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महेशपुर महेदियां गांव में दिखी अतिथि देवो भव: की झलक
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‘बुद्धम् शरणम् गच्छामि’ के उद्घोष से गूंज उठा देवदह
लक्ष्मीपुर (महराजगंज)। महाराष्ट्र के नागपुर के 24 भिक्षुओं के दल ने शनिवार को गौतम बुद्ध के ननिहाल देवदह के प्राचीन टीले का दर्शन किया। वहीं, दल के सदस्यों ने श्रद्धाभाव से इस ऐतिहासिक टीले पर पहुंच कर पूजा -अर्चना की। ‘बुद्धम शरणम गच्छामि’ के उद्घोष से पूरा देवदह गूंज उठा।
दीक्षा भूमि नागपुर से देश के बौद्ध स्थलों के भ्रमण पर निकले बौद्ध भिक्षुणियों की टीम में 24 महिलाएं शामिल हैं, जिसमें सुनीति, विजय मैत्रिय, संघ मित्रा, सुप्रवासा, धम्मपमित्रा, निम्मल मेंत्ता, धम्य मित्रा, सुप्रवासा, विशाखा, आम्रपाली, महामाया, नागधाममिनी, सुकेसनी, धम्म नन्दा, विजिता, प्रजापति, धन्यशिला आदि बौद्ध भिक्षुणी शामिल हैं। धार्मिक यात्रा के इस दल का नेतृत्व कर रहीं भिक्षुणी सुनीति व विजय मैत्रिय ने बताया कि भगवान बुद्ध की इस पावन घरती देवदह का वह सब पूजा करती हैं।
उन्होंने कहा कि बौद्ध स्थलों में सबसे पवित्र स्थलों में गौतम बुद्ध का ननिहाल देवदह गिना जाता है। भिक्षुणी संघ के दल ने माता महामाया, माता प्रजापति गौतमी, माता यशोधरा के जन्म स्थान देवदह में विधि विधान से पूजा, वन्दना व धम्म देसना किया। उसके बाद प्राचीन राजमहल के अवशेष, सगरा, प्राचीन टीले, कुएं आदि को नजदीक से देखा और यहां की मिट्टी को सिर पर लगाया। इस अवसर पर देवदह बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव, पप्रह्लाद, लक्ष्मीचन्द्र पटेल, विजय बहादुर, अमर नाथ चौधरी, दिलीप, प्रयाग, शिवराज, घनश्याम, काशीनाथ आदि ने नागपुर से आए बौद्ध भिक्षुणियों का भव्य स्वागत किया।
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महेशपुर महेदियां गांव में दिखी ‘अतिथि देवो भव’ की झलक
महराजगंज। जनपद में लक्ष्मीपुर क्षेत्र में जंलग के किनारे महेशपुर महेदिया गांव में शनिवार को ‘अतिथि देवो भव’ की झलक देखने को मिली। गांव के लोगों ने बौद्ध भिक्षुओं का उत्साह के स्वागत करने के साथ ही उनको अटूट श्रद्धा भाव से भोजन कराया। सामाजिक ताने-बाने को मजबुती प्रदान करने वाला भाव गांव के लोगों में दिखा।
लक्ष्मीपुर क्षेत्र में जंगल किनारे स्थित ग्राम पंचायत महेशपुर महेदिया के ग्रामीणों ने शनिवार को दरिया दिली दिखाया। गांव की महिलाओं व ग्रामीणों ने नागपुर से आए बौद्ध भिक्षुणियों के लिए अपने -अपने घर भोजन बनाया जिसे एक जगह इक ट्ठा कर सामूहिक रूप से भोजन दान दिया गया। ग्रामीणों ने ‘अतिथि देवो भव’ की भारतीय परंपरा को दिखाते हुए हर बौद्ध भिक्षुणियों को भोजन कराया गया। ग्रामीणों द्वारा मिले सम्मान अभिभूत हुई भिक्षुणी सुनीति, विजय मैत्रिय, संघ मित्रा, सुप्रवासा धम्मपमित्रा आदि ने कहा कि वह यहां पाए सम्मान और प्रेम को जीवन भर नहीं भूल पाएंगी। नागपुर से निकले हुए करीब तीन सप्ताह हो गए, गांव के लोगों का स्नेह एवं सेवा भाव यादगार रहेगा।
ग्रामीण विजय बहादुर, अमित, बबन्नर, सुनील, मात्रिक यादव, पिंटू, काशीनाथ, दिलीप, पराग, घनश्याम मौर्य आदि ने बताया कि अथितियों का सत्कार हमारी परंपरा है। इसके आगे बढ़ाते हुए पूरे मनोयोग से बौद्ध भिक्षुओं का स्वागत किया गया है। यह बेहद सौभाग्य की बात है कि बौद्ध भिक्षुओं की सेवा करने का अवसर मिला। गांव के लोगों ने मिलकर स्वागत करने के साथ ही बौद्ध भिक्षुओं को बेहद आत्मीयता के साथ भोजन कराया।
नागपुर से आए बौद्ध भिक्षुणियों ने देवदह टीले का भी भ्रमण किया। विधि विधान से पूजा किए। यहां की स्थिति के बारे में जानकारी ली। सबसे खास बात रही की गांव के लोगों ने अटूट श्रद्धा के साथ बौद्ध भिक्षुओं का स्वागत करने के साथ ही भोजन कराया। गांव के लोगों ने ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा की मजबूती प्रदान की।
