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Maharajganj News: दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मिलेगा अनुदान
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महराजगंज। दुकान निर्माण व संचालन ऋण योजना के तहत 10 दिव्यांगों को जल्द ही अनुदान मिलेगा। योजना के माध्यम से दिव्यांगजन अपनी दुकान शुरू कर परिवार का भरण-पोषण बेहतर तरीके से कर सकेंगे।
जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए योजना के तहत जनपद को 18 लाभार्थियों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। अब तक 10 दिव्यांगों ने उत्तर प्रदेश सरकार के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया है। विभाग ने आवेदनों को स्वीकार कर दुकान निर्माण और संचालन के लिए ऋण एवं अनुदान स्वीकृति के लिए शासन को भेज दिया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शीघ्र ही इन आवेदनों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
योजना के तहत प्रत्येक पात्र दिव्यांग को दुकान निर्माण के लिए 20,000 रुपये का ऋण दिया जाता है। 15,000 रुपये 4 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर पर ऋण के रूप में दिए जाते हैं और शेष 5,000 रुपये अनुदान के रूप में दिए जाते हैं। दुकान संचालन के लिए अलग से 10,000 रुपये का ऋण दिया जाता है।
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इसमें 7,500 रुपये 4 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज पर और 2,500 रुपये अनुदान के रूप में दिए जाते हैं। इस प्रकार, 30,000 रुपये की सहायता में 7,500 रुपये अनुदान और 22,500 रुपये ऋण के रूप में दिए जाते हैं। आवेदक की दिव्यांगता 40 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए।
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जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए योजना के तहत जनपद को 18 लाभार्थियों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। अब तक 10 दिव्यांगों ने उत्तर प्रदेश सरकार के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया है। विभाग ने आवेदनों को स्वीकार कर दुकान निर्माण और संचालन के लिए ऋण एवं अनुदान स्वीकृति के लिए शासन को भेज दिया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शीघ्र ही इन आवेदनों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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योजना के तहत प्रत्येक पात्र दिव्यांग को दुकान निर्माण के लिए 20,000 रुपये का ऋण दिया जाता है। 15,000 रुपये 4 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर पर ऋण के रूप में दिए जाते हैं और शेष 5,000 रुपये अनुदान के रूप में दिए जाते हैं। दुकान संचालन के लिए अलग से 10,000 रुपये का ऋण दिया जाता है।
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इसमें 7,500 रुपये 4 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज पर और 2,500 रुपये अनुदान के रूप में दिए जाते हैं। इस प्रकार, 30,000 रुपये की सहायता में 7,500 रुपये अनुदान और 22,500 रुपये ऋण के रूप में दिए जाते हैं। आवेदक की दिव्यांगता 40 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए।