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Maharajganj News: राशन वितरण के बाद बोरा न जमा करने वाले कोटेदारों पर होगी कार्रवाई, सूची तैयार
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गेहूं खरीद के लिए कोटेदारों को गोदाम पर बोरे जमा करने का था सख्त निर्देश
21,000 के सापेक्ष अभी तक महज 4500 बोरे ही जमा किए गए
निचलौल। गेहूं क्रय केंद्रों पर बोरे की कमी से निपटने के लिए प्रशासन ने अब कोटेदारों पर सख्ती करने का मन बना लिया है। कई कोटेदार राशन वितरण करने के बाद भी बोरा सरेंडर नहीं कर रहे हैं। अब बोरा जमा नहीं करने वाले कोटेदारों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। कोटेदारों की सूची तैयार की जा चुकी है।
अधिकारियों ने कोटेदारों से राशन वितरण के बाद बोरा सरेंडर करने के लिए कहा था। कोटेदारों से बोरे लेने के बाद 30 रुपये प्रति बोरा का भुगतान करने का प्रावधान भी शासन स्तर से किया गया था। लेकिन कोटेदारों ने अधिकारियों के इस फरमान को दरकिनार कर दिया है। निचलौल ब्लॉक क्षेत्र में शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में कुल 115 कोटे की दुकान संचालित हो रही हैं। इन कोटे के दुकान कर 21,000 बोरे भेजे गए थे। लेकिन करीब 70 कोटेदारों ने बोरे जमा करने की खानापूर्ति करते हुए 4500 बोरा ही जमा किए हैं। हालांकि कोटेदारों से बोरे लेने के बदले उन्हें शासन स्तर से 30 रुपए प्रति बोरा दिए जाएंगे।
जानकारी के मुताबिक, अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध से बोरे का संकट होने के कारण पी-फॉर्म प्लास्टिक दाने के दाम बढ़ने से प्लास्टिक सामग्री बनाने की लागत बढ़ गई है। प्लास्टिक के बोरे नहीं मिलने से दूसरे विकल्प के रूप में बोरों का उपयोग तलाश की गई है। बोरे की पहली बार किल्लत होने के बाद कोटेदारों से बोरे लेकर जूट के बोरे में गेहूं की खरीद की जा रही है।
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पूर्ति निरीक्षक इंद्रभान सिंह ने बताया कि गेहूं क्रय केंद्रों पर खरीद कार्य तेजी से चल रहा है। केंद्रों पर बोरे की कमी दूर करने के लिए विभाग ने मार्च महीने से ही कोटेदारों से सीधे बोरा खरीदने का निर्णय लिया है। ताकि क्रय केंद्रों पर समय से पर्याप्त बोरे उपलब्ध होने के साथ ही खरीद प्रक्रिया बाधित न हो। लेकिन अधिकांश कोटेदारों की ओर से राशन वितरण करने के बाद भी अब तक बोरे नहीं जमा किए गए हैं। ऐसे में बोरा न जमा करने वाले कोटेदारों की सूची तैयार हो चुकी है। जल्द ही ऐसे कोटेदारों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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21,000 के सापेक्ष अभी तक महज 4500 बोरे ही जमा किए गए
निचलौल। गेहूं क्रय केंद्रों पर बोरे की कमी से निपटने के लिए प्रशासन ने अब कोटेदारों पर सख्ती करने का मन बना लिया है। कई कोटेदार राशन वितरण करने के बाद भी बोरा सरेंडर नहीं कर रहे हैं। अब बोरा जमा नहीं करने वाले कोटेदारों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। कोटेदारों की सूची तैयार की जा चुकी है।
अधिकारियों ने कोटेदारों से राशन वितरण के बाद बोरा सरेंडर करने के लिए कहा था। कोटेदारों से बोरे लेने के बाद 30 रुपये प्रति बोरा का भुगतान करने का प्रावधान भी शासन स्तर से किया गया था। लेकिन कोटेदारों ने अधिकारियों के इस फरमान को दरकिनार कर दिया है। निचलौल ब्लॉक क्षेत्र में शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में कुल 115 कोटे की दुकान संचालित हो रही हैं। इन कोटे के दुकान कर 21,000 बोरे भेजे गए थे। लेकिन करीब 70 कोटेदारों ने बोरे जमा करने की खानापूर्ति करते हुए 4500 बोरा ही जमा किए हैं। हालांकि कोटेदारों से बोरे लेने के बदले उन्हें शासन स्तर से 30 रुपए प्रति बोरा दिए जाएंगे।
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जानकारी के मुताबिक, अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध से बोरे का संकट होने के कारण पी-फॉर्म प्लास्टिक दाने के दाम बढ़ने से प्लास्टिक सामग्री बनाने की लागत बढ़ गई है। प्लास्टिक के बोरे नहीं मिलने से दूसरे विकल्प के रूप में बोरों का उपयोग तलाश की गई है। बोरे की पहली बार किल्लत होने के बाद कोटेदारों से बोरे लेकर जूट के बोरे में गेहूं की खरीद की जा रही है।
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पूर्ति निरीक्षक इंद्रभान सिंह ने बताया कि गेहूं क्रय केंद्रों पर खरीद कार्य तेजी से चल रहा है। केंद्रों पर बोरे की कमी दूर करने के लिए विभाग ने मार्च महीने से ही कोटेदारों से सीधे बोरा खरीदने का निर्णय लिया है। ताकि क्रय केंद्रों पर समय से पर्याप्त बोरे उपलब्ध होने के साथ ही खरीद प्रक्रिया बाधित न हो। लेकिन अधिकांश कोटेदारों की ओर से राशन वितरण करने के बाद भी अब तक बोरे नहीं जमा किए गए हैं। ऐसे में बोरा न जमा करने वाले कोटेदारों की सूची तैयार हो चुकी है। जल्द ही ऐसे कोटेदारों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।