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Maharajganj News: खराब मौसम से गोवंश के निवाले पर संकट
Sun, 13 Apr 2025 05:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 13 Apr 2025 05:45 PM IST
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महराजगंज। गेहूं कटाई के बाद खाली हो रहे खेतों से भूसा तैयार कराने वाले पशुपालकों में मौसम के रुख से निराशा है। बारिश के कारण खेत के कृषि अवशेष पूरी तरह भीग गए हैं जिनके सूखे बिना भूसा नहीं बनवाया जा सकता। ऐसे में मौसम ठीक होने के बाद भी अवशेष सूखने के लिए तीन से चार दिन इंतजार करना पड़ेगा।
वहीं किसानों की खरीफ के लिए भी खेत तैयार करना है। अधिक दिन वह खेत नहीं छोड़ सकते हैं। ऐसे में भूसा निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित होगी और महंगे रेट पर भूसा खरीदने की मजबूरी होगी। जनपद में 31 अस्थायी गो आश्रय स्थलों में 5 हजार से अधिक पशु संरक्षित हैं। इसके अलावा नगर निकायों में भी एक-एक कान्हा गोशाला संचालित है, जिसमें 100-100 पशु संरक्षित हैं।
इनके भूसे का इंतजाम सीजन में गेहूं कटे खेतों से भूसा बनवाकर किया जाता है। इस समय जहां भूसे का रेट 300 रुपये क्विंटल है यही बारिश के दिनों में 700 में भी मुश्किल से मिलता है। पशुपालक लखन यादव, राजाराम चौधरी कहते हैं कि बारिश में भूसा खरीद पाना सभी पशुपालकों के लिए संभव नहीं रहता इसलिए गेहूं कटाई के तुरंत बाद भूसा बनवा लिया जाता है, लेकिन इस बार खेत खाली होते ही बारिश होने से निर्माण प्रक्रिया रुक गई है।
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तीन से चार दिन बाद ही अब भूसा बन सकता है। अगर इस समय किसानों ने जोताई करा दी तो वह भी नहीं मिलेगा। गो आश्रय स्थलों के जिम्मेदार भी पूरे वर्ष के लिए भूसे की व्यवस्था गेहूं के खाली खेतों से ही कराते थे, लेकिन इस बार उन्हें भी निराशा हाथ लगी है। उप कृषि निदेशक वीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि बारिश के कारण भूसा निर्माण तीन दिन बाद ही मौसम ठीक होने पर हो सकेगी। क्योंकि भूसे के लिए छोड़े गए अवशेष भीग चुके हैं।
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वहीं किसानों की खरीफ के लिए भी खेत तैयार करना है। अधिक दिन वह खेत नहीं छोड़ सकते हैं। ऐसे में भूसा निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित होगी और महंगे रेट पर भूसा खरीदने की मजबूरी होगी। जनपद में 31 अस्थायी गो आश्रय स्थलों में 5 हजार से अधिक पशु संरक्षित हैं। इसके अलावा नगर निकायों में भी एक-एक कान्हा गोशाला संचालित है, जिसमें 100-100 पशु संरक्षित हैं।
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इनके भूसे का इंतजाम सीजन में गेहूं कटे खेतों से भूसा बनवाकर किया जाता है। इस समय जहां भूसे का रेट 300 रुपये क्विंटल है यही बारिश के दिनों में 700 में भी मुश्किल से मिलता है। पशुपालक लखन यादव, राजाराम चौधरी कहते हैं कि बारिश में भूसा खरीद पाना सभी पशुपालकों के लिए संभव नहीं रहता इसलिए गेहूं कटाई के तुरंत बाद भूसा बनवा लिया जाता है, लेकिन इस बार खेत खाली होते ही बारिश होने से निर्माण प्रक्रिया रुक गई है।
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तीन से चार दिन बाद ही अब भूसा बन सकता है। अगर इस समय किसानों ने जोताई करा दी तो वह भी नहीं मिलेगा। गो आश्रय स्थलों के जिम्मेदार भी पूरे वर्ष के लिए भूसे की व्यवस्था गेहूं के खाली खेतों से ही कराते थे, लेकिन इस बार उन्हें भी निराशा हाथ लगी है। उप कृषि निदेशक वीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि बारिश के कारण भूसा निर्माण तीन दिन बाद ही मौसम ठीक होने पर हो सकेगी। क्योंकि भूसे के लिए छोड़े गए अवशेष भीग चुके हैं।