silver in private shops, trouble on committees
The team investigating after asking the farmer.
महराजगंज। जोत, रकबा और मानक का खेल ऐसा हुआ की निजी दुकानों से जमकर यूरिया बिकी। लखनऊ से आई टीम भी जिले में जांच कर रही है। जांच में परत दर परत राज खुल रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में टीम की विशेष नजर है। जिले में पांच लाख पंजीकृत किसान हैं। डेढ़ लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई। करीब 52 हजार एमटी खाद बिक चुकी है। इसके बाद यूरिया के लिए कतार लग रही है।
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सूत्रों की मानें तो असल खेल निजी दुकान से हुआ है। इनकी निगरानी करने में जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। खास बात है कि जुलाई में ही अधिकांश निजी दुकानों से यूरिया की बिक्री कर दी गई। बीते 17 जुलाई की बात करें तो निजी दुकान के सत्यापन अंधरेगर्दी की पोल खुली थी। सत्यापन के दौरान दुकान में यूरिया का कोई स्टाॅक मौजूद नहीं पाया गया। रिटेलर के अनुसार इस सीजन में यूरिया की कोई खरीददारी नहीं की गई है। जबकि पाॅश मशीन में 177 एमटी यूरिया स्टॉक प्रदर्शित हो रहा था। रिटेलर ने बताया गया कि पूर्व में उसकी अनुपस्थिति में उसके कर्मचारी के द्वारा बिना ई-पॉश मशीन के ही यूरिया का वितरण कर दिया गया। इस प्रकार ई-पाॅश मशीन में प्रदर्शित यूरिया की मात्रा के अनुसार, मौके पर यूरिया उर्वरक के भौतिक स्टॉक न पाए जाने की अनियमितता पाई गई थी। मामले में आरोपी मोहम्मदीन खान निवासी पिपरा बरगदवा के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। इसके बाद निजी दुकानों पर शिकंजा कसने में जिम्मेदार सक्रिय नहीं दिखे। दूसरी ओर समितियों पर पूरा दबाव आ गया। यहां खाद उपलब्ध होने के कारण किसानों की भीड़ लग जा रही है। स्टाॅक होने के बाद भी वितरण में समस्या भीड़ के कारण हो रही है। टोकन की व्यवस्था बनाकर समितियों पर खाद दिया जा रहा है। व्यवस्था संचालित करने के लिए प्रशासन की ओर से कर्मियों को तैनात किया गया है।
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सूत्रों की मानें तो खाद को लेकर मारामारी में निजी दुकानों से खेल कर दिया है। उनकी ओर से अपने स्टाॅक को जैसे तैसे खपा दिया गया। तस्करों ने भी यही से सेटिंग कर अपना काम कर लिया। सीमावर्ती क्षेत्र में अक्सर बरामदगी भी होती रहती है।
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लखनऊ से आई जांच टीम की ओर से बताया गया की खाद विक्रेताओं ने एक या दो बोरी खाद लेने के लिए पहुंचे किसानों से पॉश मशीन पर अंगूठा लगवाने के बाद उनके नाम पर 15 से 20 बोरी खाद की खरीद दर्ज कर दी गई है, जबकि काश्तकारों को इसकी जानकारी ही नहीं है। इस खेल में खाद विक्रेताओं की भूमिका संदिग्ध लग रही है। कृषि निदेशालय की टीम भौतिक सत्यापन और बयान दर्ज करने के लिए काश्तकारों के घर पहुंची तो जांच में भी कुछ ऐसे ही तथ्य सामने आए। कृषि निदेशालय की टीम क्षेत्र के श्यामकाट निवासी काश्तकार अनिरुद्ध के घर पहुंची। जब यहां टीम ने काश्तकार से 33 बोरी खाद की खरीद करने का कारण पूछा तो वह अवाक रह गया। उसने बताया कि इस बार वह खरीद तो दूर खाद की दुकान का मुंह देखने तक भी नहीं गया है। इसी तरह विशाल गुप्ता निवासी भगवानपुर ने बताया कि चार एकड़ खेत के लिए उन्होंने मात्र छह बोरी खाद खरीदी है। जबकि उनके नाम पर 21 बोरी खाद की खरीद का आंकड़ा दिखाया गया है। प्रहलाद और प्रभुनाथ ने बताया कि उन्होंने मात्र पांच-पांच बोरी खाद खरीदी है। जबकि निदेशालय के अधिकारियों को इनके द्वारा 20-20 बोरी खाद की खरीद होना बताया। काश्तकार दिनेश प्रजापति के के घर जब टीम पहुंची तो उनसे 20 बोरी खाद खरीदने का कारण पूछा गया तो काश्तकार का जवाब भी चौंकाने वाला रहा। उसने बताया कि वह खाद की खरीद के लिए गया तो जरूर था लेकिन अंगूठा न लगने की बात कहकर उन्हें खाली हाथ ही लौटा दिया था।
नौतनवा एसडीएम नवीन प्रसाद का कहना है कि जांच के दौरान इक्का-दुक्का काश्तकारों के साथ ऐसी समस्या आने की जानकारी मिली है। फिलहाल मामले की गहनता से जांच चल रही है। दोष सिद्ध होने के बाद चाहे वह काश्तकार हो या खाद विक्रेता किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई होनी तय है।
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प्रति हेक्टयेर में दो क्विंटल 60 किलो यूरिया की जरूरत
कृषि विज्ञान केंद्र वसूली के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसपी यादव ने बताया कि धान की फसल में गलेथा बनने से पहले तीन चरणों में प्रति हेक्टेयर यानी ढाई एकड़ में दो क्विंटल 60 किलो यूरिया का प्रयोग किया जाता है। धान की रोपाई के समय 50 फीसदी एक क्विंटल 30 किलो यूरिया डाला जाता है। जबकि 25 से 30 दिनों के बीच में 65 किलो यूरिया का प्रयोग किया जाता है। वहीं 45 से 50 दिनों के बीच में 65 किलो यूरिया खाद का प्रयोग किया जाता है।
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अधिक उर्वरक लेने के मामले में राजस्व विभाग कर रहा जांच
निचलौल तहसील क्षेत्र में यूरिया खाद की बड़े पैमाने पर खरीदारी करने वाले 42 किसानों को प्रशासन की ओर से चिह्नित किया गया था। इन किसानों के रकवा की जांच राजस्व विभाग की ओर से चल रही है। जो शनिवार को पूरी हो जाएगी। निचलौल एसडीएम नंद प्रकाश मौर्या ने बताया कि भारत सरकार के आईएफएमएस पोर्टल के अनुसार, क्षेत्र के 42 किसानों ने पॉश मशीन में अंगूठा लगाकर 25 से 50 बोरी तक यूरिया खाद की खरीदारी की थी। इसे लेकर विभागीय जांच के लिए निर्देश मिले है। ऐसे में इन 42 किसानों के रकबा की जांच लेखपाल की ओर से की जा रही है।

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जिले की सभी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है। वास्तविक किसानों को जरूरी प्रपत्रों के आधार पर नियम के मुताबिक खाद उपलब्ध कराई जा रही है। व्यवस्था में व्यवधान करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे। बेवजह कतार में खड़े होकर भीड़ लगाने वाले भी चिह्नित किए जा रहे हैं। जांच में जो भी पकड़ा जाएगा उसपर कार्रवाई होगी।
सुनील कुमार गुप्ता, सहायक निबंधक सहकारिता
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