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यूपी: गरीबों पर सितम, अमीरों पर रहम
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 05 Jul 2013 03:29 PM IST
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गरीबों को आवास देने की सरकारी प्राथमिकता को लखनऊ विकास प्राधिकरण में पलीता लगाने की बात इससे ही स्पष्ट हो जाती है कि निजी कंपनियां 20 जुलाई से आवंटियों को मकानों की चाभी देने लगेंगी।
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जबकि एलडीए की ओर से, ईडबल्यूएस और एलआईजी के तहत नए फ्लैटों की स्कीम अभी तक लटकी पड़ी है। दूसरी ओर बन रहे फ्लैटों में कब पजेशन मिलेगा यह भी तय नहीं है।
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सुलभ के 3000 आवंटी बेहाल
सुलभ आवासीय योजना के गोमती नगर विस्तार के लगभग तीन हजार आवंटी बेहाल हैं। यहां बिजली के कामों में देरी की वजह से सड़क निर्माण का काम बाधित रहा। दो बार टेंडर निरस्त किया गया। टेंडर हुआ भी तो काम में देरी हो रही है।
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ग्रुप हाउसिंग में फिनिशिंग भी नहीं की गई है। शारदा नगर में भी यही हाल है, जबकि जानकीपुरम और प्रियदर्शनी कालोनी में तो काम ही नहीं शुरू हुआ।
127 गरीबों को नहीं मिला अपना घर
कभी 10000 लोगों को तीन और पांच लाख रुपए में अपने घर के फ्लैट देने का वादा करने वाले प्राधिकरण ने बाद में इस स्कीम को मात्र 127 मकानों तक ही सीमित कर दिया था।
मगर तीन साल बीतने के बावजूद आवंटियों को पजेशन तक नहीं दिया गया है। आवंटी लगातार रजिस्ट्री के लिए संपर्क कर रहे हैं मगर उनको जवाब नहीं मिल रहा।
रईसों के आशियाने डेढ़ साल में तैयार
अब तक की सबसे महंगी योजना धेनुमति अपार्टमेंट करीब डेढ़ साल में ही बन कर तैयार हो गई है। इसमें करीब 60 फ्लैट हैं। थ्री बीएचके प्लस स्टडी टाइप के फ्लैट की कीमत एलॉटमेंट के समय करीब 55 लाख रुपए थी।
अब इसकी कीमत बढ़ कर करीब एक करोड़ रुपए हो गई है।
रिवर व्यू में तेजी
2010 में रिवर व्यू अपार्टमेंट के जिन 1000 फ्लैटों का पंजीकरण किया गया था, उनमें पजेशन आवंटियों को दे दिया गया है। वहां लोग रह रहे हैं और रजिस्ट्री भी हो रही है।
2011 में सेंकेंड फेज के रिवर व्यू के लिए रजिस्ट्री अगले महीने शुरू हो जाएगी। जबकि ऐसे ही 2011 में पंजीकरण वाले ग्रीन वुड अपार्टमेंट भी बन कर लगभग तैयार हो चुके हैं।