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Maharajganj News: चंदे से पूरा हुआ दुबई का सफर, जीता खिताब
Mon, 07 Jul 2025 12:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 07 Jul 2025 12:26 AM IST
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महराजगंज। प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती है। इसके आगे सभी समस्याएं बौनी हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही पनेवा-पनेई निवासी अशोक के साथ हुआ। आर्थिक मजबूरी भी उनका रास्ता नहीं रोक सकी और उन्होंने चंदा लेकर दुबई में आयोजित पैरा ओलंपिक में प्रतिभाग किया।
400 मीटर पैरा ओलंपिक की अंतरराष्ट्रीय दौड़ उन्होंने दिव्यांगता के बाद भी सिर्फ 70 सेकेंड में पूरी कर सबसे तेज दिव्यांग धावक बने। दुबई में 21 मार्च 2025 की अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा जीतकर उन्होंने अपना और अपने जिले का नाम रोशन किया।
इस समय वह पैर में आए हेयर फ्रैक्चर के कारण अपने गांव पनेवा बेडरेस्ट पर हैं। अशोक के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में जाने के लिए उन्हें करीब 2.70 लाख रुपये खर्च करने पड़े। पहले लगा कि मैं इतनी बड़ी रकम नहीं जुटा पाउंगा, लेकिन मेरे दोस्तों व कोच के अलावा गांव के लोगों ने भी मदद की। चंदा एकत्र कर उन्होंने 400 मीटर दिव्यांग दौड़ प्रतियोगिता में जीत दर्ज की।
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21 वर्षीय अशोक के पिता दयानंद छोटे किसान हैं जो मजदूरी भी करते हैं। अशोक ने बताया कि उन्हें तेज दौड़ने का शौक बचपन से है। सात वर्ष की उम्र में उनका एक हाथ चारा मशीन की चपेट में आने से कट गया, लेकिन उन्होंने कभी इस दिव्यांगता को दौड़ पर हावी नहीं होने दिया। परिवार की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह बड़े स्तर तक पहुंचते, लेकिन उन्हें कोच का साथ मिला तो यूपी की तरफ से 2025 के पैरा ओलंपिक का राष्ट्रीय खिताब जीता। मौजूदा समय में उनकी उम्र 21 वर्ष है और वह बागापार से प्राइवेट स्नातक की पढ़ाई कर रहे। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता जीतने के बाद एसएआई (साई) जो खेल मंत्रालय का स्वायत्त निकाय है उसके सहयोग से गुजरात रहकर अपने हुनर को और धार देने में जुटे हैं।
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400 मीटर पैरा ओलंपिक की अंतरराष्ट्रीय दौड़ उन्होंने दिव्यांगता के बाद भी सिर्फ 70 सेकेंड में पूरी कर सबसे तेज दिव्यांग धावक बने। दुबई में 21 मार्च 2025 की अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा जीतकर उन्होंने अपना और अपने जिले का नाम रोशन किया।
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इस समय वह पैर में आए हेयर फ्रैक्चर के कारण अपने गांव पनेवा बेडरेस्ट पर हैं। अशोक के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में जाने के लिए उन्हें करीब 2.70 लाख रुपये खर्च करने पड़े। पहले लगा कि मैं इतनी बड़ी रकम नहीं जुटा पाउंगा, लेकिन मेरे दोस्तों व कोच के अलावा गांव के लोगों ने भी मदद की। चंदा एकत्र कर उन्होंने 400 मीटर दिव्यांग दौड़ प्रतियोगिता में जीत दर्ज की।
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21 वर्षीय अशोक के पिता दयानंद छोटे किसान हैं जो मजदूरी भी करते हैं। अशोक ने बताया कि उन्हें तेज दौड़ने का शौक बचपन से है। सात वर्ष की उम्र में उनका एक हाथ चारा मशीन की चपेट में आने से कट गया, लेकिन उन्होंने कभी इस दिव्यांगता को दौड़ पर हावी नहीं होने दिया। परिवार की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह बड़े स्तर तक पहुंचते, लेकिन उन्हें कोच का साथ मिला तो यूपी की तरफ से 2025 के पैरा ओलंपिक का राष्ट्रीय खिताब जीता। मौजूदा समय में उनकी उम्र 21 वर्ष है और वह बागापार से प्राइवेट स्नातक की पढ़ाई कर रहे। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता जीतने के बाद एसएआई (साई) जो खेल मंत्रालय का स्वायत्त निकाय है उसके सहयोग से गुजरात रहकर अपने हुनर को और धार देने में जुटे हैं।