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Maharajganj News: बीमार पत्नी का दवा लेने से पहले ही व्यापारी की चली गई जान
Wed, 03 Apr 2024 09:04 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 03 Apr 2024 09:04 PM IST
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महराजगंज। श्यामदेउरवा थाना के बसहिया टोला मेवातीबारी के रहने वाले इंद्रजीत मद्धेशिया की आकस्मिक मृत्यु से उनका परिवार ही नहीं पूरा गांव गमगीन है। बुधवार को परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार बिना पोस्टमार्टम कराए ही कप्तानगंज घाट पर कर दिया। उनके तीन बेटे बिपिन, राकेश और संगम तीनों शादीशुदा हैं।
व्यापारी के बेटे विपिन मद्धेशिया ने बताया कि मां लकवाग्रस्त हैं। उनकी दवा गोरखपुर से चलती है। पिता मंगलवार को मां के लिए दवा लेने प्राइवेट बस से गोरखपुर जा रहे थे।बस चालक और परिचालक ने उन्हें भटहट में उतार दिया था। वह एक दुकान पर बैठे थे, लेकिन अचानक अचेत होकर गिर गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। बस चालक और परिचालक संवेदनहीन हैं। व्यापारी की पत्नी शांति देवी रो-रोकर बेसुध हो जा रहीं हैं। बहुएं अपनी सास को पूरी रात संभालती रहीं।
गांव में किराने की दुकान से परिवार का होता है गुजर बसर
इंद्रजीत मद्धेशिया अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए गांव स्थित अपने घर में ही किराने की दुकान चलाते थे। दुकान से होने वाली आय से तीन बेटे बहुओं का खर्च के साथ एक वर्ष से लकवाग्रस्त अपनी पत्नी का इलाज भी करवाते थे। मंगलवार को वह पत्नी के लिए दवा लाने के लिए गोरखपुर के लिए निकले थे। वह जिस निजी बस में गोरखपुर जाने के लिए बैठे थे। उसने किराया अधिक मांग लिया। अधिक किराया न देने पर उन्हे भटहट में वाहन से उतार दिया। यह बातें आ पास के लोगों ने बताई जहां वह वाहन से उतारे जाने के बाद बैठे हुए थे। वह बस चालक और परिचालक कि मनमानी बता ही रहे थे कि अचानक अचेत होकर जमीन पर गिर गए। जब तक चिकित्सा सुविधा देने का प्रयास होता उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
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व्यापारी के बेटे विपिन मद्धेशिया ने बताया कि मां लकवाग्रस्त हैं। उनकी दवा गोरखपुर से चलती है। पिता मंगलवार को मां के लिए दवा लेने प्राइवेट बस से गोरखपुर जा रहे थे।बस चालक और परिचालक ने उन्हें भटहट में उतार दिया था। वह एक दुकान पर बैठे थे, लेकिन अचानक अचेत होकर गिर गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। बस चालक और परिचालक संवेदनहीन हैं। व्यापारी की पत्नी शांति देवी रो-रोकर बेसुध हो जा रहीं हैं। बहुएं अपनी सास को पूरी रात संभालती रहीं।
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गांव में किराने की दुकान से परिवार का होता है गुजर बसर
इंद्रजीत मद्धेशिया अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए गांव स्थित अपने घर में ही किराने की दुकान चलाते थे। दुकान से होने वाली आय से तीन बेटे बहुओं का खर्च के साथ एक वर्ष से लकवाग्रस्त अपनी पत्नी का इलाज भी करवाते थे। मंगलवार को वह पत्नी के लिए दवा लाने के लिए गोरखपुर के लिए निकले थे। वह जिस निजी बस में गोरखपुर जाने के लिए बैठे थे। उसने किराया अधिक मांग लिया। अधिक किराया न देने पर उन्हे भटहट में वाहन से उतार दिया। यह बातें आ पास के लोगों ने बताई जहां वह वाहन से उतारे जाने के बाद बैठे हुए थे। वह बस चालक और परिचालक कि मनमानी बता ही रहे थे कि अचानक अचेत होकर जमीन पर गिर गए। जब तक चिकित्सा सुविधा देने का प्रयास होता उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
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