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Maharajganj News: जिला अस्पताल का हाल...मरीज घर से ला रहे कंबल, बरामदे में ईसीजी जांच
Fri, 27 Dec 2024 12:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 27 Dec 2024 12:49 AM IST
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जिला अस्पताल के बरामदे में हो रहा मरीज का ईसीजी।
महराजगंज। जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। यहां ठंड में मरीजों की सुविधा का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। स्ट्रेचर पर मरीज को ईसीजी के लिए लाया गया था, यहां उसे किनारे बरामदे में छोड़ दिया गया था।
वहीं बेड पर चादर नहीं दिखी। मरीजों के अनुसार घर से कंबल लेकर आए हैं। यहां किसी तरह से इलाज करा रहे हैं। संक्रामक रोग वार्ड भी भरा हुआ है। वहीं नवजात शिशु देखभाल इकाई में क्षमता से कम बच्चे मिले। सीनियर सिटीजन वार्ड में बदबू से तीमारदार परेशान रहे। ट्रामा सेंटर में व्हीलचेयर कोने में पड़ी हुई थी।
बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल परिसर में ट्रामा सेंटर में व्यवस्था बदहाल दिखी। यहां स्ट्रेचर एक किनारे पड़ी हुई थी। वहीं व्हीलचेयर भी खराब हालत में कोने में दिखी। अंदर कुछ बेड पर चादर भी नहीं दिखी। यहां मिलने तीमारदार नरेंद्र ने बताया कि ठंड से बचाव का इंतजाम नहीं है। घर से कंबल लेकर आना पड़ता है। संक्रामक रोग वार्ड में 16 बेड पर 19 मरीज भर्ती मिले। वहीं 10 बेड पर काम चल रहा था।
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यहां 10 बेड वाले वार्ड में जरूरी कार्यो को कराया जा रहा था। पीआईसीयू के लिए करीब चार लाख रुपये मिले हैं। इसमें बिजली से संबंधित काम कराए जा रहे हैं। नवजात शिशु देखभाल इकाई में 32 बेड पर 25 बच्चे भर्ती मिले। यहां इन दिनों में कम बच्चे भर्ती हो रहे हैं। बीते माह तो क्षमता से अधिक बच्चे भर्ती हुए थे। सीनियर सिटीजन वार्ड में बदबू से तीमारदार परेशान रहे। यहां मिले रमेंद्र यादव ने बताया कि सफाई के बाद भी दुर्गंध आ रही है।
यहीं की व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। यहां आठ बेड है। इस पर पांच मरीज भर्ती हैं। अस्पताल परिसर में ईसीजी कक्ष के बाहर एक मरीज स्ट्रेचर पर लेटा हुआ मिला। घुघली क्षेत्र के अमौढ़ा गांव के नागेंद्र स्ट्रेचर पर लेटे हुए थे। उनकी पत्नी कौशल्या पास में खड़ी थी। ईसीजी होने का इंतजार कर रही थी। उन्होंने बताया कि यहां आए हुए करीब 20 मिनट हो चुके हैं। इसी तरह से अन्य स्थानों पर बदहाल व्यवस्था नजर आई। ओपीडी में डॉक्टरों के कक्ष के सामने मरीज कतार में खड़े रहे। भीड़ के कारण मरीजों को परामर्श लेने में करीब घंटे भर का वक्त गुजर गया।
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वहीं बेड पर चादर नहीं दिखी। मरीजों के अनुसार घर से कंबल लेकर आए हैं। यहां किसी तरह से इलाज करा रहे हैं। संक्रामक रोग वार्ड भी भरा हुआ है। वहीं नवजात शिशु देखभाल इकाई में क्षमता से कम बच्चे मिले। सीनियर सिटीजन वार्ड में बदबू से तीमारदार परेशान रहे। ट्रामा सेंटर में व्हीलचेयर कोने में पड़ी हुई थी।
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बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल परिसर में ट्रामा सेंटर में व्यवस्था बदहाल दिखी। यहां स्ट्रेचर एक किनारे पड़ी हुई थी। वहीं व्हीलचेयर भी खराब हालत में कोने में दिखी। अंदर कुछ बेड पर चादर भी नहीं दिखी। यहां मिलने तीमारदार नरेंद्र ने बताया कि ठंड से बचाव का इंतजाम नहीं है। घर से कंबल लेकर आना पड़ता है। संक्रामक रोग वार्ड में 16 बेड पर 19 मरीज भर्ती मिले। वहीं 10 बेड पर काम चल रहा था।
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यहां 10 बेड वाले वार्ड में जरूरी कार्यो को कराया जा रहा था। पीआईसीयू के लिए करीब चार लाख रुपये मिले हैं। इसमें बिजली से संबंधित काम कराए जा रहे हैं। नवजात शिशु देखभाल इकाई में 32 बेड पर 25 बच्चे भर्ती मिले। यहां इन दिनों में कम बच्चे भर्ती हो रहे हैं। बीते माह तो क्षमता से अधिक बच्चे भर्ती हुए थे। सीनियर सिटीजन वार्ड में बदबू से तीमारदार परेशान रहे। यहां मिले रमेंद्र यादव ने बताया कि सफाई के बाद भी दुर्गंध आ रही है।
यहीं की व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। यहां आठ बेड है। इस पर पांच मरीज भर्ती हैं। अस्पताल परिसर में ईसीजी कक्ष के बाहर एक मरीज स्ट्रेचर पर लेटा हुआ मिला। घुघली क्षेत्र के अमौढ़ा गांव के नागेंद्र स्ट्रेचर पर लेटे हुए थे। उनकी पत्नी कौशल्या पास में खड़ी थी। ईसीजी होने का इंतजार कर रही थी। उन्होंने बताया कि यहां आए हुए करीब 20 मिनट हो चुके हैं। इसी तरह से अन्य स्थानों पर बदहाल व्यवस्था नजर आई। ओपीडी में डॉक्टरों के कक्ष के सामने मरीज कतार में खड़े रहे। भीड़ के कारण मरीजों को परामर्श लेने में करीब घंटे भर का वक्त गुजर गया।