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Maharajganj News: इंदौर से गांव आया शव, परिजनों ने दाह संस्कार से किया इन्कार
Mon, 29 Apr 2024 04:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 29 Apr 2024 04:48 AM IST
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महराजगंज। श्यामदेउरवां थाना क्षेत्र के महुआ महुई निवासी संग्राम सिंह 42 का शनिवार को सुबह हृदय गति रुकने से मौत हो गई। वह मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में पत्नी व बच्चों के साथ रहते थे। रविवार को दोपहर उनका शव गांव आया तो परिजनों ने दाह संस्कार करने से इन्कार कर दिया। सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार देश दीपक त्रिपाठी, थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार सिंह दल बल के साथ गांव में पहुंचे और घंटों मशक्कत के बाद शव का अंतिम संस्कार कराया गया।
जानकारी के अनुसार, श्यामदेउरवां थाना क्षेत्र के महुआ महुई निवासी संग्राम सिंह ने 20 वर्ष पूर्व अपने ही गांव की रहने वाली एक युवती के साथ प्रेम विवाह किया था। उसके बाद से ही वह बाहर रहने लगा। घर वालों से कोई वास्ता नहीं रह गया था। वर्तमान में वह मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के एक लिमिटेड कंपनी में काम कर रहे थे। शनिवार की सुबह लगभग सात बजे वह ड्यूटी पर जाने के लिए घर से निकले।
रास्ते में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। लोगों ने उसे एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। रविवार को पत्नी गुड्डी शव लेकर गांव पहुंची। संग्राम के पिता अमरेन्द्र सिंह ने शव का अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि 20 वर्षों से हमसे कोई वास्ता नहीं है। इसके बाद गांव में हंगामा होने लगा। जानकारी मिलने पर नायब तहसीलदार देश दीपक त्रिपाठी, थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार सिंह दल बल के साथ गांव में पहुंचे और हंगामा शांत कराया। घंटों मशक्कत के बाद पत्नी दाह संस्कार के लिए तैयार हुई। मृतक के बेटे राज ने मुखाग्नि दी।
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तीन बेटी व एक बेटा के सर से उठ गया पिता का साया
महराजगंज। महुआ महुई निवासी संग्राम सिंह की तीन बेटियां शीतल 18, काजल 16, राधा 14 व एक बेटा राज 12 है। चारों बच्चे अपने माता-पिता के साथ रहकर ही पढ़ाई लिखाई करते थे। पिता की मौत से उनके उपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहें हैं। उधर जब उनके दादा ने उन्हें अपनाने से इन्कार कर दिया तो वह और भी बिलखने लगे। मां गुड्डी ने बताया कि अनुसूचित जाति की होने के कारण मेरे पति के घर वाले हम लोगों को अपनाने से इन्कार कर रहे हैं। पिछले 20 सालों से हम लोग बाहर रहकर ही अपना जीवन यापन कर रहे थे। हमें नहीं पता था कि अचानक ऐसा हो जाएगा। अब हम लोगों की देखभाल कौन करेगा। इतना कहते ही वह फुट फुटकर रोने लगी।
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जानकारी के अनुसार, श्यामदेउरवां थाना क्षेत्र के महुआ महुई निवासी संग्राम सिंह ने 20 वर्ष पूर्व अपने ही गांव की रहने वाली एक युवती के साथ प्रेम विवाह किया था। उसके बाद से ही वह बाहर रहने लगा। घर वालों से कोई वास्ता नहीं रह गया था। वर्तमान में वह मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के एक लिमिटेड कंपनी में काम कर रहे थे। शनिवार की सुबह लगभग सात बजे वह ड्यूटी पर जाने के लिए घर से निकले।
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रास्ते में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। लोगों ने उसे एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। रविवार को पत्नी गुड्डी शव लेकर गांव पहुंची। संग्राम के पिता अमरेन्द्र सिंह ने शव का अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि 20 वर्षों से हमसे कोई वास्ता नहीं है। इसके बाद गांव में हंगामा होने लगा। जानकारी मिलने पर नायब तहसीलदार देश दीपक त्रिपाठी, थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार सिंह दल बल के साथ गांव में पहुंचे और हंगामा शांत कराया। घंटों मशक्कत के बाद पत्नी दाह संस्कार के लिए तैयार हुई। मृतक के बेटे राज ने मुखाग्नि दी।
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तीन बेटी व एक बेटा के सर से उठ गया पिता का साया
महराजगंज। महुआ महुई निवासी संग्राम सिंह की तीन बेटियां शीतल 18, काजल 16, राधा 14 व एक बेटा राज 12 है। चारों बच्चे अपने माता-पिता के साथ रहकर ही पढ़ाई लिखाई करते थे। पिता की मौत से उनके उपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहें हैं। उधर जब उनके दादा ने उन्हें अपनाने से इन्कार कर दिया तो वह और भी बिलखने लगे। मां गुड्डी ने बताया कि अनुसूचित जाति की होने के कारण मेरे पति के घर वाले हम लोगों को अपनाने से इन्कार कर रहे हैं। पिछले 20 सालों से हम लोग बाहर रहकर ही अपना जीवन यापन कर रहे थे। हमें नहीं पता था कि अचानक ऐसा हो जाएगा। अब हम लोगों की देखभाल कौन करेगा। इतना कहते ही वह फुट फुटकर रोने लगी।