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Maharajganj News: जेनेरिक के नाम पर बेच रहे ब्रांडेड दवाएं
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जिला अस्पताल में स्थित जन औषधि केंद्र पर लगी भीड़।
महराजगंज। जन औषधि केंद्र पर सस्ती दवाएं मिलने के दावे फेल नजर आ रहे हैं। लोग सस्ते के चक्कर में यहां पहुंचते उन्हें महंगी दवा दी जाती है। बस इसके लिए ग्राहक को थोड़ा सा इंतजार करना पड़ता है, क्योंकि यह दवाएं स्टोर में नहीं रखी जाती हैं। मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में सस्ती दवाओं की वजह ब्रांडेड कंपनियों की दवाएं बेची जा रही हैं।
जानकारी के अनुसार, जिले में 18 जन औषधि केंद्र संचालित हैं। जिला अस्पताल परिसर में भी एक जन औषधि केंद्र संचालित है। यहां आने वाले मरीजों की जेब ढीली होती है। उनको पता है कि यहां सस्ती दवा मिलेगी। अगर किसी मरीज के पर्चे पर पांच दवा लिखी है तो उसे दो से तीन दवा ही मिल पाती है। अन्य दवाओं को उसे महंगे दाम पर खरीदना पड़ता है।
पड़ताल में सामने आया कि जिला अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा जो भी दवाएं पर्चे पर लिखी जा रही हैं उसमें से आधी दवाएं भी जन औषधि केंद्र पर नहीं मिल रही हैं। संचालक आधी दवाएं मरीजों को बाहर से मंगवा कर मरीजों दे रहे हैं। ऐसा वह मुनाफा वसूलने के लिए कर रहे हैं।
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दरअसल मरीज को यह पता रहता है कि जन औषधि पर सस्ती दवा मिलती है। ऐसे में वे यहां पहुंचते हैं लेकिन वे खेल समझ नहीं पाते हैं। पर्चे पर लिखी गई तो पांच दवा में दो तो सस्ती वाली दी जाती है। अन्य महंगी वाली देकर रकम लिया जाता है। सीधे-साधे लोग इसे समझ नहीं पाते हैं।
बुधवार को जिला अस्पताल में डॉक्टर से इलाज करने के बाद महेंद्र कुमार बाहर निकले। वह जन औषधि केंद्र पर पहुंचे। उन्होंने बीपी की दवा लेनी थी लेकिन नहीं मिली तो बाहर चले गए। बागापार के रहने वाले संतोष ने बताया कि नाती अभिनव को दांत में दर्द है।
डॉक्टर को दिखाने के बाद जन औषधि सेंटर पर दवा लेने आया लेकिन पर्चे पर लिखी एक भी दवा नहीं मिली। उन्होंने बताया कि अब तो बाहर दुकान पर दवा लेना पड़ेगा। उधर, स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सस्ती और बेहतर जेनेरिक दवाएं जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध हैं।
मरीजों का उनका इस्तेमाल करना चाहिए। जबकि हकीकत यह है कि ब्रांडेड दवाओं के खेल में मरीज और तीमारदार हर दिन पिस रहे हैं। मरीजों महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
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जानकारी के अनुसार, जिले में 18 जन औषधि केंद्र संचालित हैं। जिला अस्पताल परिसर में भी एक जन औषधि केंद्र संचालित है। यहां आने वाले मरीजों की जेब ढीली होती है। उनको पता है कि यहां सस्ती दवा मिलेगी। अगर किसी मरीज के पर्चे पर पांच दवा लिखी है तो उसे दो से तीन दवा ही मिल पाती है। अन्य दवाओं को उसे महंगे दाम पर खरीदना पड़ता है।
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पड़ताल में सामने आया कि जिला अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा जो भी दवाएं पर्चे पर लिखी जा रही हैं उसमें से आधी दवाएं भी जन औषधि केंद्र पर नहीं मिल रही हैं। संचालक आधी दवाएं मरीजों को बाहर से मंगवा कर मरीजों दे रहे हैं। ऐसा वह मुनाफा वसूलने के लिए कर रहे हैं।
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दरअसल मरीज को यह पता रहता है कि जन औषधि पर सस्ती दवा मिलती है। ऐसे में वे यहां पहुंचते हैं लेकिन वे खेल समझ नहीं पाते हैं। पर्चे पर लिखी गई तो पांच दवा में दो तो सस्ती वाली दी जाती है। अन्य महंगी वाली देकर रकम लिया जाता है। सीधे-साधे लोग इसे समझ नहीं पाते हैं।
बुधवार को जिला अस्पताल में डॉक्टर से इलाज करने के बाद महेंद्र कुमार बाहर निकले। वह जन औषधि केंद्र पर पहुंचे। उन्होंने बीपी की दवा लेनी थी लेकिन नहीं मिली तो बाहर चले गए। बागापार के रहने वाले संतोष ने बताया कि नाती अभिनव को दांत में दर्द है।
डॉक्टर को दिखाने के बाद जन औषधि सेंटर पर दवा लेने आया लेकिन पर्चे पर लिखी एक भी दवा नहीं मिली। उन्होंने बताया कि अब तो बाहर दुकान पर दवा लेना पड़ेगा। उधर, स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सस्ती और बेहतर जेनेरिक दवाएं जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध हैं।
मरीजों का उनका इस्तेमाल करना चाहिए। जबकि हकीकत यह है कि ब्रांडेड दवाओं के खेल में मरीज और तीमारदार हर दिन पिस रहे हैं। मरीजों महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।