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Maharajganj News: खेत से रेलवे ट्रैक जाने का झांसा देकर जमीन के मालिकों को गुमराह कर रहे दलाल
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महंगी जमीनों का रेट घटाकर सौदा करने में लगे दलाल, लोग भी असमंजस में, अभी तक ट्रैक का नहीं हुआ है निर्धारण
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। फरेंदा से महराजगंज शहर के पास से घुघली रेलवे ट्रैक बिछेगी। इसकी मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन ट्रैक किसके खेत से होकर गुजरेगी, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसी का फायदा जमीन के दलाल उठाने में लगे हुए हैं। वे जमीन को रेलवे द्वारा अधिग्रहण किए जाने की बात कर जमीन के मालिकों को गुमराह कर रहे हैं। उनको झांसा दे रहे हैं कि जमीन चली जाएगी तो सर्किल रेट से ज्यादा रकम नहीं मिलेगी। कुछ लोग दलालों के झांसे में फंसकर औने-पौने दाम में जमीन का सौदा कर भी चुके हैं। लोग भी संशय में है कि रेलवे ट्रैक किधर से गुजरेगी।
सोमवार को इसकी पड़ताल करने निकले तो पिपरदेउरा से होकर शहर में नए हिस्से तरकुलवा पहुंचने पर तमाम लोग मंदिर के पास मिले। आपस में चर्चा कर रहे थे कि रेलवे ट्रैक किधर से गुजरेगी, लेकिन दलाल सक्रिय होकर मोलभाव कर रहे हैं। दलाल सोने के भाव बिकने वाली जमीनों को कौड़ियों के भाव खरीदने की बात कर रहे हैं। तरकुलवा के नरेश ने बताया कि कुछ दिन पहले एक व्यक्ति आया था, उसने बताया कि खेत के रास्ते ही रेलवे ट्रैक गुजरेगी, उसने तमाम तरह की बातें कर घेरने की कोशिश की। उसके बातचीत से समझ में आ गया था कि वह गुमराह कर अपना उल्लू सीधा करने की कोशिश कर रहा है। आए दिन इन तरह की बातें सुनने को मिल रही है। अभी कुछ स्पष्ट नहीं हुआ है।
पंजाब एवं दिल्ली से पूर्वोत्तर की ओर जाने वाली ट्रेनें इसी रूट से चलने लगेंगी
रेलवे ने गोरखपुर मंडल के महराजगंज को जोड़ने वाली आनंदनगर से घुघली रेल लाइन को मंजूरी दे दी है। 958.27 करोड़ की लागत वाली इस लाइन के बन जाने से पंजाब एवं दिल्ली से पूर्वोत्तर की ओर जाने वाली ज्यादातर ट्रेनें इसी रूट से चलने लगेंगी। लगभग 53 किमी लंबी इस लाइन से इस रेल खंड में दूरी और रेलवे की ढुलाई लागत में भी कमी आएगी। जिला मुख्यालय महराजगंज भी रेल लाइन से जुड़ जाएगा। मुख्यालय को जोड़ने वाली इस रेल लाइन के निर्माण की अधिसूचना जारी हो चुकी है। इसके बिछ जाने से 11 नगर निकायों वाले इस जिले की कारोबारी गतिविधियों को बल मिलेगा। रेलवे बोर्ड (गतिशक्ति) के संयुक्त निदेशक की जारी अधिसूचना के तहत रेल लाइन के सिविल कार्य के लिए कुल 875.30 करोड़ रुपये, सिग्नल व टेलीकॉम कार्य के लिए 18.17 करोड़ और इलेक्ट्रिकल्स कार्यों के लिए 64.26 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। कुल 958.27 करोड़ खर्च होगा।
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तीन एकड़ जमीन है। ट्रैक के लिए अधिग्रहण में इस जमीन के जाने की बात सामने आ रही है। गांव में बड़ी संख्या में जमीन के दलाल आ रहे हैं। गुमराह कर सस्ते में जमीन लेना चाहते हैं, जबकि अभी जमीन का रेट छह से सात लाख रुपये डिस्मिल का चल रहा है।
सीताराम, तरकुलवा
डेढ़ एकड़ जमीन हैं। हम लोगों से खेत होकर रेलवे ट्रैक जाने की बात कही जा रही है। जबसे रेलवे लाइन बिछाने की बात सामने आई है, हर दिन जमीन के दलाल गांव में आकर जमीन खोज रहे हैं और तरह तरह का प्रलोभन देकर जमीन सस्ते में खरीदना चाह रहे हैं।
उत्तम पटेल, तरकुलवा
हम लोगाें का गांव अब शहर का हिस्सा बन चुका है। जमीन के भाव भी बढ़ गए है। ढाई एकड़ जमीन है। अभी जमीन की कीमत 6 से 7 लाख रुपये डिस्मिल है। दलालों की सक्रियता बढ़ गई है।
हिरामन, तरकुलवा
तरकुलवा में पांच डिस्मिल जमीन लिया हूं। कुछ दिन पहले एक दलाल आया तो उसने रेलवे का पूरा खाका अपने मन से समझाने लगा। बताने लगा कि ट्रैक जमीन के रास्ते से ही होकर जाएगी। जमीन बेचना तो दे दीजिए। बाद में अच्छी कीमत नहीं मिलेगी। सर्किल रेट से ठीक रकम नहीं मिल सकेगी।
