{"_id":"686439bde1b0dc349f0fb660","slug":"delay-in-compensation-for-marked-houses-has-stalled-the-workresidents-are-also-in-trouble-maharajganj-news-c-206-1-sgkp1021-153406-2025-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: चिह्नित मकानों के मुआवजे में देरी से अटका काम...बाशिंदे भी मुश्किल में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: चिह्नित मकानों के मुआवजे में देरी से अटका काम...बाशिंदे भी मुश्किल में
Wed, 02 Jul 2025 01:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 02 Jul 2025 01:10 AM IST
विज्ञापन
महराजगंज। प्रस्तावित रेलवे ट्रैक के दायरे में आने वाली जमीनों का मुआवजा 516 गांवों में 340 करोड़ रुपया बांटा गया है। घुघली से लेकर महुआ तक 102 मकान चिह्नित किए गए हैं।
अभी तक इन मकानों का अवार्ड नहीं बन सका है। इससे मुआवजा वितरण में देरी हो रही है। वहीं दूसरी ओर त्रिमुहानी पर पुल का निर्माण भी ठप है। जानकारी के मुताबिक, रेलवे मंत्रालय की ओर से जिले के घुघली से लेकर आनंदनगर के बीच 52.70 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाने की योजना प्रस्तावित है। इस परियोजना के तहत कुल 57 गांवों की लगभग 194 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है। इसके पहले चरण में सदर तहसील क्षेत्र के 29 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
रेलवे ट्रैक के विस्तार में जिन मकानों का आंशिक या पूरा ढांचा प्रभावित हो रहा है, ऐसे 102 मकानों का सर्वे विभाग की ओर से पहले ही किया जा चुका है। बावजूद इसके भूमि अध्याप्ति विभाग अब तक इन मकानों के लिए अवार्ड घोषित नहीं कर सका है।
विज्ञापन
मकान स्वामियों को न तो मुआवजा मिल पा रहा है और न ही वे अपने घर को खाली कर पा रहे हैं। इससे न सिर्फ प्रभावितों में असंतोष है, बल्कि रेलवे परियोजना की प्रगति भी धीमी हो गई है।
रेलवे मंत्रालय ने भूमि अधिग्रहण के एवज में 516 करोड़ रुपये भूमि अध्याप्ति विभाग को हस्तांतरित कर दिए हैं। इस राशि में से अब तक 340 करोड़ रुपये किसानों को मुआवजा स्वरूप वितरित किए जा चुके हैं। बाकी बचे मुआवजे की प्रक्रिया विभागीय स्तर पर चल रही है। हालांकि, जिन किसानों के मकान रेलवे लाइन के दायरे में आ रहे हैं, उन्हें अब तक एक भी पैसा नहीं मिल पाया है। घुघली क्षेत्र के मकान स्वामी रामनाथ का कहना है कि उनका मकान रेलवे ट्रैक के बीच में आ रहा है। रेलवे विभाग और भूमि अध्याप्ति विभाग के कर्मचारी पैमाइश करके चले गए। बताया गया की जल्द मुआवजा मिलेगा, लेकिन छह माह बीत गए पता नहीं है। अब मकान तोड़ भी नहीं सकते और निर्माण भी नहीं कर सकते। करीब 900 किसानों के खेतों में लगे पेड़ भी इस दायरे में आ रहे हैं। इन पेड़ों के मूल्यांकन के लिए आवश्यक पत्रावली वन विभाग को भेज दी गई है।
वन विभाग की स्वीकृति के बाद ही इन पेड़ों की कटाई और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। उधर, रोहिन नदी के त्रिमुहानी घाट पर रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का कार्य भी प्रभावित हुआ है। वर्तमान में दो फाउंडेशन पर काम चल रहा था, जो अब 35 फीट तक ऊंचा हो चुका है, लेकिन पिछले कुछ दिनों की बारिश के कारण निर्माण कार्य ठप पड़ा है। इंजीनियरों का कहना है कि मानसून थमने के बाद कार्य शुरू होगा।
