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Maharajganj News: हाईवे निर्माण तेज.. दुकानों को व्यवस्थित करने में दुश्वारियां
Thu, 20 Jun 2024 04:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 20 Jun 2024 04:42 AM IST
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निचलौल से महाराजगंज मार्ग के चौड़ीकरण में आया मकान और घर।
महराजगंज। शहर से लेकर ठूठीबारी नेपाल बाॅर्डर तक हाईवे के निर्माण में तेजी आ रही है। सड़क के दायरे में करीब 300 दुकानें होंगी। कारोबारी दुकानों को शहर में शिफ्ट करने में जुटे हैं। कुछ कारोबारी तो बहुत पहले ही दुकान दूसरी जगह शिफ्ट कर लिए हैं। इन दिनों हालत यह है कि शहर में सड़क के किनारे दुकानें नहीं मिल रहीं हैं। अगर कोई दुकान खाली भी है तो उसकी पगड़ी अधिक मांगी जा रही है।
सक्सेना चौक से लेकर मऊपाकड़ तक दुकानों में कुछ ऐसे हैं जिनकी पूरी दुकान ही सड़क के दायरे में आ गई है, इससे उनकी दूसरी जगह दुकान लेने में समस्या हो रही है। कारोबारी कहते हैं कि दुकान की पगड़ी अधिक लग रही है। बुधवार को शहर में चिऊरहा रोड पर राहुल जायसवाल मिले। उन्होंने बताया कि दुकान की तलाश में हूं। एक दुकान मिली भी है तो उसकी पगड़ी करीब चार लाख रुपये मांगी जा रही है। समस्या है कि पहले तो दुकान टूट रही है। कामकाज प्रभावित होगी। दुकान शिफ्ट करने में खर्चे होंगे, इसके बाद पकड़ी भी देनी होगी। कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि आगे का कारोबार कैसे चलेगा।
इनसे बातचीत के दौरान ही अभिषेक मिले। उन्होंने बताया कि फरेंदा रोड पर पहले दो लाख पगड़ी देने पर दुकानें मिल जाती थीं, लेकिन अब दोगुने से ज्यादा हो गया है। पहले तो ठीक जगह पर दुकानें नहीं मिल रही हैं। अगर कहीं हैं भी तो रेट ज्यादा लग रहा है। गोरखपुर रोड पर तो दुकानें कहीं नहीं खाली हैं। फरेंदा रोड और चिऊरहा रोड ही कारोबारियों के लिए विकल्प है। शहर में इसी तरह से प्रत्येक दिन कारोबारी भ्रमण कर जानकारी ले रहे हैं।
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सक्सेना चौक से लेकर मऊपाकड़ तक दुकानों में कुछ ऐसे हैं जिनकी पूरी दुकान ही सड़क के दायरे में आ गई है, इससे उनकी दूसरी जगह दुकान लेने में समस्या हो रही है। कारोबारी कहते हैं कि दुकान की पगड़ी अधिक लग रही है। बुधवार को शहर में चिऊरहा रोड पर राहुल जायसवाल मिले। उन्होंने बताया कि दुकान की तलाश में हूं। एक दुकान मिली भी है तो उसकी पगड़ी करीब चार लाख रुपये मांगी जा रही है। समस्या है कि पहले तो दुकान टूट रही है। कामकाज प्रभावित होगी। दुकान शिफ्ट करने में खर्चे होंगे, इसके बाद पकड़ी भी देनी होगी। कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि आगे का कारोबार कैसे चलेगा।
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इनसे बातचीत के दौरान ही अभिषेक मिले। उन्होंने बताया कि फरेंदा रोड पर पहले दो लाख पगड़ी देने पर दुकानें मिल जाती थीं, लेकिन अब दोगुने से ज्यादा हो गया है। पहले तो ठीक जगह पर दुकानें नहीं मिल रही हैं। अगर कहीं हैं भी तो रेट ज्यादा लग रहा है। गोरखपुर रोड पर तो दुकानें कहीं नहीं खाली हैं। फरेंदा रोड और चिऊरहा रोड ही कारोबारियों के लिए विकल्प है। शहर में इसी तरह से प्रत्येक दिन कारोबारी भ्रमण कर जानकारी ले रहे हैं।
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