-जितेंद्र राव, अध्यक्ष, देवदह बौद्ध विकास समिति
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लक्ष्मीपुर (महराजगंज)। महाराष्ट्र के नागपुर के 24 भिक्षुओं के दल ने शनिवार को गौतम बुद्ध के ननिहाल देवदह के प्राचीन टीले का दर्शन किया। वहीं, दल के सदस्यों ने श्रद्धाभाव से इस ऐतिहासिक टीले पर पहुंच कर पूजा -अर्चना की। ‘बुद्धम शरणम गच्छामि’ के उद्घोष से पूरा देवदह गूंज उठा।
दीक्षा भूमि नागपुर से देश के बौद्ध स्थलों के भ्रमण पर निकले बौद्ध भिक्षुणियों की टीम में 24 महिलाएं शामिल हैं, जिसमें सुनीति, विजय मैत्रिय, संघ मित्रा, सुप्रवासा, धम्मपमित्रा, निम्मल मेंत्ता, धम्य मित्रा, सुप्रवासा, विशाखा, आम्रपाली, महामाया, नागधाममिनी, सुकेसनी, धम्म नन्दा, विजिता, प्रजापति, धन्यशिला आदि बौद्ध भिक्षुणी शामिल हैं। धार्मिक यात्रा के इस दल का नेतृत्व कर रहीं भिक्षुणी सुनीति व विजय मैत्रिय ने बताया कि भगवान बुद्ध की इस पावन घरती देवदह का वह सब पूजा करती हैं।
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उन्होंने कहा कि बौद्ध स्थलों में सबसे पवित्र स्थलों में गौतम बुद्ध का ननिहाल देवदह गिना जाता है। भिक्षुणी संघ के दल ने माता महामाया, माता प्रजापति गौतमी, माता यशोधरा के जन्म स्थान देवदह में विधि विधान से पूजा, वन्दना व धम्म देसना किया। उसके बाद प्राचीन राजमहल के अवशेष, सगरा, प्राचीन टीले, कुएं आदि को नजदीक से देखा और यहां की मिट्टी को सिर पर लगाया। इस अवसर पर देवदह बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव, पप्रह्लाद, लक्ष्मीचन्द्र पटेल, विजय बहादुर, अमर नाथ चौधरी, दिलीप, प्रयाग, शिवराज, घनश्याम, काशीनाथ आदि ने नागपुर से आए बौद्ध भिक्षुणियों का भव्य स्वागत किया।
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महेशपुर महेदियां गांव में दिखी ‘अतिथि देवो भव’ की झलक
महराजगंज। जनपद में लक्ष्मीपुर क्षेत्र में जंलग के किनारे महेशपुर महेदिया गांव में शनिवार को ‘अतिथि देवो भव’ की झलक देखने को मिली। गांव के लोगों ने बौद्ध भिक्षुओं का उत्साह के स्वागत करने के साथ ही उनको अटूट श्रद्धा भाव से भोजन कराया। सामाजिक ताने-बाने को मजबुती प्रदान करने वाला भाव गांव के लोगों में दिखा।
लक्ष्मीपुर क्षेत्र में जंगल किनारे स्थित ग्राम पंचायत महेशपुर महेदिया के ग्रामीणों ने शनिवार को दरिया दिली दिखाया। गांव की महिलाओं व ग्रामीणों ने नागपुर से आए बौद्ध भिक्षुणियों के लिए अपने -अपने घर भोजन बनाया जिसे एक जगह इक ट्ठा कर सामूहिक रूप से भोजन दान दिया गया। ग्रामीणों ने ‘अतिथि देवो भव’ की भारतीय परंपरा को दिखाते हुए हर बौद्ध भिक्षुणियों को भोजन कराया गया। ग्रामीणों द्वारा मिले सम्मान अभिभूत हुई भिक्षुणी सुनीति, विजय मैत्रिय, संघ मित्रा, सुप्रवासा धम्मपमित्रा आदि ने कहा कि वह यहां पाए सम्मान और प्रेम को जीवन भर नहीं भूल पाएंगी। नागपुर से निकले हुए करीब तीन सप्ताह हो गए, गांव के लोगों का स्नेह एवं सेवा भाव यादगार रहेगा।
ग्रामीण विजय बहादुर, अमित, बबन्नर, सुनील, मात्रिक यादव, पिंटू, काशीनाथ, दिलीप, पराग, घनश्याम मौर्य आदि ने बताया कि अथितियों का सत्कार हमारी परंपरा है। इसके आगे बढ़ाते हुए पूरे मनोयोग से बौद्ध भिक्षुओं का स्वागत किया गया है। यह बेहद सौभाग्य की बात है कि बौद्ध भिक्षुओं की सेवा करने का अवसर मिला। गांव के लोगों ने मिलकर स्वागत करने के साथ ही बौद्ध भिक्षुओं को बेहद आत्मीयता के साथ भोजन कराया।
नागपुर से आए बौद्ध भिक्षुणियों ने देवदह टीले का भी भ्रमण किया। विधि विधान से पूजा किए। यहां की स्थिति के बारे में जानकारी ली। सबसे खास बात रही की गांव के लोगों ने अटूट श्रद्धा के साथ बौद्ध भिक्षुओं का स्वागत करने के साथ ही भोजन कराया। गांव के लोगों ने ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा की मजबूती प्रदान की।
-जितेंद्र राव, अध्यक्ष, देवदह बौद्ध विकास समिति