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Maharajganj News: बीमार हो रहे बच्चे, जिला अस्पताल में 26 बेड पर 52
Tue, 28 May 2024 03:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 28 May 2024 03:29 AM IST
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महराजगंज। जिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई में बीमार बच्चों का दबाव बढ़ गई है। बेड से ज्यादा बच्चे भर्ती हैं। यह वार्ड 26 बेड का है, इसमें किसी तरह से 52 बच्चों को भर्ती कर इलाज कर किया जा रहा है। इस वार्ड में इन्फेक्शन, कमजोर बच्चे, समय से पहले जन्म ,पीलिया से पीड़ित बच्चों को भर्ती किया जाता है।
जिला अस्पताल के सिक एंड न्यू बर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं। एक बेड पर दो से तीन नवजातों का उपचार किया जा रहा है। इसमें ऐसे बच्चों को भर्ती किया जाता है, जिनका जन्म के समय वजन कम है, अथवा पीलिया या सांस फूलने की समस्या से ग्रसित हैं। वर्तमान में लगातार नवजात मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, जांडिस, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
इनमें कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिनों के लिए इसमें रखना पड़ता है। आए-दिन कम से कम आठ से दस नवजात इस तरह के आ रहे हैं। सोमवार को यहां 52 नवजात भर्ती मिले। एक बेड पर दो से तीन नवजातों को भर्ती कर इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। तीमारदारों का कहना है कि निजी अस्पतालों में यह सुविधा महंगी है। अस्पताल में इस सुविधा का कोई शुल्क नहीं है। थोड़ी परेशानी है तो क्या किया जाएगा। बच्चों का इलाज ठीक से हो रहा है। वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजन बरामदे में बैठे रहते हैं। गर्मी में उनको भी दुश्वारियां झेलनी पड़ती है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन मिश्रा ने बताया कि भर्ती बच्चों की जांच समय समय पर की जाती है। सभी को बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है।
अस्पताल में बेहतर सुविधा दी जा रही है। बेड बढ़वाने के लिए व्यवस्था की जाएगी। भर्ती बच्चों के इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम लगी है। डॉक्टरों की टीम शिफ्टवार बच्चों की निगरानी करती है।
डॉ. अर्जुन प्रसाद भार्गव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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जिला अस्पताल के सिक एंड न्यू बर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं। एक बेड पर दो से तीन नवजातों का उपचार किया जा रहा है। इसमें ऐसे बच्चों को भर्ती किया जाता है, जिनका जन्म के समय वजन कम है, अथवा पीलिया या सांस फूलने की समस्या से ग्रसित हैं। वर्तमान में लगातार नवजात मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, जांडिस, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
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इनमें कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिनों के लिए इसमें रखना पड़ता है। आए-दिन कम से कम आठ से दस नवजात इस तरह के आ रहे हैं। सोमवार को यहां 52 नवजात भर्ती मिले। एक बेड पर दो से तीन नवजातों को भर्ती कर इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। तीमारदारों का कहना है कि निजी अस्पतालों में यह सुविधा महंगी है। अस्पताल में इस सुविधा का कोई शुल्क नहीं है। थोड़ी परेशानी है तो क्या किया जाएगा। बच्चों का इलाज ठीक से हो रहा है। वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजन बरामदे में बैठे रहते हैं। गर्मी में उनको भी दुश्वारियां झेलनी पड़ती है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन मिश्रा ने बताया कि भर्ती बच्चों की जांच समय समय पर की जाती है। सभी को बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है।
अस्पताल में बेहतर सुविधा दी जा रही है। बेड बढ़वाने के लिए व्यवस्था की जाएगी। भर्ती बच्चों के इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम लगी है। डॉक्टरों की टीम शिफ्टवार बच्चों की निगरानी करती है।
डॉ. अर्जुन प्रसाद भार्गव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक