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Maharajganj News: जिले के आखिरी छोर तक पहुंचना मुश्किल
Sat, 24 May 2025 01:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 24 May 2025 01:10 AM IST
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महराजगंज। जनपद की स्थापना को 36 वर्ष बीत हो चुके हैं। बावजूद इसके जिला मुख्यालय से जनपद के आखिरी छोर तक पहुंचना मुश्किल है।
जनपद के धानी और बृजमनगंज ब्लाक के बाद सिद्धार्थनगर जिले की सीमा शुरू होती है, लेकिन मुख्यालय से दोनों ब्लाॅकों के लिए रोडवेज बस सेवा नहीं है।
इसी प्रकार घुघली और सिसवां ब्लाॅक के लिए भी रोडवेज जनपद मुख्यालय से नहीं है। चार महत्वपूर्ण विकास खंडों का दर्जा होने के बाद भी परिवहन सेवाओं की किल्लत के बीच लोग प्राइवेट वाहनों से सफर करने पर मजबूर हैं जिन्हें एक से दो स्थान पर बदलना पड़ता है तब गंतव्य तक लोग पहुंचते हैं।
जनपद की स्थापना 1989 में हुई तो उम्मीद थी कि विकास को पंख लगेंगे। कुछ कार्य तो विकास को साबित करने वाले तो जरूर हुए, लेकिन मुख्यालय से आने- जाने की व्यवस्था बेहतर नहीं बन पाई है।
मुख्यालय पर प्रशासनिक कार्य व कोर्ट के कार्य से आने की जरूरत लगभग हर क्षेत्र से लोगों को पड़ती है, लेकिन आवागमन सुविधा का लाभ न होने के कारण परेशानी झेलनी पड़ती है।
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देर रात तक लौटते है लोग : मोबाइल कारोबार भरत नाथ चौरसिया, दिव्य प्रकाश, अजीत पांडेय, डा. बिपिन चौधरी ने बताया कि मुख्यालय से धानी या बृजमनगंज जाने के लिए फरेंदा पहुंचकर प्राइवेट साधन खोजना पड़ता है।
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जनपद के धानी और बृजमनगंज ब्लाक के बाद सिद्धार्थनगर जिले की सीमा शुरू होती है, लेकिन मुख्यालय से दोनों ब्लाॅकों के लिए रोडवेज बस सेवा नहीं है।
इसी प्रकार घुघली और सिसवां ब्लाॅक के लिए भी रोडवेज जनपद मुख्यालय से नहीं है। चार महत्वपूर्ण विकास खंडों का दर्जा होने के बाद भी परिवहन सेवाओं की किल्लत के बीच लोग प्राइवेट वाहनों से सफर करने पर मजबूर हैं जिन्हें एक से दो स्थान पर बदलना पड़ता है तब गंतव्य तक लोग पहुंचते हैं।
जनपद की स्थापना 1989 में हुई तो उम्मीद थी कि विकास को पंख लगेंगे। कुछ कार्य तो विकास को साबित करने वाले तो जरूर हुए, लेकिन मुख्यालय से आने- जाने की व्यवस्था बेहतर नहीं बन पाई है।
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मुख्यालय पर प्रशासनिक कार्य व कोर्ट के कार्य से आने की जरूरत लगभग हर क्षेत्र से लोगों को पड़ती है, लेकिन आवागमन सुविधा का लाभ न होने के कारण परेशानी झेलनी पड़ती है।
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देर रात तक लौटते है लोग : मोबाइल कारोबार भरत नाथ चौरसिया, दिव्य प्रकाश, अजीत पांडेय, डा. बिपिन चौधरी ने बताया कि मुख्यालय से धानी या बृजमनगंज जाने के लिए फरेंदा पहुंचकर प्राइवेट साधन खोजना पड़ता है।