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Maharajganj News: मनरेगा में फर्जी हाजिरी लगाने के मामले में कार्रवाई तेज, मांगा स्पष्टीकरण
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बीडीओ ने सेक्टर प्रभारी, बीटीए व रोजगार सेवक से पांच दिन के भीतर मांगा स्पष्टीकरण
परतावल के लखिमा में मनरेगा योजना के तहत फर्जी हाजिरी लगाकर लगभग सात लाख रुपए के भुगतान का मामला
परतावल। परतावल ब्लाॅक के लखिमा में मनरेगा योजना के तहत फर्जी हाजिरी लगाकर लगभग सात लाख रुपए का भुगतान करने के मामले में विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। सोमवार को खंड विकास अधिकारी ने नोटिस जारी कर सेक्टर प्रभारी अंजलि चौधरी, ब्लाॅक तकनीकी सहायक अजय कुमार व रोजगार सेवक बिंदु चौधरी से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने तीनों को पांच दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने के लिए निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, लखिमा-पिपराइच मार्ग से मुराली चौराहा तक पीडब्ल्यूडी रोड के दोनों किनारों पर मिट्टी कार्य दर्शाया गया है। विभागीय अभिलेखों में यह कार्य 20 दिसंबर 2025 से 4 जनवरी 2026 के बीच कराया जाना अंकित है। इस दौरान कुल 2761 मानव दिवस की हाजिरी लगाई गई और मजदूरी मद में 6 लाख 95 हजार 772 रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क किनारे कहीं भी मिट्टी कार्य के निशान तक नहीं दिखाई दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है। इतना ही नहीं, जिस सड़क पर कार्य दिखाया गया है वह लोक निर्माण विभाग के अधीन है लेकिन कार्य शुरू कराने के लिए विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) तक नहीं लिया गया।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर मनरेगा के तहत लगाए जाने वाला सीआईबी बोर्ड भी नहीं लगाया गया, जिससे पूरे मामले पर और सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण यशवंत, मुन्ना, तुफानी, नरेश और सुग्गन सहित कई लोगों ने बताया कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने इस सड़क पर किसी प्रकार का मिट्टी कार्य होते नहीं देखा। उनका कहना है कि यदि काम हुआ होता तो उसका असर जमीन पर जरूर दिखाई देता। मनरेगा योजना के तहत एक श्रमिक को दिनभर में कितना घनमीटर मिट्टी भराई करना है, उसका भी मानक तय है। इसके अलावा कुछ ऐसे लोगों की हाजिरी लगाई गई है जो कभी भी कार्य करते दिखाई नहीं देते हैं। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा सरकारी धन की रिकवरी की मांग की है।
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वर्जन
मामले में सेक्टर प्रभारी अंजलि चौधरी, ब्लाॅक तकनीकी सहायक अजय कुमार व रोजगार सेवक बिंदु चौधरी से पांच दिवस के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
- अर्जुन चौधरी, खंड विकास अधिकारी
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परतावल के लखिमा में मनरेगा योजना के तहत फर्जी हाजिरी लगाकर लगभग सात लाख रुपए के भुगतान का मामला
परतावल। परतावल ब्लाॅक के लखिमा में मनरेगा योजना के तहत फर्जी हाजिरी लगाकर लगभग सात लाख रुपए का भुगतान करने के मामले में विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। सोमवार को खंड विकास अधिकारी ने नोटिस जारी कर सेक्टर प्रभारी अंजलि चौधरी, ब्लाॅक तकनीकी सहायक अजय कुमार व रोजगार सेवक बिंदु चौधरी से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने तीनों को पांच दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने के लिए निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, लखिमा-पिपराइच मार्ग से मुराली चौराहा तक पीडब्ल्यूडी रोड के दोनों किनारों पर मिट्टी कार्य दर्शाया गया है। विभागीय अभिलेखों में यह कार्य 20 दिसंबर 2025 से 4 जनवरी 2026 के बीच कराया जाना अंकित है। इस दौरान कुल 2761 मानव दिवस की हाजिरी लगाई गई और मजदूरी मद में 6 लाख 95 हजार 772 रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क किनारे कहीं भी मिट्टी कार्य के निशान तक नहीं दिखाई दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है। इतना ही नहीं, जिस सड़क पर कार्य दिखाया गया है वह लोक निर्माण विभाग के अधीन है लेकिन कार्य शुरू कराने के लिए विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) तक नहीं लिया गया।
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ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर मनरेगा के तहत लगाए जाने वाला सीआईबी बोर्ड भी नहीं लगाया गया, जिससे पूरे मामले पर और सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण यशवंत, मुन्ना, तुफानी, नरेश और सुग्गन सहित कई लोगों ने बताया कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने इस सड़क पर किसी प्रकार का मिट्टी कार्य होते नहीं देखा। उनका कहना है कि यदि काम हुआ होता तो उसका असर जमीन पर जरूर दिखाई देता। मनरेगा योजना के तहत एक श्रमिक को दिनभर में कितना घनमीटर मिट्टी भराई करना है, उसका भी मानक तय है। इसके अलावा कुछ ऐसे लोगों की हाजिरी लगाई गई है जो कभी भी कार्य करते दिखाई नहीं देते हैं। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा सरकारी धन की रिकवरी की मांग की है।
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मामले में सेक्टर प्रभारी अंजलि चौधरी, ब्लाॅक तकनीकी सहायक अजय कुमार व रोजगार सेवक बिंदु चौधरी से पांच दिवस के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
- अर्जुन चौधरी, खंड विकास अधिकारी