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Maharajganj News: साफ पानी... स्वच्छता की उम्मीद बेमानी
Fri, 27 Sep 2024 08:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 27 Sep 2024 08:45 PM IST
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महराजगंज। शहर में शुद्ध जल का कारोबार लाखों में हो रहा है। एक बड़ा प्लांट लगा है, जिसमें पैकिंग होती है। इसके अलावा 20 से अधिक छोटे प्लांट ऐसे हैं, जहां जार से पानी बिक्री की जाती है। छोटे प्लांट में स्वच्छता का ख्याल नहीं रखा जा रहा। बीते दो साल में इन प्लांट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। नियम के अनुसार पानी पैक होने पर ही खाद्य सुरक्षा विभाग के अधीन आएगा, अगर ऐसा नहीं है तो वह विभाग के दायरे में नहीं आएगा।
शहर में बृहस्पतिवार को शुद्ध पानी बिक्री की पड़ताल की गई तो हकीकत सामने आ गई। सक्सेना चौक पर एक टेंपों मिला। उसपर पानी का बड़ा टैंक लदा था। पानी का गंदा जार रखा हुआ था। उसमें पानी नहीं था। पास से गुजर रहे नरेंद्र तिवारी ने बताया कि पानी बिक्री करने वाले प्लांटों की जांच जरूरी है। पानी बिक्री करने के दौरान स्वच्छता का ख्याल नहीं रखा जाता है। फरेंदा रोड पर एक प्लांट दिखा तो टंकी पर ही काई की मोटी परत दिखी। आसपास भी सफाई नहीं दिखी। दो टंकी रखी हुई थी। सामने टेंपो खड़ा था।
यहां से आगे बढ़ने पर कलक्ट्रेट मोड पर सर्विस लेन पर एक टेंपो दिखा। उस पर टंकी लदी थी। किनारे नाली पर दो टंकी रखी थी। अंदर गंदगी दिखा। सर्विस लेने से बाइक से आ रहे रमाशंकर रूक गए। उन्होंने कहा कि टंकी की सफाई भी नहीं की जाती है। रकम कमाने की लालच में पानी बिक्री करने वाले लोग स्वच्छता को दरकिनार कर देते हैं। जिम्मेदारों को यह देखने के लिए फुर्सत नहीं है। शहर में एक बड़ा प्लांट है। बीते दिनों शहर में कुछ स्थानों पर पानी का पाउच जब्त किया गया था।
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खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जगह जगह छापा डालकर जांच पड़ताल की। वहीं दूसरी ओर से शहर में लाखों के इस कारोबार पर स्वच्छता का मानक तार-तार हो रहा है। नियम कानून के पेच में कारोबारी अपना काम आसानी से कर रहे हैं, लेकिन स्वच्छ जल के नाम पर लोगों को अशुद्ध जल पिलाया जा रहा है। सड़क पर गाड़ी खड़ी कर टोटी से पानी जार में भरा जाता है। पानी भरने के दौरान सड़क से धूल उड़कर जार में चला जाता है। लोगों की माने तो टेंपो पर लदे टैंक की सफाई भी समय-समय पर नहीं होती है। लाखों के कारोबार में स्वच्छता के मानक को दरकिनार करने वालों पर जिम्मेदारों की नजर नहीं है।
शहर के एक बड़े प्लांट को छोड़कर अन्य का लाइसेंस नहीं
शहर में धड़ल्ले से खुले आरओ प्लांट का कोई लाइसेंस नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार पानी पैक होने के बाद ही प्लांट विभाग के अधीन आएगा। अगर खुला पानी जार में बिक रहा है तो विभाग के अधीन नहीं आएगा। बताया जाता है कि इन नियम के कारण लाइसेंस सिर्फ पैकिंग वाले प्लांट के पास है। वहीं नियम कानून के पेंच में कोई छोटे प्लांटों पर हाथ डालना नहीं चाहता है। सूत्रों की माने तो शहर में छोटे आरओ प्लांटों में स्वच्छता की जांच करने कोई नहीं जाता है। यह वजह है कि जैसे तैसे पानी निकालकर जार में भरकर घरों तक पहुंचा दिया जाता है।
शहर में करीब 20,000 लोग खरीदते हैं पानी
नगर पालिका के 25 मोहल्लों में 60000 की आबादी है। इसमें करीब 20,000 की आबादी जार वाला पानी खरीदती है। बताया जाता है कि एक जार पानी की कीमत 400 रुपये एक माह में लिया जाता है। वैसे 15 से 20 रुपये प्रति जार की दर से बिक्री की जाती है। इस तरह से एक अनुमान के अनुसार 80 लाख का कारोबार हो रहा है। इतने बड़े कारोबार पर किसी की नजर नहीं है।
मिठाई, पनीर समेत तीन नमूना जांच के लिए भेजा
महराजगंज। त्योहारों में शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी केके उपाध्याय के नेतृत्व में टीम ने जांच की। सिकड़ा चौराहा, फरेंदा मिठाई की दुकान से छेना व पेड़ा का नमूना संग्रहित कर जांच के लिए भेजा गया। पोखरभिंड़ा चौराहा, फरेंदा रोड पर स्थित स्वीट हाऊस का निरीक्षण कर पनीर का नमूना जांच के लिए भेजा गया। तीन नमूने जांच के लिए भेजे गए।
शहर में पैक वाटर की जांच की गई है। नियम के दायरे में आने वाले सभी खाद्य पदार्थों की जांच की जाती है। स्वच्छता को लेकर दुकानदारों को जागरूक किया जाता है।
-केके उपाध्याय, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
