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Maharajganj News: पुलिस ने कार्रवाई की होती तो शायद बच जाती रुक्मिणी की जान
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रुक्मिणी की सूचना पर पहुंची डॉयल 112 की पुलिस ने नहीं की कोई कार्रवाई
ग्रामीणों का आरोप- पुलिस ने कार्रवाई की होती तो शायद नहीं होती यह दुर्घटना
परतावल। कुड़वा उर्फ मुड़कटिया गांव में रुक्मिणी की हत्या से कुछ घंटे पहले दो युवकों से उसका विवाद के बाद गाली-गलौज हुआ था। ग्रामीणों का दावा है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब रुक्मिणी की हत्या के बाद डायल 112 की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक बृहस्पतिवार रात करीब नौ बजे गांव के दो युवक शराब के नशे में रुक्मिणी के घर पहुंचे और गाली-गलौज करने लगे। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया। माहौल तनावपूर्ण होने पर रुक्मिणी ने डायल 112 पर फोन कर पुलिस को बुलाया।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन दोनों पक्षों को समझाकर शुक्रवार सुबह थाने आने की बात कहकर लौट गई। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि उसी समय आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती या उन्हें हिरासत में लिया जाता तो शायद यह वारदात नहीं होती।
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पुलिस के लौटने के कुछ घंटों बाद देर रात रुक्मिणी की खाट पर सोते समय धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा है। मृतका के चार मासूम बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया है, जबकि परिवार का एकमात्र सहारा भी छिन गया। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ने शुरुआती शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।
सीओ सदर अंकुर गौतम ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला हत्या का है। शराब के नशे में आपसी विवाद के कारण ऐसी घटना हुई है। पीआरवी 112 पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा बुझाकर थाने पर आने को कहा था। मामले की गहनता से जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के अनुसार अग्रिम विधिक कार्रवाई की जाएगी।
पिता मंदबुद्धि, अब मां की भी मौत
श्यामदेउरवां थाना क्षेत्र के कुड़वा उर्फ मुड़कटिया टोला लगंड़ी में हुई रुक्मिणी की हत्या ने परिवार ही नहीं आसपास के ग्रामीणों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है। रुक्मिणी के चारों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। रुक्मिणी ही परिवार का एकमात्र सहारा थी। परिवार के सामने जीवनयापन की चुनौती खड़ी हो गई है। रुक्मिणी अपने पीछे चार बच्चों को छोड़ गई हैं। सबसे बड़ा बेटा गुलशन (19), बेटी आरती (17), रागिनी (15) और सबसे छोटा बेटा गुलज़ार (13) अब बेसहारा हो गए हैं।
मां के निधन के बाद चारों बच्चे गहरे सदमे में हैं और उनका रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में जो भी इस परिवार की स्थिति देख रहा है, उसकी आंखें नम हो जा रही हैं। परिवार की स्थिति इसलिए भी अधिक चिंताजनक है, क्योंकि बच्चों के पिता मंदबुद्धि हैं और किसी प्रकार का काम करने में सक्षम नहीं हैं। घर की पूरी जिम्मेदारी अब तक रुक्मिणी ही संभाल रही थी। अब बच्चों की पढ़ाई, भोजन और अन्य जरूरी जरूरतों के साथ-साथ पिता के इलाज को लेकर भी गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
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ग्रामीणों का आरोप- पुलिस ने कार्रवाई की होती तो शायद नहीं होती यह दुर्घटना
परतावल। कुड़वा उर्फ मुड़कटिया गांव में रुक्मिणी की हत्या से कुछ घंटे पहले दो युवकों से उसका विवाद के बाद गाली-गलौज हुआ था। ग्रामीणों का दावा है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब रुक्मिणी की हत्या के बाद डायल 112 की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक बृहस्पतिवार रात करीब नौ बजे गांव के दो युवक शराब के नशे में रुक्मिणी के घर पहुंचे और गाली-गलौज करने लगे। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया। माहौल तनावपूर्ण होने पर रुक्मिणी ने डायल 112 पर फोन कर पुलिस को बुलाया।
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सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन दोनों पक्षों को समझाकर शुक्रवार सुबह थाने आने की बात कहकर लौट गई। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि उसी समय आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती या उन्हें हिरासत में लिया जाता तो शायद यह वारदात नहीं होती।
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पुलिस के लौटने के कुछ घंटों बाद देर रात रुक्मिणी की खाट पर सोते समय धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा है। मृतका के चार मासूम बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया है, जबकि परिवार का एकमात्र सहारा भी छिन गया। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ने शुरुआती शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।
सीओ सदर अंकुर गौतम ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला हत्या का है। शराब के नशे में आपसी विवाद के कारण ऐसी घटना हुई है। पीआरवी 112 पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा बुझाकर थाने पर आने को कहा था। मामले की गहनता से जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के अनुसार अग्रिम विधिक कार्रवाई की जाएगी।
पिता मंदबुद्धि, अब मां की भी मौत
श्यामदेउरवां थाना क्षेत्र के कुड़वा उर्फ मुड़कटिया टोला लगंड़ी में हुई रुक्मिणी की हत्या ने परिवार ही नहीं आसपास के ग्रामीणों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है। रुक्मिणी के चारों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। रुक्मिणी ही परिवार का एकमात्र सहारा थी। परिवार के सामने जीवनयापन की चुनौती खड़ी हो गई है। रुक्मिणी अपने पीछे चार बच्चों को छोड़ गई हैं। सबसे बड़ा बेटा गुलशन (19), बेटी आरती (17), रागिनी (15) और सबसे छोटा बेटा गुलज़ार (13) अब बेसहारा हो गए हैं।
मां के निधन के बाद चारों बच्चे गहरे सदमे में हैं और उनका रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में जो भी इस परिवार की स्थिति देख रहा है, उसकी आंखें नम हो जा रही हैं। परिवार की स्थिति इसलिए भी अधिक चिंताजनक है, क्योंकि बच्चों के पिता मंदबुद्धि हैं और किसी प्रकार का काम करने में सक्षम नहीं हैं। घर की पूरी जिम्मेदारी अब तक रुक्मिणी ही संभाल रही थी। अब बच्चों की पढ़ाई, भोजन और अन्य जरूरी जरूरतों के साथ-साथ पिता के इलाज को लेकर भी गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।