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Maharajganj News: मारपीट की घटना में न्यायालय ने चार दोषी करार दिए
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25 साल पुराना था मारपीट का मामला, दो साल तक सद्भाव बनाकर रहने का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट असगर अली प्रथम मारपीट के मामले में अभियुक्त राजेंद्र, परशुराम, काशी व रंगी यादव निवासी हरखपुरा, टोला हरतोड़हिया, थाना घुघली को दोषी करार दिया है। अभियुक्तों को दो साल बाद सद्भाव बनाए रखने का आदेश दिया है। जमीनी रंजिश को लेकर 25 वर्ष पहले मारपीट हुई थी, इसमें उक्त लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। रामराज वर्मा ने थाना घुघली में केस दर्ज कर कराया था।
रिपोर्ट के अनुसार, 27 फरवरी 1997 को राजाराम वर्मा अपनी जमीन में पिता बुद्ध एवं भाई रामानंद के साथ मिलकर दीवार का निर्माण कर रहे थे। शाम करीब 05.00 बजे उनके गांव के ही राजेंद्र, परशुराम, काशी व रंगी यादव लाठी-डंडों से लैस होकर दीवार तोड़कर मारपीट की। सहायक अभियोजन अधिकारी अनूप कुमार सिंह ने बताया कि न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अभियुक्तों को दोषी पाया। इस मामले में अभियुक्त वर्तमान में वृद्ध एवं बीमार होने, उनके छोटे-छोटे बच्चे होने एवं घर पर देखभाल करने वाला कोई नहीं होने, यह प्रथम अपराध होने के आधार पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सुधरने के लिए अवसर प्रदान करते हुए दो वर्ष के सदाचरण की परिवीक्षा का आदेश दिया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट असगर अली प्रथम मारपीट के मामले में अभियुक्त राजेंद्र, परशुराम, काशी व रंगी यादव निवासी हरखपुरा, टोला हरतोड़हिया, थाना घुघली को दोषी करार दिया है। अभियुक्तों को दो साल बाद सद्भाव बनाए रखने का आदेश दिया है। जमीनी रंजिश को लेकर 25 वर्ष पहले मारपीट हुई थी, इसमें उक्त लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। रामराज वर्मा ने थाना घुघली में केस दर्ज कर कराया था।
रिपोर्ट के अनुसार, 27 फरवरी 1997 को राजाराम वर्मा अपनी जमीन में पिता बुद्ध एवं भाई रामानंद के साथ मिलकर दीवार का निर्माण कर रहे थे। शाम करीब 05.00 बजे उनके गांव के ही राजेंद्र, परशुराम, काशी व रंगी यादव लाठी-डंडों से लैस होकर दीवार तोड़कर मारपीट की। सहायक अभियोजन अधिकारी अनूप कुमार सिंह ने बताया कि न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अभियुक्तों को दोषी पाया। इस मामले में अभियुक्त वर्तमान में वृद्ध एवं बीमार होने, उनके छोटे-छोटे बच्चे होने एवं घर पर देखभाल करने वाला कोई नहीं होने, यह प्रथम अपराध होने के आधार पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सुधरने के लिए अवसर प्रदान करते हुए दो वर्ष के सदाचरण की परिवीक्षा का आदेश दिया गया।
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