आत्माराम गुप्ता, गांधी नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। फरेंदा से महराजगंज शहर के पास से घुघली रेलवे ट्रैक बिछेगी। इसकी मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन ट्रैक किसके खेत से होकर गुजरेगी, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसी का फायदा जमीन के दलाल उठाने में लगे हुए हैं। वे जमीन को रेलवे द्वारा अधिग्रहण किए जाने की बात कर जमीन के मालिकों को गुमराह कर रहे हैं। उनको झांसा दे रहे हैं कि जमीन चली जाएगी तो सर्किल रेट से ज्यादा रकम नहीं मिलेगी। कुछ लोग दलालों के झांसे में फंसकर औने-पौने दाम में जमीन का सौदा कर भी चुके हैं। लोग भी संशय में है कि रेलवे ट्रैक किधर से गुजरेगी।
सोमवार को इसकी पड़ताल करने निकले तो पिपरदेउरा से होकर शहर में नए हिस्से तरकुलवा पहुंचने पर तमाम लोग मंदिर के पास मिले। आपस में चर्चा कर रहे थे कि रेलवे ट्रैक किधर से गुजरेगी, लेकिन दलाल सक्रिय होकर मोलभाव कर रहे हैं। दलाल सोने के भाव बिकने वाली जमीनों को कौड़ियों के भाव खरीदने की बात कर रहे हैं। तरकुलवा के नरेश ने बताया कि कुछ दिन पहले एक व्यक्ति आया था, उसने बताया कि खेत के रास्ते ही रेलवे ट्रैक गुजरेगी, उसने तमाम तरह की बातें कर घेरने की कोशिश की। उसके बातचीत से समझ में आ गया था कि वह गुमराह कर अपना उल्लू सीधा करने की कोशिश कर रहा है। आए दिन इन तरह की बातें सुनने को मिल रही है। अभी कुछ स्पष्ट नहीं हुआ है।
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पंजाब एवं दिल्ली से पूर्वोत्तर की ओर जाने वाली ट्रेनें इसी रूट से चलने लगेंगी
रेलवे ने गोरखपुर मंडल के महराजगंज को जोड़ने वाली आनंदनगर से घुघली रेल लाइन को मंजूरी दे दी है। 958.27 करोड़ की लागत वाली इस लाइन के बन जाने से पंजाब एवं दिल्ली से पूर्वोत्तर की ओर जाने वाली ज्यादातर ट्रेनें इसी रूट से चलने लगेंगी। लगभग 53 किमी लंबी इस लाइन से इस रेल खंड में दूरी और रेलवे की ढुलाई लागत में भी कमी आएगी। जिला मुख्यालय महराजगंज भी रेल लाइन से जुड़ जाएगा। मुख्यालय को जोड़ने वाली इस रेल लाइन के निर्माण की अधिसूचना जारी हो चुकी है। इसके बिछ जाने से 11 नगर निकायों वाले इस जिले की कारोबारी गतिविधियों को बल मिलेगा। रेलवे बोर्ड (गतिशक्ति) के संयुक्त निदेशक की जारी अधिसूचना के तहत रेल लाइन के सिविल कार्य के लिए कुल 875.30 करोड़ रुपये, सिग्नल व टेलीकॉम कार्य के लिए 18.17 करोड़ और इलेक्ट्रिकल्स कार्यों के लिए 64.26 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। कुल 958.27 करोड़ खर्च होगा।
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तीन एकड़ जमीन है। ट्रैक के लिए अधिग्रहण में इस जमीन के जाने की बात सामने आ रही है। गांव में बड़ी संख्या में जमीन के दलाल आ रहे हैं। गुमराह कर सस्ते में जमीन लेना चाहते हैं, जबकि अभी जमीन का रेट छह से सात लाख रुपये डिस्मिल का चल रहा है।
सीताराम, तरकुलवा
डेढ़ एकड़ जमीन हैं। हम लोगों से खेत होकर रेलवे ट्रैक जाने की बात कही जा रही है। जबसे रेलवे लाइन बिछाने की बात सामने आई है, हर दिन जमीन के दलाल गांव में आकर जमीन खोज रहे हैं और तरह तरह का प्रलोभन देकर जमीन सस्ते में खरीदना चाह रहे हैं।
उत्तम पटेल, तरकुलवा
हम लोगाें का गांव अब शहर का हिस्सा बन चुका है। जमीन के भाव भी बढ़ गए है। ढाई एकड़ जमीन है। अभी जमीन की कीमत 6 से 7 लाख रुपये डिस्मिल है। दलालों की सक्रियता बढ़ गई है।
हिरामन, तरकुलवा
तरकुलवा में पांच डिस्मिल जमीन लिया हूं। कुछ दिन पहले एक दलाल आया तो उसने रेलवे का पूरा खाका अपने मन से समझाने लगा। बताने लगा कि ट्रैक जमीन के रास्ते से ही होकर जाएगी। जमीन बेचना तो दे दीजिए। बाद में अच्छी कीमत नहीं मिलेगी। सर्किल रेट से ठीक रकम नहीं मिल सकेगी।
आत्माराम गुप्ता, गांधी नगर