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Maharajganj News: सीमित संसाधनों के बीच बर्ड फ्लू की दस्तक, 58 नमूने लिए गए
Sat, 17 May 2025 12:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 17 May 2025 12:37 AM IST
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महराजगंज। सूबे में बर्ड फ्लू की दस्तक के बाद जनपद में अलर्ट घोषित है, लेकिन सीमित संसाधनों के सहारे संचालित पशु चिकित्सा विभाग इसको फैलने से रोक पाएगा इसे लेकर संशय बना है। क्योंकि बर्ड फ्लू की पुष्टि के लिए विभाग को 15 दिन में बरेली लैब से रिपोर्ट मिलती है।
ऐसे में 15 दिन तक विभाग सिर्फ सफाई के सहारे रोग फैलने से रोकने में जुटा रहता है। जबकि पक्षियों में बर्ड फ्लू होने के बाद उन पक्षियों को नष्ट कर आबादी से दूर मिट्टी में दबाना ही फैलाव रोकने का तरीका है, लेकिन जब पुष्टि ही 15 दिन से पहले नहीं हो सकती तो विभाग कारगर कदम उठाकर पशु-पक्षियों में फैलने से कैसे रोकेगा इसकी रणनीति विभाग के पास नहीं है।
विभाग ने शुक्रवार को 58 पोल्ट्री फार्म से नमूना संग्रहित कराकर भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली भेजा। अब रिपोर्ट आने के बाद क्या करना है यह तय किया जाएगा। पक्षियों से फैलने वाला एवियन इंफ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) संक्रामक रोग माना जाता है जो पक्षियों से होकर पशुओं और मनुष्यों तक फैलता है। शुरुआती चरण में जानकारी हो जाए तो राहत व बचाव उपाय प्रभावी कर नियंत्रण संभव है, लेकिन विभाग की संसाधन विहीनता इसपर रोक लगाने में अक्षम बना रही।
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सर्वप्रथम पशुओं में फैलने वाले रोग की पुष्टि के लिए पशु चिकित्सा प्रयोगशाला की कमी है। जनपद स्तर पर कोई सुविधा ही नहीं है। आईबीआरआई बरेली में है जो पशु पक्षियों के रोग की पुष्टि अपने जांच रिपोर्ट से करती है।
मंडल स्तर पर भी प्रयोगशाला है, लेकिन घातक बीमारियों की पुष्टि सिर्फ बरेली से ही होती है। इसपर प्रदेश के सभी जनपदों का दायित्व रहता है, जिसके कारण 15 दिन से पहले रिपोर्ट ही नहीं पहुंचती। ऐसे में तब तक विभाग सिर्फ इंतजार करता है और सिर्फ साफ-सफाई के सहारे संक्रमण रोकने में जुटा रहता है।
248 सामान्य 48 बड़े पोल्ट्री फार्म संचालित : जनपद में सामान्य पोल्ट्रीफार्म जहां 248 हैं वहीं बड़े पोल्ट्री फार्म व 52 बड़ी पोल्ट्रीफार्म संचालित हैं जो जनपद के साथ गोरखपुर और संतकबीरनगर तक चिकन का स्रोत हैं।
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ऐसे में 15 दिन तक विभाग सिर्फ सफाई के सहारे रोग फैलने से रोकने में जुटा रहता है। जबकि पक्षियों में बर्ड फ्लू होने के बाद उन पक्षियों को नष्ट कर आबादी से दूर मिट्टी में दबाना ही फैलाव रोकने का तरीका है, लेकिन जब पुष्टि ही 15 दिन से पहले नहीं हो सकती तो विभाग कारगर कदम उठाकर पशु-पक्षियों में फैलने से कैसे रोकेगा इसकी रणनीति विभाग के पास नहीं है।
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विभाग ने शुक्रवार को 58 पोल्ट्री फार्म से नमूना संग्रहित कराकर भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली भेजा। अब रिपोर्ट आने के बाद क्या करना है यह तय किया जाएगा। पक्षियों से फैलने वाला एवियन इंफ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) संक्रामक रोग माना जाता है जो पक्षियों से होकर पशुओं और मनुष्यों तक फैलता है। शुरुआती चरण में जानकारी हो जाए तो राहत व बचाव उपाय प्रभावी कर नियंत्रण संभव है, लेकिन विभाग की संसाधन विहीनता इसपर रोक लगाने में अक्षम बना रही।
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सर्वप्रथम पशुओं में फैलने वाले रोग की पुष्टि के लिए पशु चिकित्सा प्रयोगशाला की कमी है। जनपद स्तर पर कोई सुविधा ही नहीं है। आईबीआरआई बरेली में है जो पशु पक्षियों के रोग की पुष्टि अपने जांच रिपोर्ट से करती है।
मंडल स्तर पर भी प्रयोगशाला है, लेकिन घातक बीमारियों की पुष्टि सिर्फ बरेली से ही होती है। इसपर प्रदेश के सभी जनपदों का दायित्व रहता है, जिसके कारण 15 दिन से पहले रिपोर्ट ही नहीं पहुंचती। ऐसे में तब तक विभाग सिर्फ इंतजार करता है और सिर्फ साफ-सफाई के सहारे संक्रमण रोकने में जुटा रहता है।
248 सामान्य 48 बड़े पोल्ट्री फार्म संचालित : जनपद में सामान्य पोल्ट्रीफार्म जहां 248 हैं वहीं बड़े पोल्ट्री फार्म व 52 बड़ी पोल्ट्रीफार्म संचालित हैं जो जनपद के साथ गोरखपुर और संतकबीरनगर तक चिकन का स्रोत हैं।