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Maharajganj News: रेट बढ़ाकर गेहूं, ब्रान की खरीदारी.. करोड़ों में धंधा

Mon, 05 May 2025 12:16 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 05 May 2025 12:16 AM IST
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Buying wheat and bran by increasing the rate... Business worth crores
महराजगंज। सीमावर्ती क्षेत्र में धंधेबाजों ने हर सामान का रेट बढ़ा दिया है। इन दिनों गेहूं, ब्रान का रेट बढ़ गया है। चार से पांच रुपये प्रति किलो ब्रान तो करीब 100 रुपये से अधिक प्रति क्विंटल गेहूं का दर बढ़ाकर खरीदारी हो रही है।
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मांग के अनुसार तस्कर भारतीय क्षेत्र से सामान सरहद पार करते रहते हैं। इसमें कैरियरों का बड़ा नेटवर्क है। इस पूरे खेल को एक नंबर बनाकर किया जा रहा है। भारतीय क्षेत्र में अगर कोई ब्रान लदी गाड़ियों को रोकता है तो चालक एक नंबर वाला जीएसटी बिल दिखा देता है। बाद में नेपाल भेजकर मोटी आमदनी करते हैं।
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सूत्रों की मानें तो धंधेबाज राइसमिल से ब्रान खरीदने के लिए एक नंबर के बिल का उपयोग करते हैं। इससे उनको पकड़ में आने का खतरा नहीं रहता है। ब्रान ले जाने के दौरान अगर कोई पूछताछ करता है तो बिल दिखाकर किनारा कस लेते हैं। 11 से 12 रुपये प्रति किलो बिकने वाला ब्रान 14 से 15 रुपये प्रति किलों के भाव से बिक रहा है। ऐसे में भारतीय क्षेत्र के पशुपालकों को महंगे रेट में ब्रान खरीदना पड़ता है।
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पशुपालक रामप्रकाश यादव कहते हैं कि पहले सस्ते में ब्रान मिलता था, लेकिन अब रेट महंगा हो गया है। तस्करी अधिक होने की दशा में ब्रान मिलता नहीं है। ब्रान को सीमावर्ती क्षेत्र में लेकर जाकर डंप किया जाता है। मौके मिलने पर इसे सरहद पार कर दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो महराजगंज जिले के अलावा अन्य जिलों से भी ब्रान मंगाया जाता है। सीमावर्ती क्षेत्र में ब्रान की बरामदगी अक्सर होती रहती है।
सरहद पार होते ही ब्रान का रेट 2400 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक हो जाता है। सूत्रों के मुताबिक भारत नेपाल के लक्ष्मीपुर सरहद पर दोनों ओर तस्करों का नेटवर्क काफी बड़ा है। यही कारण है की इस सरहद पर भारत एवं नेपाल सरकार की ओर से प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी बड़े पैमाने पर होती है। ब्रान का इस्तेमाल पशुओं के चारे के साथ ही ब्रान ऑयल बनाने में किया जाता है। ऐसे में ज्यादा मुनाफा होता है।
उधर, गेहूं के रेट भी यही हो रहा है। किसान भी बिचौलियों को बेच दे रहे हैं। क्योंकि बगैर किसी झंझट के 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से घर से बिक्री हो जा रही है। इससे किसानों को सहूलित मिल रही है। वहीं धंधेबाजाें को भी फायदा हो रहा है। इस वजह से यह खेल आसानी से चल रहा है। 2500 के भाव से खरीदा गया गेहूं सरहद पार होते ही 3200 से 3400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है।
मांग के अनुसार रेट में उतार चढ़ाव होता रहता है। कम रिस्क और छोटी पूंजी से अधिक मुनाफा के चलते पगडंडियों के रास्ते सीमा तक दर्जनों कैरियर गेहूं ढोने के काम में लगे हैं। विभिन्न जगहों से पहले गेहूं की खरीददारी कर उसे नेपाल सीमा से सटे गांव में निश्चित ठिकाने पर पहले स्टाक किया जाता है।

फिर एक-दो बोरी कर नेपाल भेज दिया जाता है। भारतीय सीमावर्ती क्षेत्र में अधिकांश गांवों में तस्करों ने अवैध गोदाम बना रखे है। भारतीय बाजारों से गेहूं खरीदकर सीमावर्ती गांवों में स्टोर कर लेते हैं। बाद में कैरियर की मदद से यह सामान नेपाल सीमा में पहुंचा देते हैं।
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