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Maharajganj News: नकली फेवीक्विक बेचने वाले चार दुकानदारों पर केस दर्ज
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शास्त्री नगर वार्ड में बिजली के तार की खरीदारी करते लोग।संवाद
- कंपनी के अधिकारी और पुलिस के संयुक्त छापे में हुआ खुलासा
- चार दुकानों 1408 नकली फेवीक्विक बरामद
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। दुकानों पर नकली फेवीक्विक खुलेआम बिक रहा था। इसकी जानकारी होने पर कंपनी के अधिकारियों और पुलिस की संयुक्त टीम ने धरमपुर व भिटौली बाजार में छापा मारा। चार दुकानों पर 1408 पीस नकली फेवीक्विक बरामद किया गया। कंपनी के अधिकारी की तहरीर पर चार दुकानदारों पर कॉपी राइट एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। बरामद माल को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है।
सीनियर मैनेजर मो. तौकीर ने बताया कि धरमपुर में स्थित में कुछ दुकान पर कंपनी के नाम से नकली फेवीक्विक बेचे जाने की जानकारी हुई। कंपनी की गुणवत्ता टीम के साथ पता किया तो धरमपुर व भिटौली बाजार के चार दुकानों पर इस बात की पुष्टि हुई। मो. तौकीर के मुताबिक इसकी सूचना सूचना पुलिस को दी गई। सूचना पर थाने की टीम व सेमिता लीगल की टीम दीपक किराना स्टोर पर पहुंची। वहां दुकान पर पचरूखिया का दीपक बैठा मिला । दुकान में फेवीक्विक के 549 पीस नकली बरामद हुआ। पांच पीस बतौर नमूना लिया गया। जितेंद्र जायसवाल किराना स्टोर पर जांच में 12 पीस नकली फेवीक्विक बरामद हुआ। राहुल जायसवाल के बुक सेंटर से 351 पीस नकली फेवीक्विक बरामद हुआ। प्रहलाद के किराना स्टोर पर 496 पीस नकली फेवीक्विक बरामद हुआ। भिटौली थानाध्यक्ष रामाज्ञा सिंह ने बताया कि आरोपी दुकानदार दीपक निवासी पचरूखिया, जितेन्द्र जायसवाल निवासी धरमपुर, राहुल जायसवाल निवासी किशुनपुर, प्रहलाद गुप्ता निवासी भिटौली बाजार के खिलाफ कॉपीराइट एक्ट व धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है।
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मुनाफे के लालच में बेच रहे नकली सामान
जालसाज ब्रांडेड कंपनियों के सामानों की हू-ब-हू उत्पाद आसानी से बाजार में उपलब्ध करा रहे है। नाम की स्पेलिंग में भी खेल किया जाता है। ताकि लोग नाम देखकर नकली उत्पाद खरीद लें। पैकिंग की भी डिजाइन भी एक जैसी होती है। इन उत्पादों के की लागत भी कम होती है। दुकानदार को माेटा मुनाफा मिलता है। वहीं ग्राहक को भी कम दाम में मिलता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि बाजार में सामान खरीदते समय संभलने की जरूरत है।
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टोल फ्री नंबर से जानकारी ले सकते हैं
ब्रांडेड कंपनियां अपने उत्पाद की पैकिंग पर कुछ फीचर्स जैसे बार कोड्स, सीरियल या मॉडल नंबर, ट्रेडमार्क और पेटेंट की जानकारी देती हैं। आमतौर पर नकली प्रोडक्ट्स के बॉक्स पर इस तरह की जानकारियां नहीं दी जाती हैं। आप यदि चाहें, तो इस बारे में ऑनलाइन या बॉक्स पर दिए गए टोल फ्री नंबर से जानकारी ले सकते हैं।
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लोगो देकर पहचान की जा सकती
नकली उत्पाद के स्पेलिंग के साथ कंपनी का लोगो, ब्रांड नेम और ट्रेडमार्क भी बदला होता है। उत्पाद को ध्यान से देखकर इन कमियों को आसानी से जाना जा सकता है।
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जालसाजों के निशाने पर होते हैं छोटे बाजार
ब्रांडेड कंपनियां अपने उत्पाद की पैकिंग पर काफी पैसा खर्च करती हैं। पहली नजर में यदि आपको पैकिंग खराब लगे, तो समझ जाएं कि उत्पाद नकली है। इन उत्पाद को जालसाज छोटे बाजारों में खपाते है सामान महंगे उत्पादों को हमेशा अधिकृत केंद्र से ही खरीदें, जैसे- इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लाइंसेज, गैजेट्स, ब्रांडेड कपड़े आदि। नकली उत्पाद बेचने वाली कंपनियां काफी चालाकी से काम करती हैं।
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फोटो
नकली प्रोडक्ट में असली उत्पाद के स्थान पर खराब वैकल्पिक चीजों का प्रयोग किया जाता है। इसमें प्रयोग होने वाली सामग्री खराब होते हैं। बड़े बाजारों के आसपास छोटी दुकानों पर अपने सामान रखवाते हैं। वहीं ग्रामीण व छोटे कस्बों के दुकानदारों को कम दाम में अधिक मुनाफे का लालच देकर सामान बेचने को मजबूर करते हैं।
-राघवेंद्र सिंह, प्रधानाचार्य, आईटीएम के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग
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फोटो
ज्यादातर कंपनियों की पैकिंग पर पूरा पता, ईमेल, फोन नंबर या कांटैक्ट डिटेल स्पष्ट लिखी होती है। कांटैक्ट डिटेल न देने का कारण यह होता है कि प्रोडक्ट में किसी तरह की कमी होने पर कोई उसकी शिकायत न कर सके। बिना कांटैक्ट डिटेल्स वाले किसी भी प्रोडक्ट को न खरीदें।
-अन्नूश्री श्रीवास्तव, सहायक आचार्य, इलेक्ट्रिकल विभाग, आईटीएम महाराजगंज
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फोटो
लोगों को नकली सामान नहीं खरीदना चाहिए। इलेक्ट्राॅनिक सामानों की खरीदारी करें तो दुकानदार से सामान की गारंटी या वारंटी के बारे में जरूर पूछें। विश्वसनीय दुकानों से ही खरीदारी करें।
- मनीष प्रजापति चौरसिया,
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फोटो
कंपनी के अधिकृत दुकानदार या डीलर से ही सामान खरीदना चाहिए। ऑनलाइन मंगाए गए समान अक्सर नकली या खराब मिलते हैं। सभी कंपनियां अपने उत्पाद पर बार कोड, स्केनर, हेल्प लाइन नंबर आदि जानकारी जरूरी देते हैं। कोई संदेह हो तो इनसे जानकारी ली जा सकती है।
- ओमप्रकाश, टीवी फ्रिज कारोबारी
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- चार दुकानों 1408 नकली फेवीक्विक बरामद
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। दुकानों पर नकली फेवीक्विक खुलेआम बिक रहा था। इसकी जानकारी होने पर कंपनी के अधिकारियों और पुलिस की संयुक्त टीम ने धरमपुर व भिटौली बाजार में छापा मारा। चार दुकानों पर 1408 पीस नकली फेवीक्विक बरामद किया गया। कंपनी के अधिकारी की तहरीर पर चार दुकानदारों पर कॉपी राइट एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। बरामद माल को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है।
सीनियर मैनेजर मो. तौकीर ने बताया कि धरमपुर में स्थित में कुछ दुकान पर कंपनी के नाम से नकली फेवीक्विक बेचे जाने की जानकारी हुई। कंपनी की गुणवत्ता टीम के साथ पता किया तो धरमपुर व भिटौली बाजार के चार दुकानों पर इस बात की पुष्टि हुई। मो. तौकीर के मुताबिक इसकी सूचना सूचना पुलिस को दी गई। सूचना पर थाने की टीम व सेमिता लीगल की टीम दीपक किराना स्टोर पर पहुंची। वहां दुकान पर पचरूखिया का दीपक बैठा मिला । दुकान में फेवीक्विक के 549 पीस नकली बरामद हुआ। पांच पीस बतौर नमूना लिया गया। जितेंद्र जायसवाल किराना स्टोर पर जांच में 12 पीस नकली फेवीक्विक बरामद हुआ। राहुल जायसवाल के बुक सेंटर से 351 पीस नकली फेवीक्विक बरामद हुआ। प्रहलाद के किराना स्टोर पर 496 पीस नकली फेवीक्विक बरामद हुआ। भिटौली थानाध्यक्ष रामाज्ञा सिंह ने बताया कि आरोपी दुकानदार दीपक निवासी पचरूखिया, जितेन्द्र जायसवाल निवासी धरमपुर, राहुल जायसवाल निवासी किशुनपुर, प्रहलाद गुप्ता निवासी भिटौली बाजार के खिलाफ कॉपीराइट एक्ट व धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है।
