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Maharajganj News: एक साल पहले मंजित ने गांव में चुराई थी साइकिल
Mon, 24 Feb 2025 12:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 24 Feb 2025 12:09 AM IST
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महराजगंज। कैंपियरगंज थाना क्षेत्र में मोदीगंज-मछलीगांव मार्ग पर स्थित चोरही नाला के पास एक स्वर्ण व्यवसायी से लूट करने वाले सात लुटेरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस लूटकांड का मुख्य सरगना पनियरा क्षेत्र के सुचितपुर बघौना निवासी मंजीत निषाद बताया जा रहा है।
उसके दो मुख्य साथी अमरनाथ विश्वकर्मा, जो उसी गांव का निवासी है और आलोक पासवान जो लाला बड़हरा का निवासी होने के साथ गिरोह का हिस्सा है। गांव के लोग बताते हैं कि मंजीत निषाद पहले छोटी चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था। उसने अपने गांव में एक साल पहले एक व्यक्ति के घर से साइकिल चोरी की थी। इसी तरह, उसने मछलीगांव के एक युवक का मोबाइल तेंदुअहिया के बलुअहिया शराब भट्ठी से चुरा लिया था। चोरी किए गए सामानों को बेचकर वह शराब पीकर पार्टी करता था।
मंजीत निषाद जब मछली गांव में स्थित एक शराब भट्ठी से बाइक चुरा रहा था, तभी उसी दौरान गांव के अमरनाथ ने उसे देख लिया था। बाद में दोनों की मुलाकात हुई। जहां उसने मंजीत को बाइक चोरी की घटना को लेकर टोक दिया।
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मंजीत को लगा कि अगर वह पुलिस को बता देगा तो वह पकड़ा जा सकता है। इसी डर से उसने अमरनाथ को अपने गिरोह में शामिल होने का लालच दिया। उसने कहा कि अगर वह उसके साथ मिल जाएगा तो एक महीने के अंदर ही बाइक से घूमेगा। इस प्रलोभन में आकर अमरनाथ भी मंजीत के साथ जुड़ गया। इसके बाद मंजीत निषाद और अमरनाथ विश्वकर्मा ने चेहरी फार्म के पास देर रात आने-जाने वाले बाइक सवारों को रोककर पैसे छीनना शुरू कर दिया।
इस दौरान उनकी मुलाकात लाला बड़हरा के आलोक पासवान से हुई, जो रोहिन नदी से चोरी-छिपे बालू निकालने का काम करता था। एक दिन एक चाय की दुकान पर बैठकर मंजीत और अमरनाथ ने क्रिकेट सट्टा खेला। इसमें मंजीत ने 10 मिनट के अंदर ही 10 हजार रुपये जीत लिए। यह देखकर आलोक पासवान भी प्रभावित हुआ और उसने उनसे कहा कि उसे भी अपने साथ किसी काम में शामिल कर लें।
इसके बाद तीनों ने मिलकर मंदिर में लगे घंटों की चोरी शुरू की। इसके अलावा, वे घरों के बाहर रखे अनाज की बोरियां भी चुरा लेते थे। गांव में किसी को भी इस गिरोह की गतिविधियों की भनक नहीं लगी। धीरे-धीरे इनका अपराध बढ़ता गया और वे सड़कों पर लूटपाट करने लगे।
करीब छह माह पहले कैंपियरगंज क्षेत्र में स्थित इंदरपुर सिवान के पास, इन तीनों लुटेरों ने एक बाइक सवार को चाकू के बल पर रोककर उसके बैग में रखे रुपये और अन्य सामान लूटकर नेपाल फरार हो गए थे।
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उसके दो मुख्य साथी अमरनाथ विश्वकर्मा, जो उसी गांव का निवासी है और आलोक पासवान जो लाला बड़हरा का निवासी होने के साथ गिरोह का हिस्सा है। गांव के लोग बताते हैं कि मंजीत निषाद पहले छोटी चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था। उसने अपने गांव में एक साल पहले एक व्यक्ति के घर से साइकिल चोरी की थी। इसी तरह, उसने मछलीगांव के एक युवक का मोबाइल तेंदुअहिया के बलुअहिया शराब भट्ठी से चुरा लिया था। चोरी किए गए सामानों को बेचकर वह शराब पीकर पार्टी करता था।
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मंजीत निषाद जब मछली गांव में स्थित एक शराब भट्ठी से बाइक चुरा रहा था, तभी उसी दौरान गांव के अमरनाथ ने उसे देख लिया था। बाद में दोनों की मुलाकात हुई। जहां उसने मंजीत को बाइक चोरी की घटना को लेकर टोक दिया।
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मंजीत को लगा कि अगर वह पुलिस को बता देगा तो वह पकड़ा जा सकता है। इसी डर से उसने अमरनाथ को अपने गिरोह में शामिल होने का लालच दिया। उसने कहा कि अगर वह उसके साथ मिल जाएगा तो एक महीने के अंदर ही बाइक से घूमेगा। इस प्रलोभन में आकर अमरनाथ भी मंजीत के साथ जुड़ गया। इसके बाद मंजीत निषाद और अमरनाथ विश्वकर्मा ने चेहरी फार्म के पास देर रात आने-जाने वाले बाइक सवारों को रोककर पैसे छीनना शुरू कर दिया।
इस दौरान उनकी मुलाकात लाला बड़हरा के आलोक पासवान से हुई, जो रोहिन नदी से चोरी-छिपे बालू निकालने का काम करता था। एक दिन एक चाय की दुकान पर बैठकर मंजीत और अमरनाथ ने क्रिकेट सट्टा खेला। इसमें मंजीत ने 10 मिनट के अंदर ही 10 हजार रुपये जीत लिए। यह देखकर आलोक पासवान भी प्रभावित हुआ और उसने उनसे कहा कि उसे भी अपने साथ किसी काम में शामिल कर लें।
इसके बाद तीनों ने मिलकर मंदिर में लगे घंटों की चोरी शुरू की। इसके अलावा, वे घरों के बाहर रखे अनाज की बोरियां भी चुरा लेते थे। गांव में किसी को भी इस गिरोह की गतिविधियों की भनक नहीं लगी। धीरे-धीरे इनका अपराध बढ़ता गया और वे सड़कों पर लूटपाट करने लगे।
करीब छह माह पहले कैंपियरगंज क्षेत्र में स्थित इंदरपुर सिवान के पास, इन तीनों लुटेरों ने एक बाइक सवार को चाकू के बल पर रोककर उसके बैग में रखे रुपये और अन्य सामान लूटकर नेपाल फरार हो गए थे।