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Maharajganj News: एसएनसीयू वार्ड में 26 बेड पर 46 बच्चे भर्ती, बढ़ी परेशानी
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एसएनसीयू वार्ड में 26 बेड पर 46 बच्चे भर्ती, बढ़ी परेशानी
जन्म के समय वजन कम अथवा पीलिया या सांस फूलने की समस्या से ग्रसित बच्चे हैं भर्ती
एक बेड पर दो से तीन नवजातों को भर्ती कर इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिला अस्पताल के सिक एंड न्यू बार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में नौनिहालों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं। एसएनसीयू वार्ड में 26 बेड पर 46 बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। एक बेड पर दो से तीन नवजात भर्ती हैं। यह वे नवजात हैं, जिनका जन्म के समय वजन कम है, अथवा पीलिया या सांस फूलने की समस्या से ग्रसित हैं। एक बेड पर दो से तीन नवजातों को भर्ती कर इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।
शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में करीब 900 मरीज पहुंचे। लोगों को इलाज कराने में समस्या झेलनी पड़ी। सबसे ज्यादा परेशानी एसएनसीयू वार्ड में दिखी। यहां क्षमता से ज्यादा नवजातों को भर्ती किया गया है। डॉक्टरों को इलाज में बेहद सावधानी बरतनी पड़ रही है। तीमारदार सुमित्रा देवी ने कहा कि बच्चे को भर्ती कराई हूं। बच्चे की सेहत में सुधार हो रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि वार्ड में भर्ती बच्चों को इलाज बेहतर ढंग से कराने की कोशिश की जा रही है। समय समय पर जांच की जाती हैं। वार्ड में इस समय ज्यादा बच्चे भर्ती हैं।
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ऐसे बच्चों को किया जाता भर्ती
इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, जांडिस, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है। इनमें कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिनों के लिए यहां रखना पड़ता है। आए-दिन कम से कम आठ से दस नवजात इस तरह के आ रहे हैं। बृहस्पतिवार को यहां 42 नवजात भर्ती मिले। एक बेड पर दो से तीन नवजातों को भर्ती कर इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।
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अस्पताल में भर्ती मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है। एसएनसीयू वार्ड में बेड बढ़ाने के लिए व्यवस्था की जाएगी। आने वाले दिनों में समस्या नहीं होगी।
डॉ. एपी भार्गव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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एक बेड पर दो से तीन नवजातों को भर्ती कर इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिला अस्पताल के सिक एंड न्यू बार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में नौनिहालों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं। एसएनसीयू वार्ड में 26 बेड पर 46 बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। एक बेड पर दो से तीन नवजात भर्ती हैं। यह वे नवजात हैं, जिनका जन्म के समय वजन कम है, अथवा पीलिया या सांस फूलने की समस्या से ग्रसित हैं। एक बेड पर दो से तीन नवजातों को भर्ती कर इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।
शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में करीब 900 मरीज पहुंचे। लोगों को इलाज कराने में समस्या झेलनी पड़ी। सबसे ज्यादा परेशानी एसएनसीयू वार्ड में दिखी। यहां क्षमता से ज्यादा नवजातों को भर्ती किया गया है। डॉक्टरों को इलाज में बेहद सावधानी बरतनी पड़ रही है। तीमारदार सुमित्रा देवी ने कहा कि बच्चे को भर्ती कराई हूं। बच्चे की सेहत में सुधार हो रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि वार्ड में भर्ती बच्चों को इलाज बेहतर ढंग से कराने की कोशिश की जा रही है। समय समय पर जांच की जाती हैं। वार्ड में इस समय ज्यादा बच्चे भर्ती हैं।
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ऐसे बच्चों को किया जाता भर्ती
इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, जांडिस, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है। इनमें कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिनों के लिए यहां रखना पड़ता है। आए-दिन कम से कम आठ से दस नवजात इस तरह के आ रहे हैं। बृहस्पतिवार को यहां 42 नवजात भर्ती मिले। एक बेड पर दो से तीन नवजातों को भर्ती कर इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।
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अस्पताल में भर्ती मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है। एसएनसीयू वार्ड में बेड बढ़ाने के लिए व्यवस्था की जाएगी। आने वाले दिनों में समस्या नहीं होगी।
डॉ. एपी भार्गव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक