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हिंदू धर्म भारत को एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य करता हैं : प्रो. बैद्यनाथ मिश्र
Wed, 20 Mar 2024 07:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 20 Mar 2024 07:56 PM IST
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फरेंदा। लाल बहादुर शास्त्री स्मारक पीजी कॉलेज आनंदनगर में मंगलवार को भारतीय भाषा समिति शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली के अनुदानित भारत की एकता और एकात्मकता में जगद्गुरु श्री शंकराचार्य का योगदान विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रबंधक डॉ. बलराम भट्ट, मुख्य अतिथि जय प्रकाश विश्वविद्यालय छपरा के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. बैद्य नाथ मिश्र, विशिष्ट अतिथि रामजी सहाय पीजी.कॉलेज रुद्रपुर, देवरिया के प्राचार्य प्रो. बृजेश कुमार पांडेय ने किया।
मुख्य अतिथि ने कहा हिंदू धर्म में मठों की परंपरा लाने का श्रेय आदिगुरु शंकराचार्य को जाता हैं। उन्होंने चारों दिशाओं में चार मठों क्रमशः शृंगेरी, पुरी, द्वारिका एवं बद्रीनाथ में स्थापित किया। इसका उद्देश्य भारत को एकता की सूत्र में पिरोना था। देवरिया के प्राचार्य प्रो. बृजेश कुमार पांडेय ने कहा कि वैदिक कालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति है। मोक्ष ज्ञान प्राप्त करने पर मिलता हैं, ज्ञान प्राप्ति के लिए हमें वेद, उपनिषद, गीता एवं प्राचीन साहित्य का ज्ञान प्राप्त करना अनिवार्य हैं। इसलिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परम्परा से जुड़ने की बात कही है। यदि हम अपने जड़ो से जुड़ेंगे, तभी हम अपनी संस्कृति को जानेंगे।
प्रबंधक डॉ. बलराम भट्ट ने कहा कि इस व्याख्यान से विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने में सहायक होगा। कार्यक्रम में प्राचार्य श्रीराम पांडेय, प्रो. किरन सिंह, डाॅ. प्रीति यादव, डाॅ. अनिल मिश्र, डाॅ. मनोज कुमार, डाॅ. बाल गोविंद मौर्य, डाॅ. चंद्र प्रकाश, डाॅ. जितेंद्र प्रसाद ने भारतीय संस्कृति के विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किए। इस दौरान फैजान अशरफ, डाॅ. उमाशंकर शुक्ल, डाॅ. महीप पांडेय, डाॅ. वैभव मणि त्रिपाठी मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि ने कहा हिंदू धर्म में मठों की परंपरा लाने का श्रेय आदिगुरु शंकराचार्य को जाता हैं। उन्होंने चारों दिशाओं में चार मठों क्रमशः शृंगेरी, पुरी, द्वारिका एवं बद्रीनाथ में स्थापित किया। इसका उद्देश्य भारत को एकता की सूत्र में पिरोना था। देवरिया के प्राचार्य प्रो. बृजेश कुमार पांडेय ने कहा कि वैदिक कालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति है। मोक्ष ज्ञान प्राप्त करने पर मिलता हैं, ज्ञान प्राप्ति के लिए हमें वेद, उपनिषद, गीता एवं प्राचीन साहित्य का ज्ञान प्राप्त करना अनिवार्य हैं। इसलिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परम्परा से जुड़ने की बात कही है। यदि हम अपने जड़ो से जुड़ेंगे, तभी हम अपनी संस्कृति को जानेंगे।
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प्रबंधक डॉ. बलराम भट्ट ने कहा कि इस व्याख्यान से विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने में सहायक होगा। कार्यक्रम में प्राचार्य श्रीराम पांडेय, प्रो. किरन सिंह, डाॅ. प्रीति यादव, डाॅ. अनिल मिश्र, डाॅ. मनोज कुमार, डाॅ. बाल गोविंद मौर्य, डाॅ. चंद्र प्रकाश, डाॅ. जितेंद्र प्रसाद ने भारतीय संस्कृति के विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किए। इस दौरान फैजान अशरफ, डाॅ. उमाशंकर शुक्ल, डाॅ. महीप पांडेय, डाॅ. वैभव मणि त्रिपाठी मौजूद रहे।
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