{"_id":"69-62451","slug":"Maharajganj-62451-69","type":"story","status":"publish","title_hn":"परिवार, समाज की सलामती को छोड़ देते हैं घर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परिवार, समाज की सलामती को छोड़ देते हैं घर
Maharajganj
Updated Sat, 13 Apr 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महराजगंज। समाज और परिवार की सलामती के लिए करमहां गांव के लोगों ने शुक्रवार को दिनभर के लिए अपना घर छोड़ दिया। गांव के बाहर बगीचे में परिवार के साथ रहे। खाना, पीना सब वहीं हुआ। रात में लोग अपने घरों को लौटे। गांव के लोग हर तीन साल पर चैत्र नवरात्र में ऐसा करते हैं। गांव के लोग बताते हैं बहुत समय से ऐसा होता आ रहा है।
गांव, समाज और परिवार की सलामती के लिए करमहां गांव के लोग अनूठी पूजा करते हैं। नवरात्र के दौरान करमहां के लोग एक दिन केे लिए घर छोड़ देते हैं। हालांकि गांव के कुछ लोग अपने घरों में ही रहते हैं। शुक्रवार को दिन में इस पूजा की वजह से करमहां गांव में सन्नाटा पसरा रहा। गांव के बाहर जगह-जगह टेंट लगाकर लोग दिन गुजरने का इंतजार करते रहे। सुबह घरों में झाडू़ तक नहीं लगाई गई थी। यहां के कुछ लोगों से बातचीत की गई।
करमहां क ी तारा देवी (75) कहती हैं कि यह रिवाज लंबे समय से चला आ रहा है। वे कहती हैं कि उनके पूर्वज भी ऐसा करते चले आ रहे हैं। वे कहती हैं कि लोग बिना स्नान किए ही घरों से बाहर निकलते हैं। वे बताती हैं कि गांव के लोग सीधे घरों से निकलकर पश्चिम की ओर चले जाते हैं। हालांकि गांव के कुछ लोग ऐसा नहीं भी करते हैं। यहां के रहने वाले विंध्यवासिनी सिंह कहते हैं कि परंपरा का निर्वहन वे लोग करते चले आ रहे हैं। नवरात्र का मौका होने की वजह से सबलोग सुबह ही मां काली और दुर्गा की पूजा करते हैं। यह लंबे समय से चला आ रहा है। शायद पूजा-पाठ की देन है कि गांव और यहां के रहने वाले सलामत हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
गांव, समाज और परिवार की सलामती के लिए करमहां गांव के लोग अनूठी पूजा करते हैं। नवरात्र के दौरान करमहां के लोग एक दिन केे लिए घर छोड़ देते हैं। हालांकि गांव के कुछ लोग अपने घरों में ही रहते हैं। शुक्रवार को दिन में इस पूजा की वजह से करमहां गांव में सन्नाटा पसरा रहा। गांव के बाहर जगह-जगह टेंट लगाकर लोग दिन गुजरने का इंतजार करते रहे। सुबह घरों में झाडू़ तक नहीं लगाई गई थी। यहां के कुछ लोगों से बातचीत की गई।
विज्ञापन
करमहां क ी तारा देवी (75) कहती हैं कि यह रिवाज लंबे समय से चला आ रहा है। वे कहती हैं कि उनके पूर्वज भी ऐसा करते चले आ रहे हैं। वे कहती हैं कि लोग बिना स्नान किए ही घरों से बाहर निकलते हैं। वे बताती हैं कि गांव के लोग सीधे घरों से निकलकर पश्चिम की ओर चले जाते हैं। हालांकि गांव के कुछ लोग ऐसा नहीं भी करते हैं। यहां के रहने वाले विंध्यवासिनी सिंह कहते हैं कि परंपरा का निर्वहन वे लोग करते चले आ रहे हैं। नवरात्र का मौका होने की वजह से सबलोग सुबह ही मां काली और दुर्गा की पूजा करते हैं। यह लंबे समय से चला आ रहा है। शायद पूजा-पाठ की देन है कि गांव और यहां के रहने वाले सलामत हैं।
विज्ञापन