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मुनाफे के लालच में बेच रहे नकली सामान
जालसाज ब्रांडेड कंपनियों के सामानों की हू-ब-हू उत्पाद आसानी से बाजार में उपलब्ध करा रहे है। नाम की स्पेलिंग में भी खेल किया जाता है। ताकि लोग नाम देखकर नकली उत्पाद खरीद लें। पैकिंग की भी डिजाइन भी एक जैसी होती है। इन उत्पादों के की लागत भी कम होती है। दुकानदार को माेटा मुनाफा मिलता है। वहीं ग्राहक को भी कम दाम में मिलता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि बाजार में सामान खरीदते समय संभलने की जरूरत है।
टोल फ्री नंबर से जानकारी ले सकते हैं
ब्रांडेड कंपनियां अपने उत्पाद की पैकिंग पर कुछ फीचर्स जैसे बार कोड्स, सीरियल या मॉडल नंबर, ट्रेडमार्क और पेटेंट की जानकारी देती हैं। आमतौर पर नकली प्रोडक्ट्स के बॉक्स पर इस तरह की जानकारियां नहीं दी जाती हैं। आप यदि चाहें, तो इस बारे में ऑनलाइन या बॉक्स पर दिए गए टोल फ्री नंबर से जानकारी ले सकते हैं।
लोगो देकर पहचान की जा सकती
नकली उत्पाद के स्पेलिंग के साथ कंपनी का लोगो, ब्रांड नेम और ट्रेडमार्क भी बदला होता है। उत्पाद को ध्यान से देखकर इन कमियों को आसानी से जाना जा सकता है।
जालसाजों के निशाने पर होते हैं छोटे बाजार
ब्रांडेड कंपनियां अपने उत्पाद की पैकिंग पर काफी पैसा खर्च करती हैं। पहली नजर में यदि आपको पैकिंग खराब लगे, तो समझ जाएं कि उत्पाद नकली है। इन उत्पाद को जालसाज छोटे बाजारों में खपाते है सामान महंगे उत्पादों को हमेशा अधिकृत केंद्र से ही खरीदें, जैसे- इलेक्ट्रॉनिक, होम अप्लाइंसेज, गैजेट्स, ब्रांडेड कपड़े आदि। नकली उत्पाद बेचने वाली कंपनियां काफी चालाकी से काम करती हैं।
फोटो
नकली प्रोडक्ट में असली उत्पाद के स्थान पर खराब वैकल्पिक चीजों का प्रयोग किया जाता है। इसमें प्रयोग होने वाली सामग्री खराब होते हैं। बड़े बाजारों के आसपास छोटी दुकानों पर अपने सामान रखवाते हैं। वहीं ग्रामीण व छोटे कस्बों के दुकानदारों को कम दाम में अधिक मुनाफे का लालच देकर सामान बेचने को मजबूर करते हैं।
-राघवेंद्र सिंह, प्रधानाचार्य, आईटीएम के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग
फोटो
ज्यादातर कंपनियों की पैकिंग पर पूरा पता, ईमेल, फोन नंबर या कांटैक्ट डिटेल स्पष्ट लिखी होती है। कांटैक्ट डिटेल न देने का कारण यह होता है कि प्रोडक्ट में किसी तरह की कमी होने पर कोई उसकी शिकायत न कर सके। बिना कांटैक्ट डिटेल्स वाले किसी भी प्रोडक्ट को न खरीदें।
-अन्नूश्री श्रीवास्तव, सहायक आचार्य, इलेक्ट्रिकल विभाग, आईटीएम महाराजगंज
फोटो
लोगों को नकली सामान नहीं खरीदना चाहिए। इलेक्ट्राॅनिक सामानों की खरीदारी करें तो दुकानदार से सामान की गारंटी या वारंटी के बारे में जरूर पूछें। विश्वसनीय दुकानों से ही खरीदारी करें।
- मनीष प्रजापति चौरसिया,
फोटो
कंपनी के अधिकृत दुकानदार या डीलर से ही सामान खरीदना चाहिए। ऑनलाइन मंगाए गए समान अक्सर नकली या खराब मिलते हैं। सभी कंपनियां अपने उत्पाद पर बार कोड, स्केनर, हेल्प लाइन नंबर आदि जानकारी जरूरी देते हैं। कोई संदेह हो तो इनसे जानकारी ली जा सकती है।
- ओमप्रकाश, टीवी फ्रिज कारोबारी