दूषित पानी पीने से पेट में इंफेक्शन, उल्टी, दस्त की समस्या होती है। पेयजल में मानक से बहुत ज्यादा बैक्टीरिया शरीर के लिए हानिकारक है। दूषित पानी कई बीमारियों का कारण है। इससे सबसे ज्यादा पेट संबंधित बीमारियां होती हैं। पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया से डायरिया होने का खतरा रहता है। डायरिया से पीड़ित मरीजों के शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
-डॉ. केपी सिंह, उप मुख्य चिकित्साधिकारी
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शहर में बृहस्पतिवार को शुद्ध पानी बिक्री की पड़ताल की गई तो हकीकत सामने आ गई। सक्सेना चौक पर एक टेंपों मिला। उसपर पानी का बड़ा टैंक लदा था। पानी का गंदा जार रखा हुआ था। उसमें पानी नहीं था। पास से गुजर रहे नरेंद्र तिवारी ने बताया कि पानी बिक्री करने वाले प्लांटों की जांच जरूरी है। पानी बिक्री करने के दौरान स्वच्छता का ख्याल नहीं रखा जाता है। फरेंदा रोड पर एक प्लांट दिखा तो टंकी पर ही काई की मोटी परत दिखी। आसपास भी सफाई नहीं दिखी। दो टंकी रखी हुई थी। सामने टेंपो खड़ा था।
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यहां से आगे बढ़ने पर कलक्ट्रेट मोड पर सर्विस लेन पर एक टेंपो दिखा। उस पर टंकी लदी थी। किनारे नाली पर दो टंकी रखी थी। अंदर गंदगी दिखा। सर्विस लेने से बाइक से आ रहे रमाशंकर रूक गए। उन्होंने कहा कि टंकी की सफाई भी नहीं की जाती है। रकम कमाने की लालच में पानी बिक्री करने वाले लोग स्वच्छता को दरकिनार कर देते हैं। जिम्मेदारों को यह देखने के लिए फुर्सत नहीं है। शहर में एक बड़ा प्लांट है। बीते दिनों शहर में कुछ स्थानों पर पानी का पाउच जब्त किया गया था।
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खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जगह जगह छापा डालकर जांच पड़ताल की। वहीं दूसरी ओर से शहर में लाखों के इस कारोबार पर स्वच्छता का मानक तार-तार हो रहा है। नियम कानून के पेच में कारोबारी अपना काम आसानी से कर रहे हैं, लेकिन स्वच्छ जल के नाम पर लोगों को अशुद्ध जल पिलाया जा रहा है। सड़क पर गाड़ी खड़ी कर टोटी से पानी जार में भरा जाता है। पानी भरने के दौरान सड़क से धूल उड़कर जार में चला जाता है। लोगों की माने तो टेंपो पर लदे टैंक की सफाई भी समय-समय पर नहीं होती है। लाखों के कारोबार में स्वच्छता के मानक को दरकिनार करने वालों पर जिम्मेदारों की नजर नहीं है।
शहर के एक बड़े प्लांट को छोड़कर अन्य का लाइसेंस नहीं
शहर में धड़ल्ले से खुले आरओ प्लांट का कोई लाइसेंस नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार पानी पैक होने के बाद ही प्लांट विभाग के अधीन आएगा। अगर खुला पानी जार में बिक रहा है तो विभाग के अधीन नहीं आएगा। बताया जाता है कि इन नियम के कारण लाइसेंस सिर्फ पैकिंग वाले प्लांट के पास है। वहीं नियम कानून के पेंच में कोई छोटे प्लांटों पर हाथ डालना नहीं चाहता है। सूत्रों की माने तो शहर में छोटे आरओ प्लांटों में स्वच्छता की जांच करने कोई नहीं जाता है। यह वजह है कि जैसे तैसे पानी निकालकर जार में भरकर घरों तक पहुंचा दिया जाता है।
शहर में करीब 20,000 लोग खरीदते हैं पानी
नगर पालिका के 25 मोहल्लों में 60000 की आबादी है। इसमें करीब 20,000 की आबादी जार वाला पानी खरीदती है। बताया जाता है कि एक जार पानी की कीमत 400 रुपये एक माह में लिया जाता है। वैसे 15 से 20 रुपये प्रति जार की दर से बिक्री की जाती है। इस तरह से एक अनुमान के अनुसार 80 लाख का कारोबार हो रहा है। इतने बड़े कारोबार पर किसी की नजर नहीं है।
मिठाई, पनीर समेत तीन नमूना जांच के लिए भेजा
महराजगंज। त्योहारों में शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी केके उपाध्याय के नेतृत्व में टीम ने जांच की। सिकड़ा चौराहा, फरेंदा मिठाई की दुकान से छेना व पेड़ा का नमूना संग्रहित कर जांच के लिए भेजा गया। पोखरभिंड़ा चौराहा, फरेंदा रोड पर स्थित स्वीट हाऊस का निरीक्षण कर पनीर का नमूना जांच के लिए भेजा गया। तीन नमूने जांच के लिए भेजे गए।
शहर में पैक वाटर की जांच की गई है। नियम के दायरे में आने वाले सभी खाद्य पदार्थों की जांच की जाती है। स्वच्छता को लेकर दुकानदारों को जागरूक किया जाता है।
-केके उपाध्याय, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
दूषित पानी पीने से पेट में इंफेक्शन, उल्टी, दस्त की समस्या होती है। पेयजल में मानक से बहुत ज्यादा बैक्टीरिया शरीर के लिए हानिकारक है। दूषित पानी कई बीमारियों का कारण है। इससे सबसे ज्यादा पेट संबंधित बीमारियां होती हैं। पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया से डायरिया होने का खतरा रहता है। डायरिया से पीड़ित मरीजों के शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
-डॉ. केपी सिंह, उप मुख्य चिकित्साधिकारी