ग्रामीण बृजेश, सुरेंद्र, विजय, आलोक का कहना है कि रेलवे लाइन की इस पूरी प्रक्रिया को देखकर साफ है कि जिले की महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजना सिर्फ विभागीय सुस्ती के कारण पिछड़ रही है। कैलाश अग्निहोत्री का पूरा मकान लगभग 10 डिस्मिल में बना है। रामनयन मौर्य का तीन डिस्मिल में बना है। अजय वर्मा का 5 डिस्मिल में मकान बना है। इसके अलावा अन्य लोगों का मकान रेलवे के दायरे में आ रहा है।
विज्ञापन
अभी तक इन मकानों का अवार्ड नहीं बन सका है। इससे मुआवजा वितरण में देरी हो रही है। वहीं दूसरी ओर त्रिमुहानी पर पुल का निर्माण भी ठप है। जानकारी के मुताबिक, रेलवे मंत्रालय की ओर से जिले के घुघली से लेकर आनंदनगर के बीच 52.70 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाने की योजना प्रस्तावित है। इस परियोजना के तहत कुल 57 गांवों की लगभग 194 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है। इसके पहले चरण में सदर तहसील क्षेत्र के 29 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
विज्ञापन
रेलवे ट्रैक के विस्तार में जिन मकानों का आंशिक या पूरा ढांचा प्रभावित हो रहा है, ऐसे 102 मकानों का सर्वे विभाग की ओर से पहले ही किया जा चुका है। बावजूद इसके भूमि अध्याप्ति विभाग अब तक इन मकानों के लिए अवार्ड घोषित नहीं कर सका है।
विज्ञापन
मकान स्वामियों को न तो मुआवजा मिल पा रहा है और न ही वे अपने घर को खाली कर पा रहे हैं। इससे न सिर्फ प्रभावितों में असंतोष है, बल्कि रेलवे परियोजना की प्रगति भी धीमी हो गई है।
रेलवे मंत्रालय ने भूमि अधिग्रहण के एवज में 516 करोड़ रुपये भूमि अध्याप्ति विभाग को हस्तांतरित कर दिए हैं। इस राशि में से अब तक 340 करोड़ रुपये किसानों को मुआवजा स्वरूप वितरित किए जा चुके हैं। बाकी बचे मुआवजे की प्रक्रिया विभागीय स्तर पर चल रही है। हालांकि, जिन किसानों के मकान रेलवे लाइन के दायरे में आ रहे हैं, उन्हें अब तक एक भी पैसा नहीं मिल पाया है। घुघली क्षेत्र के मकान स्वामी रामनाथ का कहना है कि उनका मकान रेलवे ट्रैक के बीच में आ रहा है। रेलवे विभाग और भूमि अध्याप्ति विभाग के कर्मचारी पैमाइश करके चले गए। बताया गया की जल्द मुआवजा मिलेगा, लेकिन छह माह बीत गए पता नहीं है। अब मकान तोड़ भी नहीं सकते और निर्माण भी नहीं कर सकते। करीब 900 किसानों के खेतों में लगे पेड़ भी इस दायरे में आ रहे हैं। इन पेड़ों के मूल्यांकन के लिए आवश्यक पत्रावली वन विभाग को भेज दी गई है।
वन विभाग की स्वीकृति के बाद ही इन पेड़ों की कटाई और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। उधर, रोहिन नदी के त्रिमुहानी घाट पर रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का कार्य भी प्रभावित हुआ है। वर्तमान में दो फाउंडेशन पर काम चल रहा था, जो अब 35 फीट तक ऊंचा हो चुका है, लेकिन पिछले कुछ दिनों की बारिश के कारण निर्माण कार्य ठप पड़ा है। इंजीनियरों का कहना है कि मानसून थमने के बाद कार्य शुरू होगा।
ग्रामीण बृजेश, सुरेंद्र, विजय, आलोक का कहना है कि रेलवे लाइन की इस पूरी प्रक्रिया को देखकर साफ है कि जिले की महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजना सिर्फ विभागीय सुस्ती के कारण पिछड़ रही है। कैलाश अग्निहोत्री का पूरा मकान लगभग 10 डिस्मिल में बना है। रामनयन मौर्य का तीन डिस्मिल में बना है। अजय वर्मा का 5 डिस्मिल में मकान बना है। इसके अलावा अन्य लोगों का मकान रेलवे के दायरे में आ रहा है।