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जिला अस्पताल : होती रही कार्रवाई दलालों की घुसपैठ पर नहीं लगी लगाम

Wed, 02 Jul 2025 01:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Wed, 02 Jul 2025 01:11 AM IST
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District Hospital: Action continues but infiltration of brokers is not curbed
महराजगंज। जिला अस्पताल में दलालों को पकड़े जाने की यह कोई नई बात नहीं है। पहले भी समय-समय पर दलाल पकड़े जाते रहे, लेकिन उनकी गतिविधि कम होने के बजाय बढ़ती गई।
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कभी मरीजों को निजी अस्पताल ले जाने का मामला गर्म रहा तो कभी निजी लैब में खून जांच कराने को लेकर शिकायत हुई। इधर कार्रवाई होने से दलाल सहमे हुए हैं। मंगलवार को डॉक्टरों के कक्ष में कोई नजर नहीं आया।
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जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ लगी रही। बीते दिन प्रशासन की कार्रवाई का असर दिखा। डॉक्टरों के कक्ष में सिर्फ मरीज ही दिखे। पर्चा लेकर मरीज ही दवा वितरण काउंटर तक गए। उनकी पर्ची लेकर बाहर जाने वाला कोई नहीं था। उपरी तल पर सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी सीसीटीवी से प्रत्येक हलचल पर नजर रखे हुए थे। दोपहर में कतार में खड़े मरीजों को थोड़ी परेशानी हुई तो उन्होंने तुंरत एक कर्मी को भेजकर कतार ठीक कराया।
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अस्पताल में सभी अनुभागों को क्रमश करीब चार घंटे तक उन्होंने निगरानी करते हुए व्यवस्था में सुधार का प्रयास किया। अस्पताल में सर्जिकल वार्ड में आने पर ज्ञांति देवी मिली। उन्होंने बताया कि दो दिन से बेटा अस्पताल में भर्ती है। इलाज करने समय समय पर डॉक्टर आ रहे हैं।
अस्पताल के आस पास दवा की दुकानों पर भी बाहरी युवक नहीं दिखे। कार्रवाई का असर यह रहा की दिनभर सभी सहमे रहे। अस्पताल परिसर में कोई बाहरी युवक नहीं आया। अस्पताल के गेट पर दो चार लोग चर्चा कर रहे थे की पता नहीं कब छापा पड़ा जाएगा, कोई ठीकाना नहीं है। अस्पताल में कार्रवाई की बात कोई नई नहीं है। ऐसे अक्सर होता रहता है। 20 जनवरी 2025 की बात करें तो महुअवा महुई का विजय दलालों के जाल में फंस गया था। इलाज कराने में उसकी जेब खाली हो गई थी। उस वक्त उसने नाराज होकर ट्रामा सेंटर पर हंगामा किया था।
सरकारी अस्पताल में इलाज करके टांका लगाने के लिए निजी अस्पताल में भेज दिया गया था। वहां 14000 रुपये का बिल बना था। विजय ने बताया कि पिता श्रीराम (65) का इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचा था तो ट्रॉमा सेंटर में 3500 रुपये का तीन इंजेक्शन बाहर से खरीदकर मंगाया गया था। इस मामले में हंगामा करने के बाद भी कोई खास कार्रवाई नहीं हुई थी।
सूत्र बतातें हैं कि एंबुलेंस चालकों से भी सेटिंग कर मरीजों के बारे में दलाल जानकारी एकत्र करते हैं। शहर में तमाम निजी अस्पताल में मरीज ऐसे ही नेटवर्क के जरिए भर्ती कराए जाते हैं। मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद दलाल के हिस्से वाली रकम उसे दी जाती है। हर दलाल का अलग अलग काम तय रहता है। दलाल मरीजों को फंसाकर निजी अस्पताल पहुंचा रहे हैं।
फिलहाल मौजूदा समय में मरीजों को जांच और दवा के नाम पर कुछ अधिक शिकार बना रहे हैं। दवा की दलाली करने वाला केवल दवा का काम करता है। ब्लड की जांच कराने वाला वहीं काम करेगा, जबकि एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड के लिए बरगलाकर निजी केंद्र पर भेजने वाला अपना काम करेगा।

वहीं, खून में कमीशन लेने वाला अगल है। हिस्से में ईमानदारी इस प्रकार से है कि जिसका जितना कमीशन होता है तय समय पर केस और पर्चे के हिसाब से पहुंचा देते हैं।
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