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स्टांप में कमी पर नोटिस से दवा व्यापारी नाराज
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स्टांप में कमी पर नोटिस से दवा व्यापारी नाराज
एडीएम को ज्ञापन सौंपकर आरसी और नोटिस को निरस्त करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन जिला इकाई पदाधिकारियों ने विभाग की ओर से जारी की गई नोटिस और आरसी से नाराजगी जाहिर की। शुक्रवार को अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर किरायेदारी के स्टैंप में कमी पर नोटिस एवं आरसी को निरस्त करने की मांग की।
संगठन के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार चौरसिया ने कहा कि वर्ष 2013 से पहले लाइसेंस के लिए किराए पर दुकान के लिए 100 रुपये के स्टांप पर किरायेदारी लिखने के बाद ही दवा लाइसेंस मिलता था। वर्ष 2013 के बाद प्रदेश सरकार ने किरायेदारी के लिए स्टैंप में बढ़ोत्तरी कर दी। इसमें शहरी क्षेत्र में 2,400 रुपये स्टैंप और देहात क्षेत्र के लिए 1,200 रुपये कर दिया गया। उसी समय विभाग के पोर्टल पर भी कार्य हो रहा था। वर्ष 2013 से 2015 के बीच जो लाइसेंस बना वह 100 रुपये के स्टैंप के किरायेदारी में बना है। उस समय महराजगंज में कोई ड्रग इंसपेक्टर तैनात नहीं थे। गोरखपुर से ड्रग इंस्पेक्टर 10 से 15 दिन में एक बार आकर लाइसेंस आदि का कार्य करते थे। प्रदेश में किसी को बढ़ोत्तरी की सूचना नहीं थी। जबसे ड्रग इंसपेक्टर को जानकारी हुई तबसे बढ़ोत्तरी रेट पर स्टैम्प किरायेदारी में लगा कर लाइसेंस बनने लगा है। इस समय जो नोटिस या आरसी भेजी गई है, वह पूरे प्रदेश में कहीं नहीं है। केवल जिले में ही स्टैम्प कमी की नोटिस जारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर लाइसेंस में किसी तरह का पेपर कम रहता है, तो लाइसेंस जारी नहीं होता है। अधिकारियों के निरीक्षण के बाद ही लाइसेंस जारी होता है। ऐसे में इस मामले को संज्ञान में लेते हुए आरसी एवं नोटिस को निरस्त किया जाए। इस मौके पर जिला महामंत्री विनय नायक, राकेश पटेल, देवेंद्र मणि, रवि प्रकाश तिवारी, मनोज कुमार नायक, रोहित आदि मौजूद रहे।
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एडीएम को ज्ञापन सौंपकर आरसी और नोटिस को निरस्त करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन जिला इकाई पदाधिकारियों ने विभाग की ओर से जारी की गई नोटिस और आरसी से नाराजगी जाहिर की। शुक्रवार को अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर किरायेदारी के स्टैंप में कमी पर नोटिस एवं आरसी को निरस्त करने की मांग की।
संगठन के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार चौरसिया ने कहा कि वर्ष 2013 से पहले लाइसेंस के लिए किराए पर दुकान के लिए 100 रुपये के स्टांप पर किरायेदारी लिखने के बाद ही दवा लाइसेंस मिलता था। वर्ष 2013 के बाद प्रदेश सरकार ने किरायेदारी के लिए स्टैंप में बढ़ोत्तरी कर दी। इसमें शहरी क्षेत्र में 2,400 रुपये स्टैंप और देहात क्षेत्र के लिए 1,200 रुपये कर दिया गया। उसी समय विभाग के पोर्टल पर भी कार्य हो रहा था। वर्ष 2013 से 2015 के बीच जो लाइसेंस बना वह 100 रुपये के स्टैंप के किरायेदारी में बना है। उस समय महराजगंज में कोई ड्रग इंसपेक्टर तैनात नहीं थे। गोरखपुर से ड्रग इंस्पेक्टर 10 से 15 दिन में एक बार आकर लाइसेंस आदि का कार्य करते थे। प्रदेश में किसी को बढ़ोत्तरी की सूचना नहीं थी। जबसे ड्रग इंसपेक्टर को जानकारी हुई तबसे बढ़ोत्तरी रेट पर स्टैम्प किरायेदारी में लगा कर लाइसेंस बनने लगा है। इस समय जो नोटिस या आरसी भेजी गई है, वह पूरे प्रदेश में कहीं नहीं है। केवल जिले में ही स्टैम्प कमी की नोटिस जारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर लाइसेंस में किसी तरह का पेपर कम रहता है, तो लाइसेंस जारी नहीं होता है। अधिकारियों के निरीक्षण के बाद ही लाइसेंस जारी होता है। ऐसे में इस मामले को संज्ञान में लेते हुए आरसी एवं नोटिस को निरस्त किया जाए। इस मौके पर जिला महामंत्री विनय नायक, राकेश पटेल, देवेंद्र मणि, रवि प्रकाश तिवारी, मनोज कुमार नायक, रोहित आदि मौजूद रहे।
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