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Maharajganj News: दावा शुद्ध का...गंदे जार और टंकी में खुलेआम बेच रहे हजारों लीटर पानी

Mon, 10 Feb 2025 12:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Mon, 10 Feb 2025 12:42 AM IST
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Claiming to be pure...Thousands of liters of water being sold openly in dirty jars and tanks
जार में पानी भरते कर्मचारी। 
महराजगंज। शहर में शुद्ध के नाम पर लोग अशुद्ध पानी पी रहे हैं। रोजाना हजारों के कारोबार में शुद्धता की गारंटी नहीं है। जिस जार में पानी की आपूर्ति होती है, उसकी सफाई भी कभी नहीं होती है।
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अशुद्ध पानी के सेवन से लोगों को पेट संबंधी बीमारियां होने लगी हैं। रविवार को शहर में अलग-अलग हिस्सों में भ्रमण करने पर शुद्ध पानी की बिक्री की पोल खुलकर सामने आ गई। पानी की आपूर्ति के दौरान सफाई का जरा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शहर में फरेंदा रोड पर बैंक से थोड़ी दूरी पर एक लोडर टेंपो रूका था। उस पर पानी का बड़ा सा टैंक रखा हुआ था। टैंक के बगल में गंदा टायर रखा हुआ था। दो जार भी रखे थे।
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ढक्कन खोलकर देखने पर गंदगी दिखी। पानी की बिक्री कर रहे कर्मी ने बताया कि सफाई का ध्यान रखा जाता है। गंदे जार के बारे में पूछने पर बोला की इसे साफ करने के लिए प्लांट पहुंचाया जा रहा है। आगे बढ़ने पर चौराहे पर जार में पानी भरा जा रहा था। पास में एक व्यक्ति थूकता दिखा। कैमरा क्लिक होते ही पानी भर रहे कर्मी ने जार से पानी गिरा दिया। चिऊरहा रोड पर एक प्लांट के पास नाली के बगल में दो टंकी रखी हुई थी। गंदे स्थान पर रखी हुई टंकी का उपयोग पानी भरने में किया जाता है। इसी तरह से शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाने पर शुद्ध पानी की आपूर्ति की हकीकत सामने आई। नगर पालिका के 25 मोहल्लों में 60000 की आबादी है।
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इसमें करीब 20,000 की आबादी जार वाला पानी खरीदती है। बताया जाता है कि एक जार पानी की कीमत 400 रुपये एक माह में लिया जाता है। वैसे 15 से 20 रुपये प्रति जार की दर से बिक्री की जाती है। इस तरह से एक अनुमान के अनुसार 80 लाख का कारोबार हर माह हो रहा है। इतने बड़े कारोबार पर किसी की नजर नहीं है।


खुले पानी की नहीं होती जांच
शहर में धड़ल्ले से खुले आरओ प्लांट का कोई लाइसेंस नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार पानी पैक होने के बाद ही प्लांट विभाग के अधीन आएगा। अगर खुला पानी जार में बिक रहा है तो विभाग के अधीन नहीं आएगा। बताया जाता है कि इन नियम के कारण लाइसेंस सिर्फ पैकिंग वाले प्लांट के पास है। वहीं नियम कानून के पेंच में कोई छोटे प्लांटों पर हाथ डालना नहीं चाहता है। सूत्रों की माने तो शहर में छोटे आरओ प्लांटों में स्वच्छता की जांच करने कोई नहीं जाता है। यह वजह है कि जैसे तैसे पानी निकालकर जार में भरकर घरों तक पहुंचा दिया जाता है।
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